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सबकी जननी माँ शारदा देवी : सुनील कुमार दे, Sarada Devi, mother of all: Sunil Kumar De



 3 जनवरी को शारदा माँ की 171 वी जयंती पर विशेष,,,

हाता। भगवान इस युग में रामकृष्ण रूप धारण कर के अवतीर्ण हुए थे। माँ सारदा देवी उनकी आल्हादिनी शक्ति थी।वह स्वयं भगवती थी। माँ शारदा देवी का जन्म पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिला के अंतर्गत जयरामवाटि गांव में 1853 के 22 सितम्बर को कृष्णा सप्तमी के दिन हुआ था। इस बर्ष माँ की जन्मतिथि 3 जनवरी को पड़ी है तिथि अनुसार। शारदा माँ का पिता का नाम  रामचंद्र मुखोपाध्याय और माता का नाम श्यामा सुंदरी थी। स्वयं महामाया कन्या के रूप में भगवान रामकृष्ण देव के साथ लीला बिलास करने के लिए इस धरती पर अवतरित हुई थी। मां शारदा का अनेक रूप है, कभी दुर्गा, कभी काली, कभी जगद्धात्री, कभी लक्ष्मी कभी सरस्वती आदि रूप में मां ने भक्तजनों को दर्शन दी है और कृपा की है।


उनकी महान जीवनी क्षुद्र लिखनी द्वारा वर्णन करना असंभव है। इस युग में सब रूप को छिपाके केवल माँ बनी थी।जगत जननी माँ, विश्व जननी माँ, पापियों  की मा, भक्तों की माँ ,हिन्दू, मुस्लिम, सिख, इसाई, ब्राह्मण, चांडाल सबकी माँ। जगत जननी माँ शारदा का एक प्यारा संतान था जिसका नाम था आमजद। जाति में मुस्लिम था। पेशा था चोरी करना, डैकती करना। दुनिया में सभी लोग आमजद को घृणा करते थे और उससे डरते भी थे।

समाज का एक वह आतंक शारदा माँ के पास आता था। माँ उसको घृणा के बदले प्यार देती थी। प्यार से उसे ठाकुर जी का भोग भी खिलाती थी। केवल यही नहीं उसकी झूटी बर्तन माँ साफ भी करती थी। आप लोग सोच सकते माँ शारदा एक ब्राह्मण हिन्दू महिला थी जिस समय जाति भेद प्रथा चरम सीमा पर थी। उस समय गांव के एक अनपढ़ हिन्दू महिला ने जाति भेद प्रथा को दूर करने के लिए एक विद्रोह छिड़ी थी जो आज के आधुनिक युग में भी हम कल्पना नहीं कर सकते है।

माँ का एक भक्त इसका विरोध करने से माँ बोलती थी,,,, मैं एक माँ हूँ। सब कोई मेरा संतान है। मैं शरत का भी माँ हूँ और आमजद का भी। माँ का कोई जात होती नहीं है। मैं पापी का भी माँ हूँ और धार्मिक का भी, मैं सत का भी माँ हूँ और असत का भी।मेरे संतान के शरीर में अगर धूल कीचड़ लगी हुई है तो माँ का ही कर्तब्य बनता है कि उस संतान की गंदगी शरीर को साफ कर देना।

वाह माँ शारदा वाह। दुनिया में आज तक हमलोगों ने यह बात सुना ही नहीं था। हे जगत जननी हम सभी का प्यारी माँ तुमारे चरणों पर कोटि कोटि प्रणाम करता हूँ माँ। हे माँ तुम्हारा आदर्श और जीवन धारा को अगर दुनिया ग्रहण कर ले तो यह धरती स्वर्ग बन जाएगी। इस माँ के बारे में विश्व विख्यात संन्यासी स्वामी विवेकानंद जी कहा है,,, माँ तुम्हारी कृपा से दुनिया में हज़ारों विवेकानंद पैदा हो सकती है, लेकिन उसके साथ यह भी जनता हूँ तुम्हारी जैसी दूसरी माँ और कोई नहीं बन सकती है।

आज मां शारदा जी शुभ जन्मदिन पर उनकी चरण बन्दना करते हुए विश्व कल्याण के लिए जगतजननी महामाया सारदा से प्रार्थना करता हूं। जननीं सरदांग, देविंग रामकृष्णम जगतगुरुम। पादपद्मे तयो सृतवा प्रणमामि मुहुर्मुहुः।।जय माँ सारदा।

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