Default Image

Months format

Show More Text

Load More

Related Posts Widget

Article Navigation

Contact Us Form

Terhubung

NewsLite - Magazine & News Blogger Template
NewsLite - Magazine & News Blogger Template

Jamshedpur ओल्ड एज होम में डालसा ने वृद्ध लोगों के बीच कानूनी जागरूकता शिविर आयोजित किया , सीनियर सिटीजन एक्ट पर चर्चा DLSA organised legal awareness camp among old people in Old Age Home, discussion on Senior Citizen Act.

 


Jamshedpur (Nagendra) नालसा एवं झालसा के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार जमशेदपुर द्वारा 90 दिवसीय गहन विधिक जागरूकता अभियान के तहत सोमवार को बाराद्वारी स्थित ओल्ड एज होम में कानूनी जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रोजेक्ट मानवता के तहत वृद्ध लोगों को उनके अधिकारों और निःशुल्क कानूनी सहायता योजनाओं की जानकारी दी गई। यह कार्यक्रम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार जमशेदपुर के अध्यक्ष अरविन्द कुमार पांडेय के दिशा-निर्देश व सही मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। 


कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि डालसा सचिव कुमार सौरभ त्रिपाठी तथा विशिष्ठ अतिथियों में मध्यस्थ अधिवक्ता के के सिन्हा एवं लीगल एड डिफेंस कौंसिल के सदस्य विजय तिवारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। मौके पर डालसा सचिव कुमार सौरभ त्रिपाठी ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों को अधिकार दिलाने के लिए सीनियर सिटीजन एक्ट नामक कठोर कानून बनाया गया है। अब आपके अधिकार का कोई भी हनन नहीं कर सकता है। इस कानून को लागू होने से बेटा हो या बेटी आपको अपने सम्पत्ति से कोई भी बेदखल नहीं कर सकता है। यदि कोई वरिष्ठ नागरिक अपनी आय या संपत्ति से अपना खर्च उठाने में असमर्थ है, तो वे अपने वयस्क बच्चों (पुत्र/पुत्री) या रिश्तेदारों से भी भरण-पोषण (मासिक भत्ता) की मांग कर सकते हैं। डालसा सचिव ने कहा कि इस कानून के तहत आपके समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाता है। 


इसके तहत दायर भरण-पोषण के आवेदनों का निपटारा न्यायाधिकरण द्वारा 90 दिनों के भीतर करना अनिवार्य है। वहीं मध्यस्थ अधिवक्ता के के सिन्हा ने कहा कि 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी भारतीय नागरिकों को उनके बच्चों या कानूनी उत्तराधिकारियों से आर्थिक और शारीरिक सुरक्षा प्राप्त करने का कानूनी अधिकार प्रदान करता है। यदि किसी बुजुर्ग ने अपनी संपत्ति (जैसे, मकान) अपने बच्चों या रिश्तेदारों के नाम इस शर्त पर की थी कि वे जीवन भर उनकी देखभाल करेंगे और बाद में वे ऐसा करने से मना कर देते हैं, तो बुजुर्ग भरण-पोषण न्यायाधिकरण के माध्यम से उस संपत्ति के ट्रांसफर (गिफ्ट डीड) को रद्द करवाकर अपनी संपत्ति वापस पा सकते हैं। साथ ही वरिष्ठ नागरिकों की जानबूझकर उपेक्षा करना या उन्हें बेसहारा छोड़ना एक दंडनीय अपराध है. दोषी पाए जाने पर कठोर दंड देने का प्रावधान है। 


वहीं लीगल एड डिफेंस कौंसिल के सदस्य विजय तिवारी ने प्रोजेक्ट मानवता पर विशेष फोकस करते हुए बताया कि प्रोजेक्ट मानवता का मुख्य उद्देश्य आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर व वंचित लोगों तक न्याय पहुंचाना है, ताकि वे अपने अधिकारों का सही उपयोग कर सकें। इसके लिए निःशुल्क कानूनी सहायता, परामर्श, स्वास्थ्य , सामाजिक सहयोग , योजनाओं से लाभान्वित कर उन्हें विकास के मुख्य धारा से जोड़ना है , ताकि उनके जीवन स्तर को उपर उठाया जा सके। 


कार्यक्रम के दौरान ओल्ड एज होम में रहने वाले सभी वृद्ध महिलाओं एवं पुरुषों ने डालसा सचिव के सामने एक एक करके अपने अनुभव एवं समस्याओं को भी शेयर किया। इस जागरूकता कार्यक्रम में पीएलवी के रूप में डॉक्टर के के शुक्ला , नागेन्द्र कुमार, दिलीप जायशवाल, प्रकाश मिश्रा , संजय तिवारी , आशीष प्रजापति एवं सुनीता झा मुख्य रूप से उपस्थित रहे। डालसा सचिव ने कार्यक्रम संपन्न होने के बाद ओल्ड एज होम का निरीक्षण भी किया। इस दौरान उन्होंने वहां रहने वाले वृद्धों के रहन सहन, खान पान, किचेन, शयन कक्ष सहित अन्य सारे व्यवस्थाओं का गहनता से निरीक्षण की।



No comments:

Post a Comment

GET THE FASTEST NEWS AROUND YOU

-ADVERTISEMENT-

.