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Jamshedpur मनुष्य योनी में जन्म लेकर दुःख में भी सुखी जीवन जीने की सीख देते है भगवान- हिमांशुBy taking birth in human form, God teaches us to live a happy life even in sorrow - Himanshu

 


  • भागवत कथा में महाराज ने भगवान श्री राम और श्री कृष्ण की लीलाओं का किया वर्णन

Jamshedpur (Nagendra) । बिष्टुपुर सत्यनारायण मारवाड़ी मंदिर में चल रहे भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन शनिवार को भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। भागवत कथा के दौरान कृष्ण जन्मोत्सव की झांकी ने सबका मन मोह लिया। इस झांकी में भगवान कृष्ण के जन्म का दृश्य दर्शाया गया था, जिसे देखकर भक्त भाव-विभोर हो गए और भक्तों ने कृष्ण जन्म पर जयकारे लगाए। यह झांकी न केवल भक्तों के लिए एक दृश्य आनंद थी, बल्कि यह भगवान कृष्ण के जन्म की कथा को भी जीवंत करती है। महाराज जी द्धारा कृष्ण जन्मोत्सव पर नंद के घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की एवं गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो गीत पर भक्त जमकर झूमे। मथुरा निवासी कथा वाचक हिमांशु महाराज ने व्यासपीठ से श्री राम और श्री कृष्ण जन्मोत्सव कथा के प्रसंग का व्याख्यान करतेे हुए कहा कि भगवान कृष्ण का जन्म जेल में हुआ था। फिर भी वे माया से प्रेरित होकर गोकूल पहुंच गए। 


उन्होंने भगवान कृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए आगे कहा कि भगवान मनुष्य योनी में जन्म लेकर दुःख में भी सुखी जीवन जीने की सीख देते है। भगवान अंतर्यामी असीम शक्ति के पूंज है। लेकिन उन्होंने अधर्म का नाश और धर्म की पुनः स्थापना के लिए श्रीकृष्ण और श्रीराम सहित दशावतार धारण किए। उन्होंने गृहस्थ में रह कर सदाचार, परोपकार और सत्य के आधार पर जीवन जीने तथा सत्संग के जरिए सर्वव्यापी ईश्वर का नाम स्मरण करने की सलाह दी। मनुष्य के पास थोडा सा धन आने के बाद वह अभिमानी बन जाता है, जो नहीे होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवत स्मरण धर्म, अर्थ, काम मोक्ष प्राप्ति का सरलतम मार्ग है। भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को समझाया था कि कर्म थोड़ा दुखदायी होता है लेकिन बिना कर्म किये सुख की प्राप्ति भी नहीं हो सकती। अगर कर्म का उद्देश्य पवित्र व शुभ हो तो वही कर्म सत्कर्म बन जाता है।



भागवत कथा के बाद रात 09 से 12 बजे तक मंदिर परिसर में महाराज के साथ मथुरा से आए संगीतकारों ने भगवान के भजन प्रस्तुत किए। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के उपलक्ष्य पर लडडु गोपाल को विभिन्न प्रकार की मिठाइयों व मेवे का भोग लगाया गया और कार्यक्रम स्थल पर मौजूद श्रृद्धालुओं को माखनमिश्री व मिष्ठान का प्रसाद वितरण किया गया। इसी के साथ कथावाचक ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओ में माखन चुराने व गोपियों के संग रास रचाने एवं बांसुरी की धुन पर सम्मोहित करने का वर्णन किया। चौथे दिन शनिवार को पूजा यजमान के रूप में हरिशंकर सोंथालिया, प्रकाश सोंथालिया, बनवारी लाल सोंथालिया, बिनोद-रमेश सोंथालिया, श्याम सुंदर-अनिल सोंथालिया उपस्थित थे।



 साथ ही बाबुलाल सोंथालिया, बजरंग लाल सोंथालिया, मुरारी लाल सोंथालिया, कविता-घनश्याम सेदुका, अजय विजय बांकरेवाल, श्याम सेवा समिति, सागर एण्ड कंपनी की तरफ से प्रसाद का आयोजन किया गया था। पाचवें दिन रविवार को कथा वाचक द्धारा गोवर्धन पूजा एवं छप्पन भोग दर्शन का प्रसंग सुनाया जायेगा। इस मौके पर प्रमुख रूप से सुरेश कुमार अगीवाल, अशोक संघी, कुंजविहारी नागेलिया, आशुतोष अगीवाल, ओमप्रकाश रिंगसिया, अशोक नरेड़ी, पंकज अग्रवाल, बजरंग लाल अग्रवाल, सांवरमल अग्रवाल, रमेश अगीवाल, कमल आगीवाल, विश्वनाथ नरेड़ी समेत काफी संख्या में भक्तगण शामिल थे।



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