अंततः लाचार महिला को मौत हो गई,
Jamshedpur (Nagendra) सोनारी एक्सटेंशन रोड़ न.7 की रहने वाली सेवानिवृत झारखंड सरकार की शिक्षिका अंजली बोस सरकारी सिस्टम के अभाव में मरने के कगार पर एमजीएम अस्पताल में पड़ी हुई थी . डॉक्टर अस्पताल में मौजूद परिजनों को अंजली बोस को बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दे रहे थे पर लाखों रुपए बैंक में रहने के बावजूद भी परिजन पैसे के अभाव में उन्हें बड़े अस्पताल में लेकर नहीं जा पा रहे थे . मामला बिगड़ता देख इलाजरत अंजली बोस की छोटी बहन गायत्री बोस ने सामाजिक कार्यकर्ता विकास सिंह को एमजीएम अस्पताल में बुलाया. सूचना मिलने पर अस्पताल पहुंचे विकास सिंह को परिजनो ने बताया की 2008-2009 में कपाली विद्यालय से अंजली बोस सेवानिवृत हुई थी. वह अविवाहित है. उनका कोई संतान नहीं है इसलिए उनको सेवानिवृत्ति होते समय जितने रुपया मिले थे, उन्होंने सीधे भारत सरकार के सबसे प्रतिष्ठित बैंक स्टेट बैंक आफ इंडिया में जमा केवल इसलिए किया था कि जब वह थक जाएगी और उसे दवा और अस्पताल की आवश्यकता होगी तो वह पैसे काम आ जाएंगे. लेकिन यहां उल्टा हो गया परिजन बैंक का चक्कर लगाते लगाते थक गए मगर अंजली बोस का पैसा जान बचाने के लिए समय पर नहीं मिल पाया. बैंक मैनेजर का कहना है कि अंजली बोस का कोई नॉमिनी नहीं है इसलिए उन्हें ही अस्पताल में आना पड़ेगा. परिजनों ने कहा कि वह तो मरणशैय्या पर पड़ी हुई है, आ नहीं सकती. हम लोग उसका इलाज टाटा मुख्य
अस्पताल में करना चाहते हैं. आप सीधे अस्पताल प्रबंधन को उनका पैसा जो लगे दे दीजिए जिससे अंजली बोस का बेहतर इलाज हो पाए. लेकिन बैंक में मौजूद अधिकारियों ने परिजनों की एक नई सुनी और कहा कि नॉमिनी अथवा अंजली बोस बैंक आएगी तब रुपए का भुगतान होगा. नॉमिनी कोई नहीं है और अंजली बोस बैंक जाने की स्थिति में नहीं है. अंजलि बोस की छोटी बहन वह भी सेवानिवृत्ति शिक्षिका है. उनका कहना है कि अंजली का पैसा किसी को नहीं बल्कि अस्पताल में सीधे अगर बैंक वाले जमा कर देंगे तो मेरी बहन की जान बच जाएगी. बहन गायत्री का कहना है कि अगर पैसे के अभाव में मेरी बड़ी बहन का निधन हो गया तो मैं उसके पार्थिव शरीर को स्टेट बैंक आफ इंडिया सोनारी शाखा में लेकर चली जाऊंगी. मौके में पहुंचे भाजपा के पूर्व नेता विकास सिंह ने मामले की जानकारी उपायुक्त पूर्वी सिंहभूम के संज्ञान में लाकर अंजकी बोस के मामले में हस्तक्षेप कर स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया से बात करने का आग्रह किया . जब तक बैंक वाले एमजीएम अस्पताल पहुंचे उससे पहले ही अंजली बोस दुनिया को अलविदा कह दी . बैंक वाले शुक्रवार को सुबह 10 बजे के करीब अस्पताल पहुंचे थे, उससे दो घंटे पहले ही सुबह 8 बजे अंजली बोस ने इस दुनिया को छोड़ चुकी थी । अब देखना है कि इस मामले में किसे दोषी ठहराया जाता है । लेकिन अब क्या होगा? आखिर एक सामाजिक और प्रतिष्ठित महिला की तो इलाज के अभाव में मृत्यु तो हो गई , तकनीकी कारण जो भी हो , जो अब लौटने वाला नहीं है ।

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