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Jamshedpur संथाली भाषा में बनी फिल्म 'आंगेन' ने रचा इतिहास, जमशेदपुर के रवि राज मुर्मू को मिला नेशनल अवार्ड The Santhali film 'Aangen' created history, Jamshedpur's Ravi Raj Murmu received the National Award.

 


Jamshedpur (Nagendra) पूर्वी सिंहभूम जिले के जादूगोड़ा के एक छोटे से आदिवासी परिवार से निकलकर नेशनल अवॉर्ड पाने तक रवि राज मुर्मू का सफर आसान नहीं था. उन्होंने बहुत मेहनत करके यह सफलता हासिल की. ​​झारखंड में कलाकारों की कोई कमी नहीं है. समाज के हर क्षेत्र में अलग-अलग जिलों के युवाओं ने अपनी पहचान बनाई है, जिससे अपने क्षेत्र और झारखंड का नाम रोशन हुआ है. आर. माधवन, पूर्व मिस वर्ल्ड प्रियंका चोपड़ा, तनुश्री दत्ता, टीवी एक्ट्रेस प्रत्यूषा बनर्जी और डायरेक्टर इम्तियाज अली जैसे एक्टर दुनिया भर में पहचाने जाते हैं. ये सभी झारखंड के जमशेदपुर से हैं. अब इस लिस्ट में रवि राज मुर्मू का नाम भी जुड़ गया है.


रवि राज मुर्मू की डायरेक्ट की हुई संताली फिल्म "अंगेन" इन दिनों काफी चर्चा में है. इस 13 मिनट की शॉर्ट फिल्म के लिए रवि राज को नेशनल अवॉर्ड मिला है. रवि राज ने बताया कि फिल्में देखना तो आसान लगता है, लेकिन उन्हें बनाना उतना ही मुश्किल होता है. फिल्म के विषय को यथार्थ दर्शाने के लिए उस विषय की पढ़ाई जरूरी है. रवि राज बताते हैं कि उनके गांव में एंटरटेनमेंट का कोई जरिया नहीं था. उन्हें अपने परिवार के बड़ों की सुनाई कहानियां बहुत पसंद थीं. वे कहानियां उन्हें आज भी याद हैं. उन्हें गांव में होने वाले जतरा नाटक देखने में मजा आता था. बाद में, उन्हें वीसीपी वीडियो कैसेट प्लेयर के जरिए फिल्में देखने का मौका मिला. उन्हें अमिताभ बच्चन, मिथुन चक्रवर्ती और गोविंदा स्टारर फिल्में बहुत पसंद थीं. उसी समय से फिल्मों में उनकी दिलचस्पी बढ़ी.


रवि राज मुर्मू बताते हैं कि 12वीं क्लास की परीक्षा में फेल होने के बाद, उनके पास सोचने के लिए एक साल था. उस दौरान, वह एक FM स्टेशन पर RJ ​​बन गए, लेकिन मास कम्युनिकेशन का कोर्स पूरा करने के बाद, उन्हें FTII के बारे में पता चला. वे बताते हैं , "इसे पूरा करते समय, मैं मुंबई फिल्म सिटी में कई लोगों के संपर्क में आया और वहां से सभी काम सीखने की जंग शुरू हुई. फिर मुझे एहसास हुआ कि एक अच्छी फिल्म बनाने के लिए, उस विषय की पढ़ाई और जानकारी होना जरूरी है. मैंने मुंबई में फिल्में बनाने की कोशिश की, लेकिन वह सपना अधूरा रह गया." रवि मुर्मू कहते हैं, "मैंने ठान लिया कि भूखा नहीं रहूंगा, मुझे कुछ करना है. मैं मुंबई से अपने गांव लौटा, एक नई कंपनी बनाई और जिस करीम सिटी कॉलेज में मैंने पढ़ाई की थी, उसी कॉलेज में छात्रों को पढ़ाना शुरू किया. उस दौरान, मैंने बच्चों को साथ लेकर शूटिंग करनी शुरू की. मैंने बचपन में सुनी एक कहानी को शॉर्ट फिल्म में बदला और लगभग तीन लाख की बजट वाली अंगेन बनकर तैयार हुई जो लगभग 13 मिनट की थी. मैंने फिल्म को एक फिल्म फेस्टिवल में भेजा, जहां इसे अच्छा रिस्पॉन्स मिला."

 

"जब राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के लिए मेरे नाम की घोषणा हुई तो मुझे यकीन ही नहीं हुआ. मैंने कड़ी मेहनत और लगन से सफलता हासिल की है." रवि मुर्मू ने बताया कि झारखंड में सब्सिडी डिपार्टमेंट में सब कुछ अच्छा है, लेकिन इससे जुड़े लोग गंभीर नहीं हैं. अगर राज्य सरकार मदद करे तो यहां की लोकल फिल्में काफी आगे बढ़ेंगी." रवि राज मुर्मू की नई फीचर फिल्म 'सुंडी द रॉबिन हुड' दीपावली तक लोगों के लिए रिलीज होगी.



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