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Jamshedpur बिना नक्शा स्वीकृत कराए अथवा स्वीकृत नक्शा का विचलन कर अवैध निर्माण होने से जेएनएसी को करोड़ों रुपये का हो रहा नुकसान JNAC is incurring losses worth crores of rupees due to illegal construction without getting the map approved or by deviating from the approved map.

 


Jamshedpur (Nagendra) जेएनएसी अंतर्गत मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल एवं सेंट मैरिज स्कूल समेत अन्य दर्जनों आवासीय एवं व्यवसायिक भवन बिना नक्शा स्वीकृत कराए अथवा स्वीकृत नक्शा का व्यापक रूप से उल्लंघन कर बन रहे हैं. बहुमंजिला भवन बनाने के लिए जेएनएसी कार्यालय का आदेश जरूरी है़. भवन बनाने के लिए नक्शा पास होना चाहिए, लेकिन बिना किसी आदेश के धड़ल्ले से बहुमंजिला भवन बनाये जा रहे हैं. इससे प्रतीत होता है कि जेएनएसी क्षेत्र में पदाधिकारियों के तालमेल के कारण ही संभवतः बिना किसी मापदंड एवं स्वीकृत नक्शा के भवनों का निर्माण कराया जा रहा है और जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति अंतर्गत राजस्व चोरी एवं अवैध निर्माण आम बात हो गई है.


झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एवं नगर विकास मंत्री सुदीब्य कुमार भी भ्रष्टाचार में लिप्त अफ़सरों पर कार्रवाई करने के बजाय मौन दिख रहे हैं. जेएनएसी क्षेत्र में लगभग 70 प्रतिशत से ज्यादा भवन बिना अनुमति के बनाए जा रहे हैं. लोग यहां  नक्शा पास कराना ही जरूरी नहीं समझते हैं. जबकि जेएनएसी क्षेत्र में होने वाले निर्माण कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी टाउन प्लानर एवं क्षेत्रीय कर्मचारी की है, लेकिन टाउन प्लानर एवं क्षेत्रीय कर्मचारी इस दिशा में सक्रिय रवैया नहीं अपनाते हैं. इस वजह से हर साल करोड़ों रुपये के राजस्व का घाटा उठाना पडता है. वहीं भवन निर्माण करा रहे लोगों का कहना है कि जेएनएसी से मकान की परमिशन आसानी से नहीं मिलती है. आवेदकों को अधिकारी-कर्मचारी कार्यालय के कई चक्कर कटवाते हैं. इसी झंझट के चलते लोग भवन बनाने से पहले अनुमति लेने से बचते हैं. 


यह भी शिकायत है कि बिना परमिशन भवन निर्माण के मामलों में कार्रवाई के नाम पर संबंधित कर्मचारी सुविधा शुल्क लेकर खामोश हो जाते हैं. नियमानुसार नक्शे को जेएनएसी आफिस से स्वीकृत कराना अनिवार्य होता है. लेकिन पैसे बचाने के लालच में लोग बनवाए गये नक्शे को पास नहीं करवाते हैं तथा बिना परमिशन मनमर्जी से भवन निर्माण कराते हैं. जो लोग नक्शा पास करवाते हैं तो नक्शे के अनुसार काम नहीं करवाते हैं. स्वीकृत नक्शे के बजाय निर्माण का दायरा बढ़ाकर सड़क व आसपास की खाली जमीन पर भी मकान खड़े किए जा रहे हैं. ऐसे में नक्शा पास कराना और नहीं कराना बराबर हो जाता है.



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