Upgrade Jharkhand News. नर्मदा के अथाह जल विस्तार में स्थित बरगी बांध का शांत वातावरण 30 अप्रैल की शाम अचानक चीखों और मातम में बदल गया। प्रकृति के सान्निध्य में तपिश से बचने सुखद समय बिताने निकले सैलानियों के लिए वह क्रूज, काल का ग्रास बन गया। यह दुर्घटना केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं है, बल्कि यह हमारे पर्यटन तंत्र की सुरक्षा खामियों और मानवीय त्रुटियों का एक गंभीर प्रमाण भी है। इस हादसे की गहराई में जाने पर कई ऐसे तथ्य दिखते हैं जो प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार प्रतीत होते हैं। सूर्यास्त के समय अचानक आए चक्रवाती तूफान और तेज हवाओं ने जलाशय में ऊंची लहरें पैदा कर दीं। गहरे पानी में क्रूज का संतुलन बिगड़ना प्राकृतिक प्रकोप था, या पर्यटकों की आपाधापी से पैदा हुआ असंतुलन , किंतु ऐसे मौसम की पूर्व चेतावनी का कोई प्रभावी तंत्र न होना एक बड़ी तकनीकी विफलता रही। इसके साथ ही, क्रूज की निर्धारित क्षमता से अधिक पर्यटकों का सवार होना संतुलन बिगड़ने का एक प्रमुख कारण बना। ओवरलोडिंग के कारण जलयान की स्थिरता कम हो जाती है, जिससे विपरीत परिस्थितियों में उसके पलटने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
सुरक्षा मानकों के प्रति उदासीनता भी इस त्रासदी का एक बड़ा पहलू है। जल पर्यटन में लाइफ जैकेट की भूमिका अनिवार्य है, किंतु दुर्भाग्यवश या तो जैकेट की संख्या पर्याप्त नहीं थी या पर्यटकों ने उन्हें पहनना आवश्यक नहीं समझा। सुरक्षा नियमों की यह शिथिलता ही अक्सर जीवन पर भारी पड़ती है। वहीं शाम के धुंधलके और संसाधनों की कमी के कारण तत्काल बचाव कार्य शुरू करने में जो चुनौतियां आईं, उन्होंने हताहतों की संख्या को और बढ़ा दिया। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए केवल शोक जताना पर्याप्त नहीं है, बल्कि एक अभेद्य सुरक्षा ढांचा खड़ा करना समय की मांग है। प्रत्येक क्रूज स्टेशन पर रियल-टाइम मौसम मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित होना चाहिए ताकि हवा की गति या दृश्यता कम होने की स्थिति में परिचालन को तत्काल प्रभाव से रोका जा सके। "नो लाइफ जैकेट, नो राइड" के सिद्धांत को बिना किसी समझौते के लागू करना होगा और जलयानों की भार क्षमता की डिजिटल निगरानी सुनिश्चित करनी होगी। उल्लंघन करने वाले संचालकों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई और लाइसेंस निरस्तीकरण जैसे कदम आवश्यक हैं।
साथ ही, बांध स्थलों पर स्थानीय गोताखोरों और आपदा प्रबंधन दल की एक समर्पित इकाई आधुनिक उपकरणों के साथ सदैव तैनात रहनी चाहिए, जो किसी भी आपात स्थिति में 'गोल्डन ऑवर' के भीतर सहायता पहुंचा सके। क्रूज संचालकों और चालक दल को आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए नियमित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए और जलयानों का समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य रूप से हो। बरगी की लहरों ने जो घाव दिए हैं, वे लंबे समय तक नहीं भरेंगे। पर्यटन और मनोरंजन का उत्साह तभी सार्थक है जब वह सुरक्षा की गारंटी के साथ हो। यह समय है कि हम तकनीक और नियमों के समन्वय से ऐसा वातावरण तैयार करें कि भविष्य में कोई भी जलाशय खुशियों की कब्रगाह न बने। विवेक रंजन श्रीवास्तव

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