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खदानों की मिट्टी व पानी से सारंडा की कोयना नदी हुई लाल



गुवा। सारंडा से बहने वाली प्राकृतिक कोयना एवं कारो जैसी नदियों का पानी निरंतर प्रदूषित और खून की तरह लाल हो रहा है। इन नदियों का पानी पीकर सारंडा के दर्जनों गांवों के हजारों ग्रामीण निरंतर बीमार हो रहे हैं। पालतू व जंगली जानवर मारे जा रहे हैं। बीमार मरीजों के इलाज की कोई सुविधा तक नहीं है। इन नदियों का प्रदूषित एवं लाल पानी को फिल्टर प्लांट भी पूरी तरह से साफ नहीं कर पा रही है। 

इन फिल्टर प्लांटों से सारंडा के गांवों में लाल पानी की सप्लाई वर्षा के मौसम में निरंतर जारी है। ग्रामीण इसी लाल पानी में नहाने व अन्य कार्य करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कृषि भूमि निरंतर इस लाल पानी की वजह से बंजर हो रही है। संबंधित विभाग इन नदियों में लाल जहर घोलने वालों के खिलाफ किसी प्रकार की कोई कार्यवाही अथवा जवाबदेही तय नहीं कर पा रही है। उल्लेखनीय है कि सारंडा में सेल एवं टाटा स्टील की पांच खदानें संचालित हैं। 


जहां खदानें संचालित होती हैं वहां प्रदूषण का स्तर बढ़ता है, लेकिन प्रदूषण का स्तर इतना भी नहीं बढे़ की लोगों एवं जानवरों की जान पर बन आये। बीते दिनों हुई भारी वर्षा की वजह से टीएसएलपीएल खदान से बहकर आया लाल पानी तितलीघाट गांव के समीप कोयना नदी के साफ पानी में मिलकर इस नदी को पूरी तरह से लाल कर दी है। नदी का लाल पानी से विभिन्न गांवों के ग्रामीण परेशान हैं। 

कोयना नदी के लाल पानी से प्रभावित तितलीघाट के मुंडा मनचुड़िया सिद्धू, जोजोगुटू के मुंडा कानुराम देवगम, सारंडा पीढ़ के मानकी लागुड़ा देवगम, छोटानागरा के मुंडा बिनोद बारीक, छोटानागरा पंचायत की मुखिया मुन्नी देवगम आदि ने बताया कि नदी का पानी दो दिन पहले तक साफ था। 13 जुलाई को यह टीएसएलपीएल खदान से आयी लाल मिट्टी व पानी की वजह से पूरी तरह से लाल हो गई है। उक्त कंपनी अगर अपने खदान क्षेत्र में इस लाल पानी को रोकने के लिए जगह-जगह चेकडैम बनाई होती तो ऐसा स्थिति नहीं होती। 

या फिर खदान में बना चेकडैम टूटा होगा, जिसे प्रबंधन छिपा रहा है। उन्होंने बताया की बाईहातु गांव में स्थित पानी फिल्टर प्लांट में इसी नदी का पानी जाता है, लेकिन पानी इतना लाल है कि वह प्लांट भी पूरी तरह पानी को साफ नहीं कर पा रहा है। सरकार व स्वास्थ्य विभाग वर्षा में हम ग्रामीणों को शुद्ध पानी पीने की अपील करती है, लेकिन ऐसे हालात में हमें शुद्ध पानी कैसे मिलेगा। हम सभी इसी नदी में नहाते व कपड़ा साफ करते हैं। ग्रामीणों के पालतू जानवर दलदल में फंस मर रहे हैं। कंपनी मुआवजा नहीं दे रही है। 

सारंडा में वर्षा के दौरान मलेरिया व मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है। प्रतिवर्ष कई लोग बीमारी से मारे जाते हैं। चिकित्सा की कोई सुविधा नहीं है। छोटानागरा अस्पताल में एकमात्र आयुष डाक्टर हैं। कैसे बचेगी हमारी जान। हम मजबूरन खदान को बंद कराने को बाध्य होंगे।

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