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Mumbai सुपरटेक केस में सुप्रीम कोर्ट का मास्टरस्ट्रोक: अटके घरों को मिली नई रफ्तार Supreme Court's masterstroke in Supertech case: Stuck homes get a new lease of life

 


  • सपनों के घर की उम्मीद जगी: सुपरटेक प्रोजेक्ट्स पर कोर्ट की बड़ी पहल
Mumbai (Anil Bedag)  देश के चर्चित रियल एस्टेट संकटों में शामिल सुपरटेक लिमिटेड मामले में अब एक नई उम्मीद की किरण दिखाई देने लगी है। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद वर्षों से अटके हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की दिशा में ठोस प्रगति का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। यह मामला केवल एक कंपनी के दिवालिया होने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन हजारों होमबायर्स की उम्मीदों से जुड़ा है, जो लंबे समय से अपने घर के इंतजार में हैं। कोर्ट की निगरानी में चल रही इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया के दौरान इंटरिम रेज़ोल्यूशन प्रोफेशनल (IRP) के नेतृत्व में एक ऐसा व्यावहारिक ढांचा तैयार किया गया है, जो निर्माण कार्य को फिर से शुरू करने और समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर केंद्रित है।


इस दिशा में एक बड़ा कदम तब सामने आया, जब सरकारी कंपनी एनबीसीसी इंडिया लिमिटेड को रुके हुए प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव रखा गया। इस प्रस्ताव को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल ने मंजूरी दी, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यह व्यवस्था न केवल उचित है बल्कि Insolvency and Bankruptcy Code के अनुरूप भी है।
पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक Apex Court Committee का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता IRP हिटेश गोयल कर रहे हैं। समिति में सचिन देव ( यूनियन बैंक के प्रतिनिधि), प्रवीण निजहावन ( एलटी फाइनेंस  के प्रतिनिधि) और विजय कुमार चौधरी एनबीसीसी इंडिया लिमिटेड के प्रतिनिधि) जैसे सदस्य शामिल हैं। इसके अलावा एक स्वतंत्र रियल एस्टेट या कंस्ट्रक्शन विशेषज्ञ को भी समिति में शामिल किए जाने की संभावना है। 


यह समिति प्रोजेक्ट्स की प्रगति, फंड के उपयोग और निर्माण की गुणवत्ता पर नजर रखेगी, ताकि कार्य समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पूरा हो सके। न्यायिक निगरानी और संस्थागत सहयोग से तैयार यह मॉडल अब उन हजारों परिवारों के लिए राहत की खबर बनकर उभरा है, जो वर्षों से अपने सपनों के घर का इंतजार कर रहे हैं।


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