Jamshedpur (Nagendra) सिंहभूम जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन/तुलसी भवन द्वारा संस्थान के प्रयाग कक्ष में मासिक "कथा मंजरी" सह हिन्दी साहित्य के 6 साहित्यकारों जैनेन्द्र कुमार, मोहन राकेश, वृंदावन लाल वर्मा, शमशेर बहादुर सिंह , रांगेय राघव एवं जय शंकर प्रसाद की जयंती समारोह आयोजित किया गया । कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्य समिति के कार्यकारी अध्यक्ष डाॅo यमुना तिवारी व्यथित तथा संचालन सह सचिव श्रीमती नीता सागर चौधरी ने की। मौके पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि तुलसी भवन के उपाध्यक्ष राम नन्दन प्रसाद एवं विशिष्ट अतिथि कन्हैया लाल अग्रवाल मंचासीन रहे । दीप प्रज्वलन के साथ समारोह की शुरुआत हुई। सरस्वती वंदना डाॅo वीणा पाण्डेय भारती ने प्रस्तुत किया । स्वागत वक्तव्य साहित्य समिति के उपाध्यक्ष अशोक पाठक स्नेही ने दिया। तदनुपरान्त हिन्दी साहित्य के छह साहित्यकारों जैनेन्द्र कुमार, मोहन राकेश, वृंदावन लाल वर्मा, शमशेर बहादुर सिंह, रांगेय राघव एवं जय शंकर प्रसाद की जयंती के अवसर पर उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए क्रमश: अरुणा झा , माधुरी मिश्रा, कैलाश नाथ शर्मा गाजीपुरी, अशोक पाठक 'स्नेही, ममता कर्ण एवं डाॅ० वीणा पाण्डेय 'भारती' ने उनका साहित्यिक परिचय प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के दुसरे सत्र 'कथा मंजरी' के मौके पर विभिन्न विषयों को स्पर्श करती हुई कुल 11 कहानियों का पाठ किया गया, जिसकी समीक्षात्मक टिप्पणी कथा पाठ के उपरान्त डाॅo यमुना तिवारी व्यथित ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य के दौरान की। कार्यक्रम के दौरान कथा पाठ इस प्रकार रहा -- वसंत जमशेदपुरी : बड़े बूढे, श्रीमती नीता सागर चौधरी : भूख, श्रीमती माधुरी मिश्रा : सुबह का भूला लौटा, डाॅ० अरुण कुमार शर्मा : ऐसे थे वे, सुरेश चन्द्र झा : देवी कृपा, श्रीमती ममता कर्ण : जरा सोचिए, श्रीमती अरुणा झा : अन्तर, डाॅo उदय प्रताप हयात : ओले पे ओले, श्रीमती आरती श्रीवास्तव विपुला : बदलते रिश्ते, श्रीमती पूनम सिंह : फिर हर्ष के अंकुर फूटने लगे, श्रीमती रीना गुप्ता : बेटा पराया हो गया।
कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन साहित्य समिति के उपाध्यक्ष सुरेश चंद्र झा ने की। इस अवसर पर मुख्य रुप से तुलसी भवन के साहित्य समिति के सचिव डाॅ० अजय कुमार ओझा , कैलाश नाथ शर्मा 'गाजीपुरी' , दिव्येंदु त्रिपाठी, महानंद, कवलेश्वर पाण्डेय , वीणा पाण्डेय भारती, रीना गुप्ता , वसंत कुमार, मनोज कुमार, केनेडी सोय, अमित महतो सहित अनेक साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति रही।

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