Default Image

Months format

Show More Text

Load More

Related Posts Widget

Article Navigation

Contact Us Form

Terhubung

NewsLite - Magazine & News Blogger Template
NewsLite - Magazine & News Blogger Template

Bhopal प्रेरक कथा -संकट के आने पर, Inspirational story - when crisis comes

 


Upgrade Jharkhand News. किसी समय एक राजा हुआ करता था। उसका नाम रामसेन था। एक दिन राजा ने सोचा - मैं तो मनुष्य हूं, मनुष्य के अंदाज में जी रहा हूं,इसमें कोई मजा नहीं है,क्यों न ईश्वर को खुश कर जो जानवर चाहूं वही जानवर बन जाऊं। फिर जब चाहूं , मनुष्य बन जाऊं। उसने यह वरदान पाने के लिए भारी तपस्या की । ईश्वर प्रकट हुए और वरदान देकर अन्तर्ध्यान हो गए।  राजा को बड़ा मजा आया। बड़े शीशे के सामने खड़े होकर उसने खुद को कई जानवरों के रूप में देखा। उसके मन में आया कि क्यों न मैं अपने राज्य के जंगलों में क्या हो रहा है , यह देख आऊं। तब एक दिन राजा घोड़े पर सवार होकर एक निर्जन स्थान पर पहुंच गया ।  घोड़े को एक जगह बांधकर वह खुद कुत्ता बन गया और जंगल में चला गया। जहां उसका सामना एक शेर से हो गया,शेर को देखते ही राजा की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई । राजा ने कहा --- हे शेर मुझे मत खाओ , मैं तुम्हारे राज्य का राजा हूं। शेर ने कहा - उल्टी बात ! मैं इस इलाके का राजा हूं। इस जंगल में मेरी चलती है। आज मैं एक मनुष्य का शिकार करने के चक्कर में हूं , तू जा अपने रास्ते पर। 



दो चार कदम बढ़कर शेर फिर वापस आया और बोला -तुम्हारे पास से मनुष्य की बू आ रही है। मैं तुम्हें खाऊंगा।राजा ने दिमाग चलाया  और बोला रुको,मैं पांच मिनट अपने भगवान की पूजा कर लूं ?शेर बोला - कर लो पूजा। कम से कम मरने से पहले उसका नाम तो ले लो। तब शांत मन से राजा ने सोचा - अगर मैं मनुष्य बनूं तो भी ये मुझे खा जाएगा। अगर मैं इसकी तरह शेर बन जाऊं तो भी ये मुझे खा जाएगा , क्योंकि मेरी ताकत व सामर्थ्य तो इन्सान की है। अगर मैं विशालकाय हाथी बन जाऊंगा तो भी मेरे पास से मनुष्य की ही बू आएगी, लेकिन कद के आगे हर कोई बौना पड़ जाता है। मैं हाथी बन जाता हूं तब शायद ये शेर मुझे छोड़ दे या नहीं तो खाए और अंत में फिर खाए तो खा जाए। अब राजा कुत्ते से हाथी बन जाता है। हाथी को देखकर शेर बोलता है - तुम थोड़े रुक जाओ , मैं भी अब अपने भगवान की थोड़ी सी पूजा कर लेता हूं। राजा कहता है - जरूर पूजा कर लो । मुसीबत में वही याद आता है।



शेर अपने आप से कहता है - यह कैसा कुत्ता है,जो कुत्ते से हाथी बन गया। इसे कहां से खाना शुरू करूं। सूंड़ , पैर , पूंछ - कहीं से भी आक्रमण करने में खतरा है। अगर इस अजीबोगरीब जानवर को मैं आधा या पूरा खा भी लेता हूं तो कहीं मेरा पाचन ही न बिगड़ जाए और मैं मर जाऊं। देखो-देखो वह कैसे पैर , सूंड़ और पूंछ को हिला रहा है। यह कोई हाथी नहीं कोई जादू है। इसके चक्कर से निकल जाने में ही फायदा है , नहीं तो आफत है और शेर ऊंची - ऊंची छलांगें लगाता हुआ जंगल में चला जाता है। राजा मुक्त होकर महल चला जाता है।


सीख - इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमेशा अर्जित की गई कलाओं का इस्तेमाल दिमाग से सोच - समझकर ही कर करना चाहिए। आर . सूर्य कुमारी



No comments:

Post a Comment

GET THE FASTEST NEWS AROUND YOU

-ADVERTISEMENT-

NewsLite - Magazine & News Blogger Template NewsLite - Magazine & News Blogger Template NewsLite - Magazine & News Blogger Template NewsLite - Magazine & News Blogger Template