गुवा । बारिश के मौसम में मौसमी बीमारियों से ग्रसित सारंडा के दर्जनों गांवों के मरीजों का इलाज करने में छोटानागरा स्थित अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सक्षम नहीं है। सारंडा के मरीजों का इलाज के लिए सेल की किरीबुरु-मेघाहातुबुरु जेनरल अस्पताल एवं गुवा अस्पताल पूरी तरह सक्षम है। झारखंड सरकार की तरफ से छोटानागरा में 20 बेड क्षमता का नया अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बनाया गया है, लेकिन नया अस्पताल भवन वर्षों बाद भी हैंडओवर नहीं लिया गया है। यहां कोई सुविधा भी उपलब्ध नहीं है।
पुराना अस्पताल भवन में ही मरीजों का इलाज होता है। पुराना अस्पताल में एक प्रसूति बेड समेत कुल पांच बेड हैं। दो चिकित्सक डॉ अनिल कुमार एवं आयुर्वेदिक डॉ चुड़नदेव महंता की नियुक्ति है। डॉ अनिल कुमार को मनोहरपुर सीएचसी का प्रभारी बना दिये जाने के कारण वे छोटानागरा अस्पताल में लंबे समय से नहीं आ रहे हैं। डॉ चुड़नदेव महंता सप्ताह में मात्र तीन दिन गुरुवार, शुक्रवार एवं शनिवार को सेवा देते हैं। बाकी दिन एमपीडब्लू ओम प्रकाश पांडेय एवं दो एएनएम सिरोफिना तिर्की एवं अंजना तिर्की के भरोसे सारंडा के मरीज हैं। ये भी दिन में ही सेवा देते हैं। रविवार को अस्पताल बंद रहता है।
इस अस्पताल में लैब एवं फार्मासिस्ट की नियुक्ति नहीं होने की वजह से रक्त आदि जांच की सुविधा नहीं है। एम्बुलेंस की भी कोई सुविधा नहीं है। मरीजों की संख्या बढ़ने पर आनन-फानन में जिला से स्वास्थ्य विभाग की टीम को गांवों में भेज शिविर लगा इलाज किया जाता है। सारंडा के मरीजों का निःशुल्क इलाज सेल की किरीबुरु-मेघाहातुबुरु जेनरल अस्पताल में सालों पर मुफ्त में किया जाता है। सेल अस्पताल के सीएमओ डॉ एम कुमार ने बताया कि हमारे अस्पताल में बेड की संख्या 100 है। आक्सीजन, लैब, ऑपरेशन थियेटर, दवा आदि सभी प्रकार की सुविधा 24 घंटे उपलब्ध है।
अस्पताल में 13 बेहतर चिकित्सक एवं 135 सहयोगी स्टाफ मौजूद हैं। सेलकर्मियों से अधिक हम सारंडा के गरीब ग्रामीण मरीजों को निःशुल्क इलाज करते हैं। बारिश के मौसम में दूषित पानी, जल जमाव व गंदगी आदि की वजह से मौसमी बीमारियों जैसे मलेरिया, चर्म रोग, सर्दी, खांसी, बुखार, डायरिया आदि में वृद्धि होती है। इससे ग्रसित काफी मरीज आते हैं। सीएमओ ने कहा कि ग्रामीणों के इलाज हेतु हमारी पूरी टीम 24 घंटे तैयार रहती है. उन्होंने बताया कि हमारे यहां हमेशा सांप व कुत्ता आदि काटने का इलाज से संबंधित दवा उपलब्ध रहती है।
आज तक एक भी सांप काटने के शिकार मरीजों की मौत हमारे अस्पताल में नहीं हुई है। बारिश के मौसम में सांप काटने की घटना में भी वृद्धि होती है। कई मरीज हमारे यहां आते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसी ही सुविधा सेल की गुवा अस्पताल में भी है। वर्तमान में अधिक मरीज नहीं आ रहे हैं। हम चाहते भी हैं कि लोग स्वस्थ रहें एवं उन्हें अस्पताल आना नहीं पडे़।


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