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कोल्हान जंगल में पुलिस की दबिश से घबराकर सारंडा में आ रहे नक्सली, Naxalites are coming to Saranda due to fear of police raid in Kolhan forest.

गुवा। कोल्हान जंगल में पुलिस व सीआरपीएफ की दबिश व मजबूत घेराबंदी से घबराकर भाकपा माओवादी नक्सलियों के शीर्ष नेता अपने-अपने दस्ते के साथ कोल्हान जंगल से भागकर एक बार पुनः सारंडा जंगल में घुस रहे हैं। सारंडा स्थित कुमडीह क्षेत्र के जंगलों में नक्सलियों का एक दस्ता के प्रवेश करने की खबर के बाद ग्रामीणों में भय व्याप्त है। सूत्रों के अनुसार नक्सली अपने संगठन में नये युवकों और बच्चों को शामिल कराने के लिए कुछ गांवों में गए। इससे घबराकर उक्त गांवों के कई बच्चे गांव से भागकर शहरी क्षेत्रों में अपने रिश्तेदारों के यहां शरण लिये हुये हैं। उल्लेखनीय है कि सारंडा के ग्रामीण लगभग 15 वर्षों तक नक्सलियों का आतंक व दंश झेले हुये हैं।

इस दौरान उनके सैकड़ों अपने नक्सली घटना में मारे गये अथवा नक्सलियों के सहयोग करने के आरोप में जेल भेजे गये थे। भले ही नक्सलियों से सारंडा को मुक्त कराने में पुलिस व सीआरपीएफ ने लंबी लड़ाई लड़ी व शहादतें दी थीं। दर्जनों ग्रामीण भी पुलिस मुखबीर होने के आरोप में नक्सलियों के हाथों मारे गये थे। 15 वर्षों तक विकास कार्य अलग से प्रभावित रहा था। अब सारंडा के ग्रामीण नक्सलियों को किसी भी कीमत पर अपनाना नहीं चाहते हैं। 

ग्रामीण अपने बच्चों को शिक्षित कर नेक इंसान बनाना चाहते हैं। यही वजह है कि नक्सलियों के गांव क्षेत्र में आने की खबर के बाद गांव के बच्चे गांव छोड़ भाग रहे हैं। वे अपना भविष्य बर्बाद करना नहीं चाहते हैं। सूत्रों का कहना है कि सारंडा में कुमडीह, बहदा, कुदलीबाद, कोलायबुरु, तितलीघाट, उसरुईया, हतनाबुरु, पोंगा, बालिबा, तिरिलपोसी, नवागांव, बिटकिलसोय गांव के आसपास के जंगलों को काटकर जहां नयी बस्ती बसाया गया है, उसे झारखंड गांव या झारखंड गोड़ा भी कहते हैं। 

उसी क्षेत्र में नक्सली शरण लेते हैं। आज भी नक्सलियों के कुछ समर्थक अथवा सहयोगी इन गांवों में रहते हैं जो उनकी निरंतर मदद करते हैं। नक्सलियों को पहले से आभास हो गया था कि पुलिस अब उसे कोल्हान जंगल से खदेड़ देगी। इसी वजह से उनकी महिला व पुरुष टीम महीनों पूर्व से सारंडा में सादे लिबास में आकर अपने पुराने साथियों की तलाश व नये लोगों को संगठन से जोड़ने के कार्य में लगे थे। हालांकि सारंडा क्षेत्र में पहले से लगभग एक दर्जन सीआरपीएफ व अन्य बलों का कैंप है। पुलिस भी सारंडा में नक्सलियों के प्रवेश की खबर के बाद चौकस है। जल्द ही सारंडा में भी नक्सलियों के खिलाफ पुलिस की बड़ी कार्यवाही देखने को मिल सकती है।

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