Guwa (Sandeep Gupta) सारंडा के रांजाबुरु लौह अयस्क क्षेत्र में स्थानीय रोजगार के मुद्दे पर एक बार फिर बड़ा जनआंदोलन खड़ा होता दिख रहा है। खदान प्रभावित गांवों के मुंडा-मानकी, ग्रामीणों और सारंडा विकास समिति ने सेल गुवा प्रबंधन एवं ठेका कंपनी के खिलाफ आंदोलन का ऐलान करते हुए चेतावनी दी है कि यदि 9 अगस्त तक पूर्व में हुए लिखित समझौते को लागू नहीं किया गया तो 10 अगस्त से रांजाबुरु खदान का उत्पादन, लौह अयस्क डिस्पैच और ट्रांसपोर्टिंग अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दी जाएगी। गंगदा पंचायत के मुखिया राजू शांडिल ने कहा कि स्थानीय लोगों के धैर्य की सीमा समाप्त हो चुकी है। उनका आरोप है कि बार-बार आंदोलन और खदान बंदी के बाद हुए लिखित समझौते का आज तक पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की जमीन, जंगल और संसाधनों पर बाहरी लोगों का वर्चस्व स्वीकार नहीं किया जाएगा और इस बार आंदोलन निर्णायक होगा।
ग्रामीणों के अनुसार, पूर्व में मंत्री दीपक बिरुवा, जिला प्रशासन, सेल प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच हुई त्रिपक्षीय वार्ता में खदान प्रभावित 18 गांवों के युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता, 75 प्रतिशत स्थानीय रोजगार, जल छिड़काव, रैक लोडिंग, ट्रांसपोर्टिंग में स्थानीय भागीदारी तथा प्रदूषण नियंत्रण और कारो नदी की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सहमति बनी थी। उनका आरोप है कि इन बिंदुओं पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने ठेका कंपनी मां सरला पर भी बाहरी लोगों को ड्राइवर, खलासी और अन्य पदों पर नियुक्त करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि खदान प्रभावित गांवों के युवा बेरोजगार हैं, जबकि रोजगार का लाभ बाहरी लोगों को दिया जा रहा है।
मुखिया राजू शांडिल ने कहा कि खदानों से होने वाले प्रदूषण और पर्यावरणीय नुकसान का सबसे अधिक असर स्थानीय गांवों पर पड़ता है, इसलिए रोजगार में भी स्थानीय लोगों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने इसे केवल रोजगार का नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के अधिकार, सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई बताया। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि 9 अगस्त तक लिखित समझौते के अनुरूप कार्रवाई नहीं हुई तो 10 अगस्त से सारंडा विकास समिति जामकुंडिया-दुईया के नेतृत्व में रांजाबुरु खदान का उत्पादन, लौह अयस्क डिस्पैच और ट्रांसपोर्टिंग पूरी तरह ठप कर दी जाएगी। साथ ही उन्होंने प्रशासन और सेल प्रबंधन से समय रहते समाधान निकालने की अपील भी की है।

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