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रांची के इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर ने IS के लिए बनाए ड्रोन, Ranchi's electronic engineer made drones for IS

 


गुजरात की ‘सामूहिक हत्याओं’ से आहत और बदले की भावना के लिए आतुर सैयद मुहम्मद अर्शियान हैदर (18) के लिए अस्तित्व की लड़ाई अपनी दाढ़ी बढ़ाने पर जाकर केंद्रित हो गई थी। यह युवा मूल रूप से झारखंड के रांची का निवासी है। सैयद मुहम्मद अर्शियान हैदर करीब एक साल से अधिक समय तक अपने चेहरे के बालों को बढ़ाता रहा उसे यह विश्वास हो गया था कि अपने धर्म के प्रति प्रतिबद्ध न होने के कारण ही मुसलमान अपना उत्पीड़न करने वालों का सामना करने में असमर्थ हैं। हैदर के माता-पिता अपने बेटे के नवरूढ़िवादी धार्मिकता की ओर झुकाव से काफी चिंतित थे, और वह उससे नाई के पास जाकर अपनी दाढ़ी कटवाने को कहते रहते। हालांकि, यह युवक 2003 की एक शाम मिले एक मौलवी के तर्क से अधिक आश्वस्त था। ‘लोगों को खुश करने के लिए अल्लाह को नाराज नहीं करना चाहिए।


सवालों के घेरे में आए मौलवी अब्दुल रहमान अली खान, जिसके खिलाफ अब जिहादियों को भर्ती की साजिश रचने के आरोप में मुकदमा चल रहा है, ने पुलिस के सामने अपने इकबालिया बयान में हैदर के साथ अपनी बातचीत की जानकारी दी है। जिसे भारतीय कानून के तहत उसके खिलाफ सबूत के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।


युवा हैदर के लिए तो रहमान के साथ संपर्क एक असाधारण यात्रा की शुरुआत थी। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में स्नातक यह युवा, जिसका घर मूलत: रांची में है, सऊदी अरब के दम्मम में नौकरी करने पहुंच जाता है, वो भी केवल इस्लामिक स्टेट की टीम के लिए अपने कौशल का इस्तेमाल करने. उसने आत्मघाती ड्रोन और कम दूरी की मिसाइलें तैयार की, जो आतंकवादी समूहों के शस्त्रागार के लिए एक क्रांति साबित हुईं।


अब 38 वर्ष का हो चुका हैदर आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में 2017 से तुर्की की जेल में कैद है, लेकिन उसकी जिंदगी को लेकर बहुत ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है। क्लासीफाइड पुलिस और खुफिया रिकॉर्ड के साथ-साथ दोस्तों, परिजनों और पुलिस अधिकारियों के साथ बातचीत के जरिये इस भारतीय की कहानी को टुकड़ों में जोड़ने की कोशिश की, जिसने टेरर टेक्नोलॉजी बदलने में अहम भूमिका निभाई थी। यक्ह बात कई बार सामने आ चुकी है कि कैसे कई भारतीय इस्लामिक स्टेट से जुड़े और इसमें इंटरनेट के जरिये कट्टरपंथी बनाने की साजिश कैसे एक बड़ी भूमिका निभाती है। लेकिन कम से कम अर्शियान हैदर के मामले में इसकी जड़ें कुछ ज्यादा ही गहरी हैं। हैदर पर गहरा असर डालने वाले मौलवी अब्दुल रहमान अली खान की शुरुआत भी काफी अप्रत्याशित रही है।

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