Upgrade Jharkhand News. क़ौमी सिख मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता कुलविंदर सिंह ने सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान भगवान सिंह को निशाने पर लेटे हुए कहा कि जब बार-बार की लिखित शिकायत और आग्रह पर वह टिनप्लेट कमेटी पर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं? उनकी जुबान खामोश क्यों है? कार्रवाई करने से उनके हाथ को किसने पकड़ रखा है?
साकची, सोनारी, बारीडीह पर भगवान सिंह क्या तर्क दे रहे थे कि यदि कोई भी पक्ष लिखित शिकायत करेगा तो सीजीपीसी हस्तक्षेप करेगी और उसे कोई रोक नहीं सकता है? क्या यह तर्क और प्रावधान अपने खुद के फायदे अथवा अपने समर्थकों को लाभ पहुंचाने के लिए हैं?
अब टिनप्लेट कमेटी के प्रधान पद के उम्मीदवार गुरदयाल सिंह बार-बार मिन्नत कर रहे हैं। प्रभारी प्रधान सुरजीत सिंह खुशीपुर और चुनाव कमेटी के संयोजक गुरचरण सिंह बिल्ला की मनमानी की शिकायत कर रहे हैं। लेकिन प्रधान भगवान सिंह खामोश हैं। यदि उन पर सीजीपीसी संविधान का प्रावधान उस तरह से लागू नहीं होता है, जिस तरह से साकची, बारीडीह और सोनारी में हुआ। मेरा भगवान सिंह से कड़वा सवाल है कि जो सीजीपीसी के संविधान को नहीं मानते, उन्हें महासचिव और सलाहकार पद पर क्यों रखा हुआ है? यदि उन्हें हटाने की क्षमता नहीं है तो खुद इस्तीफा देकर हट जाएं।

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