Jamshedpur (Nagendra) आनंद मार्ग प्रचारक संघ द्वारा विभिन्न विद्यालयों में विद्यार्थियों के बीच आयोजित प्रेरक कार्यक्रमों में बच्चों को नकारात्मक प्रवृत्तियों से दूर रहकर सकारात्मक जीवन-दृष्टि अपनाने का संदेश दिया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता सुनील आनंद ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को प्रतिदिन परमात्मा से अपनी मातृभाषा अथवा जिस भाषा में वह सहजता से अपने मन की बात कह सके, उसी भाषा में संवाद करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे मनुष्य अपने सबसे प्रिय मित्र से बिना किसी संकोच के अपने सुख-दुःख साझा करता है, उसी प्रकार परमात्मा को अपना सच्चा मित्र और परमपिता मानकर उनसे आत्मीय संवाद करना चाहिए। इससे मन में सकारात्मक भाव उत्पन्न होते हैं, आत्मविश्वास बढ़ता है तथा व्यक्ति गलत कार्यों से स्वतः दूर रहने लगता है। सुनील आनंद ने मानव जीवन की चार कोटियों का उल्लेख करते हुए कहा कि जीव कोटि के लोग केवल अपने स्वार्थ और भौतिक सुखों तक सीमित रहते हैं।
मानव कोटि के लोग अपने साथ-साथ समाज के कल्याण की भी चिंता करते हैं। ईश्वर कोटि के व्यक्तियों का जीवन परोपकार, सेवा और आध्यात्मिक आदर्शों को समर्पित होता है, जो दूसरों के सुख के लिए स्वयं कष्ट सहने को भी तैयार रहते हैं। वहीं ब्रह्म कोटि सर्वोच्च आध्यात्मिक अवस्था है, जिसमें साधक सम्पूर्ण सृष्टि के कल्याण के लिए स्वयं को परम चेतना के प्रति पूर्णतः समर्पित कर देता है। उन्होंने कहा कि यह मानना गलत है कि परमात्मा केवल किसी एक विशेष भाषा को ही समझते हैं। परमात्मा की भाषा प्रेम, भक्ति और सच्ची भावना की भाषा है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी मातृभाषा या जिस भाषा में वह सहज हो, उसी भाषा में परमात्मा से अपने मन की बात कहनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे प्रतिदिन कुछ समय आत्मचिंतन, प्रार्थना और परमात्मा से संवाद के लिए निकालें। इससे उनका मन सकारात्मक विचारों से भर जाएगा, चरित्र का विकास होगा और वे समाज के आदर्श नागरिक बनने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।

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