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Bhopal दृष्टिकोण : वहशी दरिंदों को मिले त्वरित दण्ड Viewpoint: Brutal criminals should be punished swiftly

Upgrade Jharkhand News.  राजस्थान के श्रीगंगानगर में तेरह वर्षीय बालिका के साथ पांच दिन तक तक की गई दरिंदगी की घटना ने राजस्थान की कानून व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। देश भर में वहशी दरिंदों के इस प्रकार के किस्से प्रकाश में आते रहते हैं। यह गंभीर चिंता का विषय है। भले ही राजस्थान पुलिस द्वारा कुछ आरोपियों को गिरफ्तार करके दरिंदगी स्थलों को ध्वस्त कर दिया गया हो, लेकिन दरिंदगी करने वाले तत्वों में कानून का भय न होना यह दर्शाता है, कि समाज नैतिकता और महिला सम्मान जैसे मूल्यों के प्रति उदासीन होता जा रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि यह घटना दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को 23 वर्षीय निर्भया के साथ किये गए सामूहिक बलात्कार एवं हत्या से भी अधिक जघन्य है। फिर भी इस सत्य को नकारा नहीं जा सकता, कि समाज में यौन स्वच्छंदता का खुलापन, सोशल मीडिया पर अश्लील कंटेंट से जुड़े वीडियो,देर सबेर बालिकाओं व युवतियों का घर से बाहर अकेले निकलना भी इस प्रकार की घटनाओं को अंजाम देने में सहायक सिद्ध होता है। कई बार ऐसी घटनाएँ प्रकाश में आई हैं, जब रिक्शा या टेम्पों चालक द्वारा सुनसान स्थल पर पर जघन्य अपराधों को अंजाम दिया जाता है। विचारणीय बिंदु यह भी है, कि नित्य न जाने इस प्रकार की कितनी घटनाएँ घटित होती हैं, जिनका पता ही नहीं चलता। कौन नहीं जानता कि 9 अगस्त 2024 को कोलकाता के आर जी कर मेडिकल कालेज व अस्पताल में रात्रि ड्यूटी पर तैनात 31 वर्षीय ट्रेनी डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या की वीभत्स घटना घटित हुई थी। 


नारी के विरुद्ध अपराधों के चलते कठोर कानून भी हैं, किन्तु उन कानूनों से भी अपराधियों में खौफ न होना चिंताजनक है। विडंबना है कि सभी सरकारें नारी सुरक्षा का ढिंढोरा तो पीटती हैं, मगर सफेदपोश अपराधियों के विरुद्ध कार्यवाही करने से परहेज भी करती हैं। कुछेक मसलों में राजनीतिक दल अपराधी और पीड़िता की जातीय स्थिति के आधार पर विरोध व समर्थन जैसे कृत्य से पीछे नहीं हटते। आवश्यकता यही है कि दरिंदगीपूर्ण घटनाओं पर आरोपी दरिंदों के विरुद्ध सजा का फैसला अल्पसमय में किया जाना चाहिए, ताकि दरिन्दे बेख़ौफ़ होकर दरिंदगी करने का दुस्साहस न कर सक्रें। डॉ. सुधाकर आशावादी



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