Upgrade Jharkhand News. बहुभाषीय साहित्यिक संस्था सहयोग द्वारा संत कबीरदास की जयंती के अवसर पर तुलसी भवन के प्रयाग कक्ष में विचार गोष्ठी एवं काव्य-पाठ का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मंचासीन अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती एवं संत कबीर के चित्र पर पुष्पार्पण तथा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। उपासना सिन्हा द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत कर दिया। संस्था की अध्यक्ष डॉ. संध्या सिन्हा ने स्वागत भाषण में कबीर की निर्भीकता, मानवीय दृष्टि और जीवन-दर्शन पर प्रकाश डालते हुए सभी अतिथियों, साहित्यकारों एवं श्रोताओं का अभिनंदन किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अवतार सिंह का सम्मान कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. जूही समर्पिता ने शॉल एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर किया।
कार्यक्रम की विषय-प्रवेशिका प्रस्तुत करते हुए डॉ. रागिनी भूषण ने कबीर की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला तथा उनके भजन का गायन कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके पश्चात ज्योत्सना अस्थाना ने कबीर के प्रसिद्ध दोहों का सुमधुर गायन प्रस्तुत किया। काव्य-पाठ सत्र में डॉ. प्रियंका सिंह, ममता कर्ण ‘मनस्वी’, पद्मा प्रसाद ‘बिन्देश्वरी’, अनीता निधि, नीलम पेड़ीवाल, उपासना सिन्हा, बबली मीरा, डॉ. आशा गुप्ता, प्रणति शरण तथा ज्योत्सना अस्थाना ने सामाजिक सरोकारों, प्रेम, समरसता, मानवीय मूल्यों और कबीर की चिंतनधारा से प्रेरित रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया। कविताओं को श्रोताओं ने भरपूर सराहना दी।
मुख्य अतिथि अवतार सिंह ने अपने उद्बोधन में कबीर के जीवन-दर्शन, भारतीय ज्ञान परंपरा और भक्तिकालीन साहित्य में उनके विशिष्ट योगदान पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि कबीर केवल गाने या पढ़ने का विषय नहीं, बल्कि आत्मसात करने का संदेश हैं। गुरु ग्रंथ साहिब का उल्लेख करते हुए उन्होंने कबीर की वाणी को सत्य, साहस, प्रेम और सामाजिक परिवर्तन की वाणी बताया। उन्होंने कहा कि आज भी समाज में व्याप्त अनेक कुरीतियों पर कबीर की वाणी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी उनके समय में थी। कार्यक्रम का वातावरण अत्यंत उदात्त, सौहार्दपूर्ण और आत्मीय रहा। सभी प्रतिभागियों एवं श्रोताओं ने एक-दूसरे के योगदान का सम्मान करते हुए आयोजन को वास्तविक अर्थों में ‘कबीर-जयन्ती उत्सव’ का स्वरूप प्रदान किया। उपस्थित श्रेष्ठ श्रोताओं की सजग एवं संवेदनशील सहभागिता ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया।
संस्था की पूर्व अध्यक्ष डॉ. मुदिता चन्द्रा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का सफल एवं आकर्षक संचालन रीना सिन्हा ‘सलोनी’ ने किया। इस अवसर पर डॉ. रागिनी भूषण, डॉ. मुदिता चन्द्रा, डॉ. जूही समर्पिता, डॉ. संध्या सिन्हा, डॉ. डॉ. सबिता पॉल, मधुचन्दा चक्रवर्ती, हरि मित्तल, कृष्णा सिन्हा, छाया प्रसाद, सुधा गोयल, सरिता, डॉ. पुष्पा कुमारी, डॉ. पुष्पा सिंह, माधुरी मिश्रा, डॉ. मनीला कुमारी, ब्रजेन्द्र नाथ मिश्र, डॉ. हीरालाल गुप्ता, अनिता सिंह, सुनीता गुड़िया,इंदिरा पाण्डेय, सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित थे।
कार्यक्रम की सफलता का श्रेय सहयोग संस्था के सभी पदाधिकारियों, सदस्यों एवं सक्रिय सहयोगियों को जाता है। यह आयोजन साहित्य, संस्कृति, मानवीय मूल्यों और सामाजिक समरसता के प्रति समर्पित एक सार्थक एवं प्रेरणादायी पहल के रूप में अत्यंत सफल रहा.


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