इस क्षेत्र में काम करने वाले लोग सेमिनार में अपना नजरिया बताएंगे
- पहाड़ हैं तो जरूर मगर अब दिखते नहीं-दिनेश मिश्र
- हिंदी और अंग्रेजी में दस्तावेज तैयार किये जाएंगे
Upgrade Jharkhand News. बुधवार को बिष्टुपुर में आयोजित आयोजन समिति की बैठक में जमशेदपुर पश्चिम के विधायक और जाने-माने पर्यावरणविद सरयू राय ने कहा कि दो दिनों तक चलने वाले इस राष्ट्रीय सेमिनार में जलपुरुष राजेंद्र सिंह शिरकत करेंगे। आजादी के इतने साल बाद भी पहाड़ों के संरक्षण के लिए कोई कानून नहीं बना। वन विभाग ने कुछ कानून बनाए लेकिन वह मूलतः पहाड़ों के लिए नहीं हैं। नदियों के बारे में भी कोई कानून नहीं है। सिंचाई विभाग ने कुछ कानून बनाए लेकिन वो भी नदी केंद्रित नहीं है। नदी और पहाड़, दोनों के लिए कानून बनना चाहिए। जो इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं, वो सभी इस सेमिनार में आएंगे और अपना नजरिया बताएंगे। कानून कैसा होना चाहिए, इस संबंध में एक ड्राफ्ट की तैयारी पर काम चल रहा है। यह ड्राफ्ट नदी और पहाड़, दोनों के बारे में तैयार हो रहा है। कोशिश यही है कि एक ऐसा प्रारुप बनाया जाए, जिसे भारत सरकार के समक्ष रखा जा सके। अगर भारत सरकार को प्रारुप पसंद आता है, वह कानून बन जाता है तो हमारे पहाड़ बच जाएंगे, नदियां बच जाएंगी। ये आने वाली पीढ़ियों के लिए भी वरदान साबित होगा।
सरयू राय ने 2006 का प्रसंग याद करते हुए कहा कि युगांतर भारती के बैनर तले जब वह स्वर्णरेखा के पानी के नमूने जमा कर रहे थे तो बहुतेरे लोग मजाक उड़ाते थे। लोग कहते थे कि क्या कर रहे हैं। आज का वक्त देखें। आज सबसे बड़ी चिंता स्वर्णरेखा के हेल्थ को लेकर है। स्वर्णरेखा नदी के पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो गई जिससे मछलियां मर रही हैं। इसी प्रकार जब आने वाले दिनों में पहाड़ों की चर्चा होगी तो लोग महसूस करेंगे कि हमारे जलवायु को नियंत्रित करने वाले पहाड़ ही हैं।
श्री राय ने कहा कि हालिया दिनों में अरावली क्षेत्र में अवैध खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि जो 100 मीटर से ऊंचा होगा, उसे ही पहाड़ माना जाएगा। चूंकि अब तक पहाड़ की परिभाषा नहीं दी गई, ना ही औसत पहाड़ 100 मीटर के होते हैं, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने 100 मीटर ऊंचाई वाले पहाड़ को ही पहाड़ माना। लेकिन इस फैसले पर काफी प्रतिक्रियाएं आईं और सुप्रीम कोर्ट को अपना फैसला वापस लेना पड़ा। उसने एक अध्ययन कमेटी गठित कर दी है। यह कमेटी रिपोर्ट देगी। पहाड़ और नदी को कैसे सुरक्षित रखेंगे, इसके लिए एक ठोस कानून बनना जरूरी है। यही इस सेमिनार का उद्देश्य है।
इसके पूर्व जाने माने पर्यावरणविद दिनेश मिश्र ने कहा कि पहाड़ हैं तो पर दिखते नहीं। हमें तथ्यों के साथ अपनी बात सरकार तक पहुंचानी है। इसके लिए दस्तावेज तैयार किया जाएगा। यह हिंदी और अंग्रेजी में होगा। हम लोग सामूहिक तौर पर प्रशासन पर दबाव बनाएंगे।
इसके पूर्व सुधीर सिंह ने विषय प्रवेश कराया। मनोज कुमार सिंह ने सेमिनार के बारे में और आयोजन समिति के बारे में जानकारी दी। आभार प्रदर्शन स्वर्णरेखा क्षेत्र विकास ट्रस्ट के ट्रस्टी अशोक गोयल ने किया। इस मौके पर आशुतोष राय, अमरनाथ सिंह, प्रतिभा रानी मिश्रा, पवन सिंह, रवि ठाकुर, मंजू सिंह, विनोद सिंह, प्रवीण सिंह, शेषनाथ पाठक, संजीव मुखर्जी, देव कुमार, सुखदेव सिंह, पिंटू सिंह, तारक मुखर्जी, रणजीत प्रसाद, गोल्डन पांडेय, अतुल सिंह, नवनीत सिंह, नीरु सिंह, विकास साहनी, अजय कुमार, संतोष भगत, टुनटुन सिंह, सन्नी सिंह, संजय सिंह, बंदे शंकर सिंह, अनिल राय, विनीता साह, उषा यादव, विनीत कुमार आदि मौजूद रहे।
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