Jamshedpur (Nagendra) कदमा निवासी अंजनी कुमार मिश्रा के बेटे लक्ष्य मिश्रा की बेंगलुरु स्थित मणिपाल इंजीनियरिंग कालेज में हुई मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में है। लक्ष्य की मौत को कालेज प्रबंधन जहां आत्महत्या बता रहा है, वहीं उसके पिता ने इसे रैगिंग के बाद हुई संदिग्ध हत्या बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। मामले में दिल्ली मानवाधिकार आयोग ने गंभीरता दिखाते हुए संबंधित अधिकारियों से दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट तलब की है। अंजनी कुमार मिश्रा, जो भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में कार्यरत हैं, ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, संबंधित राज्य के मुख्यमंत्री, राज्यपाल और अन्य अधिकारियों को पत्र लिखकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और जमशेदपुर के स्थानीय विधायक सरयू राय से भी सीबीआई जांच कराने का आग्रह किया है। मृतक छात्र के पिता अंजनी कुमार मिश्रा का कहना है कि उनका बेटा आत्महत्या कर ही नहीं सकता। उनका दावा है कि यदि मेरा बेटा लक्ष्य नौ मंजिला इमारत से कूदा होता तो शरीर पर गंभीर चोट के निशान और घटनास्थल पर भारी मात्रा में खून मिलता। उनका यह भी कहना है कि जिस खिड़की से कूदने की बात कही जा रही है, वहां जाली और लोहे की राड लगी हुई थी, जिससे बाहर निकलना भी आंसान नहीं था। ऐसे में कालेज प्रबंधन का दावा कई सवाल खड़े करता है। अंजनी मिश्रा ने आरोप लगाया कि घटना की सूचना पुलिस को देर से दी गई।
अंजनी मिश्रा ने कॉलेज प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए कहा है कि मेरा बेटा लक्ष्य मिश्रा जो मणिपाल इंजीनियरिंग कॉलेज बेंगलुरू में सेकंड ईयर का स्टूडेंट था उसको कॉलेज हॉस्टल में रैगिंग कर हत्या कर दी गई और उसके शव को छत से उठा के नीचे फेंक दिया गया , ताकि उसे आत्महत्या का रूप दिया जा सके। इसीलिए कॉलेज प्रशासन उसको आत्महत्या बता रहा है , लेकिन यह साफ-साफ हत्या की ओर इशारा करता है। साथ ही पुलिस को भी देर से सूचना दी गई और फॉरेंसिक टीम के आने के पहले ही चादर तकिया गायब कर दिया गया तथा हैंडल से दरवाजा तक धो दिया गया , ताकि किसी को शक नहीं हो पाए । अब चुकी मानवाधिकार इस मामले को देख रही तो इसलिए कुछ उम्मीद जागी है कि मृतक छात्र के परिवार को सही न्याय मिल सकता है।



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