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Jamshedpur डहरे टुसू जुलूस में उमड़ा जनसैलाब, गम्हरिया और डिमना से जमशेदपुर तक गूंजा ढोल–मांदर A huge crowd gathered in the Dahre Tusu procession, drums and cymbals echoed from Gamharia and Dimna to Jamshedpur.

 


Jamshedpur (Nagendra) कुड़मी समाज द्वारा अपनी सभ्यता और संस्कृति के संरक्षण के उद्देश्य से डहरे टुसू शोभा जुलूस का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर गम्हरिया से आदित्यपुर होते हुए जमशेदपुर के साकची आमबागान तक विशाल जुलूस निकाला गया, जिसमें महिलाओं और पुरुषों की भारी भागीदारी से सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। वहीं पटमदा , बोड़ाम आदि जगहों से भी डिमना चौक होते हुए हजारों की संख्या में आदिवासी कुड़मी समाज के महिला पुरुष ढोल बाजे एवं टुसू , चौड़ल लेकर आम बागान मैदान पहुंचे। डहरे टुसू कार्यक्रम में पूरे कोल्हान क्षेत्र से लोग अपने पारंपरिक वेश भूषा में आए और ढोल–मांदर की थाप पर युवक-युवतियां, महिलाएं और बुजुर्ग पारंपरिक नृत्य करते हुए आगे बढ़े और जुलूस के शक्ल में मानगो पुल से गुजरते हुए साकची आमबागान पहुंचा। 


कार्यक्रम के दौरान आयोजित सभा को संबोधित करते हुए बादल महतो एवं विजय महतो ने डहरे टुसू को झारखंडी सभ्यता और संस्कृति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि डहरे टुसू की शुरुआत टुसू पर्व से पहले होती है और नई फसल के स्वागत में यह परंपरा पीढ़ियों से निभाई जा रही है, जो अब गांव से शहर तक फैल रही है। कुड़मी समाज के प्रखर नेता और पटमदा के जिला पार्षद खगेन महतो ने कहा कि संस्कृति संरक्षण के उद्देश्य से आयोजित इस शोभा जुलूस में लोगों का हुजूम उमड़ा। भारी संख्या में महिला-पुरुष शामिल हुए। 


शोभा यात्रा के दौरान कुरमाली लोकसंगीत और डीजे की धुन पर पारंपरिक नृत्य करते लोगों ने पूरे क्षेत्र को उत्सवमय बना दिया। इस दौरान आम बागान सहित अन्य जगहों पर लोगों की सेवा में सहायता शिविर भी लगाया गया , जहां गुड़, चना और पानी की व्यवस्था की गई थी।



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