Guwa (Sandeep Gupta) । झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के बैनर तले गुवा कार्यालय में एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता संघ के महामंत्री अंतर्यामी महाकुंड ने की। बैठक में यूनियन के दर्जनों मजदूरों ने हिस्सा लिया और श्रमिकों के ज्वलंत मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। बैठक में विशेष रूप से निम्नलिखित मुद्दों पर जोर दिया गया जिसमें ठेका और सप्लाई मजदूरों का अपग्रेडेशन,गुवा अस्पताल की जर्जर चिकित्सा व्यवस्था में सुधार,बायोमेट्रिक हाजिरी प्रणाली का विरोध,प्रभावित गांवों के बेरोजगारों को रोजगार देना,विस्थापन से पहले समुचित आवास सुविधा सुनिश्चित करना,खदान क्षेत्र की खराब सड़कों की मरम्मत शामिल हैं।बैठक में शामिल मजदूरों ने आरोप लगाया कि गुवा माइंस प्रबंधन श्रमिक हितों की अनदेखी कर रहा है, जबकि श्रमिक लगातार अपनी मेहनत और समर्पण से उत्पादन को कायम रखे हुए हैं।
इस मुद्दे पर यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पाण्डे, जो वर्तमान में जिला बदर की सजा झेल रहे हैं, ने फोन पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा,गुवा प्रबंधन ने करीब 200 मजदूरों को अपग्रेड किया है, जो स्वागतयोग्य कदम है। मैं उन्हें बधाई देता हूं। लेकिन अभी भी सैकड़ों योग्य मजदूर ऐसे हैं जिन्हें जानबूझकर उपेक्षित किया गया है। हम यह अन्याय बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने आगे कहा,सेल प्रबंधन ने वादा किया था कि 500 बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा, लेकिन अब तक अधूरा वादा ही बना है। साथ ही, जो विस्थापित लोग अभी तक सेल की सूची में शामिल नहीं किए गए हैं, उन्हें तुरंत शामिल किया जाए। सीजीएम सिर्फ उत्पादन और ईडी की चिंता करते हैं, लेकिन हॉस्पिटल और माइंस की बदहाली पर चुप्पी साधे हुए हैं। यह रवैया श्रमिक विरोधी है। यूनियन ने बायोमेट्रिक हाजिरी का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि यह मजदूरों की स्वतंत्रता और मानव गरिमा के खिलाफ है। रामा पाण्डे ने स्पष्ट शब्दों में कहा,यह व्यवस्था मजदूरों पर अविश्वास की नीति को दर्शाती है। जब तक यह प्रणाली बंद नहीं की जाती, हमारा संघर्ष जारी रहेगा।
रामा पाण्डे ने लोकसभा सांसद जोबा माझी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा, उनके नेतृत्व में हर विस्थापित को न्याय मिलेगा। हम भले ही वर्तमान में बाहर हैं, लेकिन हमारी आत्मा और चेतना मजदूरों के बीच है। जब तक सांसें चलेंगी, हम न्याय की आवाज बुलंद करते रहेंगे। अपने वक्तव्य के अंत में रामा पाण्डे ने झारखंड आंदोलन के पुरोधा, दिसुम गुरु शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा,झारखंड ने अपना मसीहा खो दिया है। शिबू सोरेन जी का यह रिक्त स्थान कभी नहीं भर सकेगा। उन्होंने हमें लड़ने और अधिकारों के लिए अडिग रहने की प्रेरणा दी। यूनियन ने प्रबंधन और सरकार से स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि अगर अगली तिथि तक समाधान नहीं हुआ, तो चरणबद्ध तरीके से आंदोलन किया जाएगा।


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