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बंगला भाषी अपनी भाषा व संस्कृति को बचाने का कोशिश करें : सुधांशु मिश्र, Bengali speaking people should try to save their language and culture: Sudhanshu Mishra.


एदल गांव में माताजी आश्रम की ओर से अपुर पाठशाला नाम से बंगला स्कूल खोला गया

हाता। 7 जनवरी को एदल गांव में माताजी आश्रम हाता की ओर से अपुर पाठशाला नामक बंगला सिखाने का स्कूल खोला गया। यह नवम स्कूल है जो माताजी आश्रम की सहयोग से खोला गया है। सुधांशु मिश्र ने मां सरस्वती की पूजा अर्चना के साथ स्कूल का शुभारंभ किया। राजकुमार साहू ने सभी को स्वागत किया। कमल कांति घोष ने मां सरस्वती की गीत प्रस्तुत किया। सुनील कुमार दे, शंकर चंद्र गोप, सनत मंडल, मृणाल पाल आदि ने अपनी मातृभाषा बंगला और संस्कृति को बचाने का आह्वान किया।


सुधांशु मिश्र ने कहा,,,कोई भी व्यक्ति का पहचान अपनी भाषा और संस्कृति से होती है इसलिए सभी को अपनी भाषा और संस्कृति को बचाने का प्रयास करना चाहिए। बंगला सबसे सरल और मधुर भाषा है जिसकी भारत में दूसरा और विश्व मे चतुर्थ स्थान है। माताजी आश्रम बंगला भाषा को बचाने का अच्छा काम कर रहा है। उसके बाद उपस्थित 27 बच्चे को माताजी आश्रम की ओर से वर्ण परिचय और मृणाल पाल की ओर से कॉपी और कलम दिया गया। शंकर चंद्र गोप ने पहला बंगला क्लास लिया।अंत में झरना साहू ने धन्यवाद ज्ञापन किया।


प्रति रविवार को अंजना साहू ने निःशुल्क बंगला क्लास लेगी। कार्यक्रम का संचालन सुनील कुमार दे ने किया। इस अवसर पर बलराम गोप, उज्ज्वल बिसय, आशीष कुमार बिसय, अमल बिसय, गौर चंद्र पाल, सीमांत बिषय, तनुश्री साहू, रितेश साहू, मृणाल पाल, सनत मंडल, सुधांशु मिश्र, कमल कांति घोष आदि उपस्थित थे।

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