Upgrade Jharkhand News. महादेव शिव हिमालय से लेकर बंगाल की खाड़ी और अरब सागर तक सभी जगह व्याप्त हैं। भारत की वर्तमान सीमाओं के पार भी उनका प्रभाव है। हर श्रेणी के लोगों में वे मान्य हैं। अपने विविध रूपों, स्वरूपों और क्रिया-कलापों के कारण वे सारे संसार में व्याप्त हैं। डॉ. हजारीप्रसाद द्विवेदी के अनुसार शिव सही अर्थों में राष्ट्रीय देवता हैं। इस महादेवता के रूप में समूचे भारत का विश्वास मूर्तिवान हुआ है। दर्शन, काव्य, नाटक, नृत्य मूर्ति, चित्र, वास्तु, संगीत जो कुछ भी भारत की श्रेष्ठ देन है, उन सब पर ही इस महादेवता का प्रभाव है। शिव ने अपने इन्हीं महान गुणों के कारण देश के पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक भारतवासियों को पिरोकर रखा है। सारा राष्ट्र इस नाम से जुड़ा है। शिव के साथ हमारे राष्ट्र का इतिहास निरन्तर सम्बद्ध रहा है। शिव सब प्रकार से हमारी राष्ट्रीय एकता के उत्तम प्रतीक हैं। शिव में अव्यक्त और अदृश्य सृजन शक्ति अंतर्निहित है। शिव सहयोगी के रूप में सर्वमान्य हैं। वे अतुलनीय और असाधारण देवता हैं। वे सृष्टा, संरक्षक और संहारक हैं। महायोगेश्वर शिव विशुद्ध चैतन्य हैं। विशुद्ध प्रज्ञा का दूसरा नाम ही शिव है।
शिव नीलकंठ के रूप में भी सर्वत्र जाने और पूजे जाते हैं। उनकी नीलकंठ के रूप में पूजा उन समस्त बलिदानियों की पूजा है, जिन्होंने मानवता की रक्षा के लिए अपने जीवन की बलि दी। शिवत्व का आदर्श यही है, स्वयं विष पीकर औरों को अमृत का भागी बनाते हैं। भूतनाथ पिशाचों से घिरे रहकर भक्तों को देवत्व प्रदान करते हैं। स्वयं दिगम्बर रहकर सेवकों को दिव्याम्बरधारी बनाते हैं। वे विश्वमूर्ति हैं, उनका वेश अशिव है पर वे स्वयम् शिव हैं। संसार जब असुर-अत्याचार से त्राहि-त्राहि कर उठा था तो उन्होंने त्रिपुरासुर का संहार किया पर जब आनंदोल्लास में स्वयं ने उन्मत्त होकर ताण्डव किया तो त्रिलोक्य कांप उठा। वे स्वयं नटराज हैं। उनके विराट उद्धाम तांडव का प्रचार तण्डुमुनि नामक उनके शिष्य ने किया। भारत जिन बातों पर गर्व करता है, उनमें अधिकांश देवाधिदेव महादेव शिव से सम्बद्ध हैं। आज शिव की प्रासंगिकता कुछ ज्यादा ही है। सारा संसार, अधर्म, अनीति और अनाचार के कुमार्ग पर है। आज ऐसे संहारक शिव की आवश्यकता है, जो अधर्म का विनाश करके धर्म की स्थापना करे, जो अनीति से हटाकर न्याय को प्रतिष्ठित करे, जो अनाचार के बदले सदाचार पर आधारित समाज की रचना करे। आज संसार को ऐसे बलिदानियों, त्यागियों और प्राण की बाजी लगाने वाले महामानवों की जरूरत है, जो संभावित विनाश से सारी मानवता की रक्षा कर सकें। महाशिवरात्रि पर शिव के महान आदर्शों का संकल्प कर शिव की उपासना कर हम उन गुणों का स्मरण करते हैं, जिनके जीवित रहने से समाज जीवित रहता है।
महाशिवरात्रि के इस पावन पर्व पर सारे देश के शिव मंदिरों में धर्मप्राण जनता पूजा-अर्चना करती है और उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करती है। इस दिन शिव की उपासना देश के उन सारे क्षेत्रों में होती है, जहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई है। ये पीठ या साधना केन्द्र असम से सिंधु और कश्मीर से कन्याकुमारी तक फैले हुए हैं। इस प्रकार इस पावन पर्व पर सारा राष्ट्र किसी न किसी रूप में शिव की उपासना से जुड़ जाता है। इस अवसर पर अनेक स्थानों पर शिव मेलों का आयोजन भी होता है। चारु सक्सेना



































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