सरायकेला। वर्ष 1984 में को-ऑपरेटिव कॉलेज जमशेदपुर से बतौर छात्र नेता सक्रिय राजनीति में क़दम रखने वाले डॉ शुभेन्दु महतो आज़ कोल्हान में झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक हैं। अपने शांत स्वभाव, बेबाक अदा और सुनियोजित रणनीति के जरिए विपक्षियों में खलबली मचाने वाले डॉ शुभेन्दु महतो के राजनीतिक प्रेरणास्रोत शहीद निर्मल महतो हैं।
वर्ष 1985 में निर्मल महतो के संपर्क में आने के बाद उनकी विचारधारा और कार्यशैली से प्रभावित होकर वे राजनीति में कूदे। वर्ष 1987 में झारखण्ड आंदोलन के दौरान उन्होंने प्रभावी भूमिका निभाई। वर्ष 1991 में उन्हें 5 माह के लिए जेल यात्रा भी करनी पड़ी। डॉ महतो के व्यक्तित्व की सबसे खास बात है कि चेहरे से बिल्कुल शांतचित्त नज़र आते हैं लेकिन अंदर उमड़ रही आक्रामक रणनीति और राजनीतिक चाल से पार पाना विरोधियों के लिए टेढ़ी खीर साबित होती रही है। यही कारण है कि उन्हें कोल्हान की राजनीति का साइलेंट किलर माना जाता है। कार्यकर्ताओं को संगठित करने की बात हो या किसी राजनीतिक मसले पर तर्कसंगत टिप्पणी,उनकी कोई सानी नहीं है।
झारखण्ड मुक्ति मोर्चा का हिस्सा बनने के बाद भी कई ऐसे मौके आए जब उन पर उंगलियां भी उठीं, अपमानित भी होना पड़ा,यूं कहें कि उन्हें अग्निपरीक्षा देनी पड़ी किंतु इन विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने पार्टी का दामन नहीं छोड़ा। बकौल डॉ शुभेन्दु महतो पार्टी उनकी मां समान है और यह अटूट आस्था आजीवन बरकरार रहेगी। शीर्ष नेताओं का उन पर भरोसा और कार्यकर्ताओं का विश्वास ही था कि जिलाध्यक्ष पद पर रहते हुए उन्होंने वर्ष 2019 में हुए विधानसभा आम चुनाव में सरायकेला-खरसावां जिले की तीनों सीट झारखण्ड मुक्ति मोर्चा की झोली में डाल दीं।
उनके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि लंबे समय सक्रिय राजनीति में प्रभावी ढंग से भूमिका अदा करने के बावजूद कभी उनके दामन पर कोई दाग़ नहीं लगा और यही बात उन्हें अन्य लीडर्स से अलग एक ऊंचा कद देती है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी आगामी वर्ष 2024 के लोकसभा आम चुनाव के दौरान जमशेदपुर से प्रत्याशी के तौर पर डॉ शुभेन्दु महतो पर दांव आजमा सकती है। इस संदर्भ में उनसे पूछे जाने पर उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हर राजनेता की तरह उनकी भी अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा है, किंतु हर हाल में पार्टी सर्वोपरि है।
झारखण्ड मुक्ति मोर्चा यदि उन्हें योग्य समझते हुए जमशेदपुर लोकसभा का प्रतिनिधित्व करने का अवसर देती है तो वे अवश्य ही चुनाव लड़ेंगे। अभी लोकसभा चुनाव दूर है इस लिहाज अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। समय और परिस्थितियों के हिसाब से पार्टी तय करेगी कि आगे उनकी क्या भूमिका रहेगी।

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