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Bhopal शतरंज के शहंशाह विश्वनाथन आनंद Chess King Viswanathan Anand

 


Upgrade Jharkhand News. विश्वनाथन आनंद वह नाम हैं, जिन्होंने भारत को विश्व शतरंज के मानचित्र पर स्थायी पहचान दिलाई। जिस दौर में शतरंज देश में सीमित वर्ग तक ही सिमटा हुआ था, उस समय आनंद ने अपने अद्वितीय कौशल, कठोर अनुशासन और निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन के बल पर भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित किया। आज शतरंज में भारत का नाम विश्व शक्ति के रूप में है उसका पूरा श्रेय आनंद को जाता है। पाँच बार विश्व शतरंज चैंपियन बनना और लंबे समय तक विश्व के शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल रहना उनकी असाधारण प्रतिभा, मानसिक दृढ़ता और समर्पण का सशक्त प्रमाण है। विश्वनाथन आनंद का जन्म 11 दिसम्बर 1969 को तमिलनाडु के मयिलादुथुरई में हुआ। उनके पिता कृष्णमूर्ति विश्वनाथन दक्षिण रेलवे के जनरल मैनेजर के पद पर सेवा दे चुके है। माता सुशीला गृहणी है। आनंद के बड़े भाई शिवकुमार क्रॉम्पटन ग्रीव्स में मैनेजर हैं और उनकी बहन अनुराधा  संयुक्त राज्य अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन में  प्रोफेसर है। आनंद की पत्नी का नाम अरुणा तथा बेटे का नाम आनंद अखिल है। विश्वनाथन आनंद का शतरंज से पहला परिचय महज़ छह वर्ष की उम्र में हुआ। उनकी माँ सुशीला आनंद ने घर  में उन्हें शतरंज की शुरुआती चालें सिखाईं। परिवार की निकट पहचान वाली दीपा रामकृष्णन ने भी आनंद को शतरंज सिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 


माँ के स्नेह और परिवार के प्रोत्साहन से  विश्वनाथन आनंद की शतरंज यात्रा आगे बढ़ी, जो आगे चलकर उन्हें विश्व शतरंज के शिखर तक ले गई। आनंद ने पांच बार वर्ल्ड चैंपियनशिप जीती है। आनंद की इस सफलता में उनकी मां सुशीला आनंद का बड़ा हाथ रहा है। मौसम में अचानक आए बदलाव के कारण हवाई मार्ग अवरुद्ध हो गया था, जिससे विश्व शतरंज चैंपियन विश्वनाथन आनंद को बुल्गारिया की राजधानी सोफिया तक लगभग 40 घंटे का कठिन सड़क सफर करना पड़ा। यह यात्रा न केवल लंबी थी, बल्कि शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद थकाने वाली भी,लेकिन आनंद की खासियत यही रही कि उन्होंने इस थकान को अपने खेल पर हावी नहीं होने दिया। पूरी एकाग्रता और आत्मविश्वास के साथ उन्होंने मुकाबले में उतरकर बुल्गारिया के स्थानीय स्टार वेसलिन टोपालोव को 6.5 - 5.5 अंकों से पराजित किया और विश्व खिताब पर अपना कब्जा बरकरार रखा।


यह घटना वर्ष 2010 की है। जब  बुल्गारिया की राजधानी सोफिया में आयोजित होने वाली विश्व शतरंज चैंपियनशिप से ठीक कुछ दिन पहले हवाई यातायात पर प्रतिबंध लग गया था। यूरोप में छाए ज्वालामुखीय धुएँ के बादलों के कारण विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद को निर्धारित तिथि पर उड़ान नहीं मिल सकी। इस असाधारण परिस्थिति को देखते हुए आनंद ने विश्व शतरंज महासंघ (फीडे) से टूर्नामेंट को तीन दिन के लिए स्थगित करने की मांग की थी, ताकि वे बिना अत्यधिक थकान के प्रतियोगिता में भाग ले सकें। हालांकि आयोजकों ने इस अनुरोध को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया और प्रतियोगिता को सिर्फ एक दिन के लिए ही टालने का निर्णय लिया। यह प्रसंग न केवल उस दौर की कठिन परिस्थितियों को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि किन विपरीत हालातों में आनंद ने विश्व मंच पर उतरकर अपने खिताब की रक्षा की।


विश्वनाथन आनंद को आज पूरी दुनिया 'विशी आनंद' के नाम से जानती है। लेकिन यह जानना दिलचस्प है कि विशी उनका जन्म या पारिवारिक नाम नहीं है। उनका वास्तविक नाम आनंद है, जबकि विश्वनाथन उनके पिता का नाम है, जिसे दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुसार नाम के साथ जोड़ा जाता है। अंतरराष्ट्रीय शतरंज मंच पर विश्वनाथन’ का उच्चारण विदेशी खिलाड़ियों और पत्रकारों के लिए अपेक्षाकृत कठिन था। इसी कारण स्नेह और सुविधा के तौर पर उन्होंने आनंद को “विशी” कहना शुरू कर दिया। समय के साथ यह उपनाम इतना प्रचलित हो गया कि 1990 के दशक में यह केवल एक निकनेम नहीं रहा, बल्कि आनंद की वैश्विक शतरंज पहचान बन गया।  विश्व शतरंज चैंपियन विश्वनाथन आनंद द्वारा संचालित वेस्टब्रिज आनंद शतरंज अकादमी का मुख्य उद्देश्य भारत के सर्वाधिक प्रतिभाशाली युवा शतरंज खिलाड़ियों को विश्व स्तर की मेंटरशिप और प्रशिक्षण प्रदान करना है। वेस्टब्रिज कैपिटल के सहयोग से 2020 में स्थापित  यह अकादमी आधुनिक ऑनलाइन प्रशिक्षण के साथ-साथ सोवियत-शैली की अनुशासित कोचिंग पद्धति पर आधारित है। इस अकादमी के माध्यम से आनंद व्यक्तिगत रूप से निहाल सरीन, प्रज्ञानानंद, आर. वैषाली, गुकेश और रौनक साधवानी जैसे शीर्ष युवा खिलाड़ियों का मार्गदर्शन कर चुके हैं। भारतीय शतरंज की नई पीढ़ी को अंतरराष्ट्रीय मंच के लिए तैयार करने में यह अकादमी एक सशक्त और दूरदर्शी भूमिका निभा रही है। वर्तमान विश्व चैंपियन डी. गुकेश का नाम भी उन खिलाड़ियों में शामिल है जिन्होंने इस प्रशिक्षण केंद्र से मार्गदर्शन प्राप्त किया। 


नीट ने विश्व शतरंज चैंपियन विश्वनाथन आनंद के साथ मिलकर नीट माइंड चैम्पियंस एकेडमी की शुरुआत की थी। इस अकादमी का मुख्य उद्देश्य बच्चों और युवा छात्रों में रणनीतिक सोच, एकाग्रता, निर्णय-क्षमता और चेस जैसी बौद्धिक दक्षताओं को विकसित करना था। इस पहल के माध्यम से शतरंज को केवल एक खेल नहीं, बल्कि मानसिक विकास का प्रभावी माध्यम मानकर शिक्षा से जोड़ा गया। इस महत्वपूर्ण शैक्षिक अभियान में विश्वनाथन आनंद नीट के ब्रांड एंबेसेडर भी रहे, जिससे अकादमी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली। भारत के दिग्गज शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथ आनंद के सम्मान में वर्ष 2015 में एक लघु ग्रह का आधिकारिक नाम विश्वनाथन आनंद के नाम पर रखा गया है जो उनकी उपलब्धियां के लिए दिया गए एक अनूठा सम्मान है। विश्वनाथन आनंद केवल शतरंज की बिसात पर अपनी चालों से ही नहीं, बल्कि वैश्विक शतरंज प्रशासन में भी भारत की सशक्त आवाज़ बने हुए हैं।


वर्तमान में वे अंतरराष्ट्रीय शतरंज महासंघ (फीडे) के उपाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। इस भूमिका में आनंद शतरंज के वैश्विक विकास, युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहन, खेल की पारदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके विस्तार से जुड़ी नीतियों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। एक महान खिलाड़ी से सफल प्रशासक तक की उनकी यह यात्रा, शतरंज के प्रति उनके समर्पण और दूरदर्शी नेतृत्व को दर्शाती है। शतरंज ऑस्कर एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मान है, जो हर वर्ष विश्व के सर्वश्रेष्ठ शतरंज खिलाड़ी को प्रदान किया जाता है। विश्वनाथन आनंद ने 1997, 1998, 2003, 2004, 2007 और 2008 में कुल 6 बार यह सम्मान जीतकर विश्व शतरंज में भारत का गौरव बढ़ाया। खिलाड़ी होने के साथ-साथ आनंद एक संवेदनशील लेखक भी हैं। उन्होंने अपनी शतरंज यात्रा और अनुभवों को साझा करते हुए “माइ बेस्ट गेम्स ऑफ चेस” नामक पुस्तक लिखी। इस पुस्तक के लिए उन्हें 1998 में ब्रिटिश चेस फेडरेशन ‘बुक ऑफ द ईयर’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ( लेखक छत्तीसगढ़ प्रदेश शतरंज संघ के सचिव हैं) हेमन्त खुटे



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