Guwa (Sandeep Gupta) पश्चिमी सिंहभूम जिले के किरीबुरू–मेघाहातुबुरु और एशिया के सबसे बड़े साल वन क्षेत्र सारंडा में पिछले करीब 30 घंटों से लगातार हो रही बारिश ने पूरे क्षेत्र को हरियाली और घने कोहरे की चादर से ढक दिया है। मानसून की इस बारिश ने जहां जनजीवन को प्रभावित किया है, वहीं प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों को अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य का दुर्लभ नजारा देखने को मिल रहा है।
लगातार बारिश के कारण पहाड़ियां, जंगल और घाटियां बादलों की धुंध में लिपटी नजर आ रही हैं। कई स्थानों पर दृश्यता काफी कम होने से वाहन चालकों को दिन में भी हेडलाइट जलाकर सावधानीपूर्वक सफर करना पड़ रहा है। तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे दिन में भी लोगों को ठंड का एहसास हो रहा है और अधिकांश लोग आवश्यक कार्य होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं।
दूसरी ओर, यह बारिश किसानों के लिए राहत और खुशियां लेकर आई है। लंबे इंतजार के बाद समय पर हुई अच्छी वर्षा से धान की खेती की तैयारियां तेज हो गई हैं। गांवों में किसान हल-बैल और कृषि उपकरणों के साथ खेतों की जुताई में जुट गए हैं। किसानों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में इसी तरह संतुलित वर्षा होती रही तो इस वर्ष धान की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है। समुद्र तल से लगभग तीन हजार फीट की ऊंचाई पर बसे किरीबुरू और मेघाहातुबुरु को बादलों का शहर कहा जाता है।
मानसून के दौरान यहां बादल सड़कों, पहाड़ियों और घरों के बीच तैरते नजर आते हैं। वहीं सारंडा, जिसका अर्थ "सात सौ पहाड़ियों का जंगल" है, बारिश के मौसम में अपनी वास्तविक प्राकृतिक छटा बिखेरता है। बारिश से धुले साल के घने वन, पहाड़ियों से उतरते झरने, नम मिट्टी की सोंधी खुशबू और पक्षियों का कलरव पूरे वातावरण को मनमोहक बना देते हैं। बारिश और कोहरे से निखरी इस प्राकृतिक सुंदरता को देखने के लिए सप्ताहांत में बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं।
सनसेट प्वाइंट, व्यू प्वाइंट, बादलों से ढकी घाटियां और हरियाली से आच्छादित पर्वत श्रृंखलाएं पर्यटकों और फोटोग्राफरों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। किरीबुरू–मेघाहातुबुरु और सारंडा इन दिनों प्रकृति के अनुपम सौंदर्य का जीवंत उदाहरण बनकर लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं।





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