Guwa (Sandeep Gupta) लगातार हो रही बारिश के बीच गुवा, बड़ाजामदा और किरीबुरू क्षेत्र में मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ गया है। हालात ऐसे हैं कि अब मच्छर केवल रात ही नहीं, बल्कि दिन में भी लोगों को परेशान कर रहे हैं। सारंडा क्षेत्र मलेरिया का कोर जोन माना जाता है, इसलिए स्थानीय लोगों में संक्रामक बीमारियों को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सेल प्रबंधन वर्षों से मच्छरों की रोकथाम के लिए नियमित रूप से मच्छररोधी दवाओं का छिड़काव और फॉगिंग कराता रहा है, जिससे शहर में मच्छरों पर काफी हद तक नियंत्रण रहता था। लेकिन इस वर्ष अचानक मच्छरों की संख्या में भारी वृद्धि देखने को मिल रही है। लोगों के अनुसार मच्छररोधी दवाओं की गुणवत्ता में कमी, नियमित फॉगिंग नहीं होना, शहर के विभिन्न हिस्सों में झाड़ियों का उग आना तथा जगह-जगह जलजमाव मच्छरों के बढ़ते प्रकोप के प्रमुख कारण हैं।
उन्होंने मांग की है कि सेल प्रबंधन युद्ध स्तर पर फॉगिंग, दवा छिड़काव और साफ-सफाई अभियान चलाकर मच्छरों पर तत्काल नियंत्रण करे, ताकि मलेरिया और अन्य मौसमी बीमारियों के फैलने से रोका जा सके। इधर, क्षेत्र में मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। गुवा सेल अस्पताल में मरीजों का दबाव बढ़ने से अधिकांश बेड भरे हुए हैं। अस्पताल में गंभीर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है, जबकि सामान्य बीमारी से पीड़ित मरीजों को प्राथमिक उपचार और दवा देकर घर भेजा जा रहा है। यदि समय रहते मच्छरों पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में मलेरिया सहित अन्य संक्रामक रोगों के मामलों में और वृद्धि होने की आशंका जताई जा रही है।


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