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Chandil नारायण आईटीआई में बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि मनाया गया Bal Gangadhar Tilak's death anniversary was celebrated in Narayan ITI


Upgrade Jharkhand News. शनिवार को नारायण प्राइवेट आई टी आई में बाल गंगाधर तिलक के चित्र पर पुष्पांजलि देकर पुण्यतिथि मनाई गई। इस अवसर पर संस्थान के संस्थापक डॉ जटाशंकर पांडे जी ने कहा कि वे एक भारतीय राष्ट्रवादी, शिक्षक, समाज सुधारक, वकील और एक स्वतन्त्रता सेनानी थे। अंग्रेज उन्हें "भारतीय अशान्ति के पिता" कहते थे। वे भारतीय अन्तःकरण में एक प्रबल आमूल परिवर्तनवादी थे। उनका मराठी भाषा में दिया गया नारा "स्वराज्य हा माझा जन्मसिद्ध हक्क आहे आणि तो मी मिळवणारच" (स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं उसे लेकर ही रहूँगा) बहुत प्रसिद्ध हुआ। उन्होंने बिपिन चन्द्र पाल, लाला लाजपत राय, अरविन्द घोष और वीओ चिदम्बरम पिल्लै आदि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कई नेताओं के साथ भारत के स्वराज के लिये निकट सहयोग किया। श्री पांडे जी ने कहा कि लोकमान्य तिलक ने इंग्लिश मेमराठा व मराठी में केसरी नाम से दो दैनिक समाचार पत्र शुरू किये जो जनता में बहुत लोकप्रिय हुए। लोकमान्य तिलक ने अंग्रेजी शासन की क्रूरता और भारतीय संस्कृति के प्रति हीन भावना की बहुत आलोचना की।



लोकमान्य तिलक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए लेकिन जल्द ही वे कांग्रेस के नरमपंथी रवैये के विरुद्ध बोलने लगे। 1907 में कांग्रेस गरम दल और नरम दल में विभाजित हो गयी। गरम दल में लोकमान्य तिलक के साथ लाला लाजपत राय और श्री बिपिन चन्द्र पाल शामिल थे। इन तीनों को लाल-बाल-पाल के नाम से जाना जाने लगा। इस अवसर पर मुख्य रूप से एडवोकेट निखिल कुमार, प्रकाश महतो, देवाशीष मंडल, पवन महतो, शशि भूषण महतो, संजीत महतो, कृष्ण पद महतो, अजय मंडल, कृष्णा महतो, गौरव महतो, निमाई मंडल, आदि उपस्थित थे। 



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