Default Image

Months format

Show More Text

Load More

Related Posts Widget

Article Navigation

Contact Us Form

Terhubung

NewsLite - Magazine & News Blogger Template
NewsLite - Magazine & News Blogger Template

Jamshedpur बांग्ला भाषा की शिक्षा के संरक्षण के लिए छह विधायकों ने विधानसभा में उठाई आवाज़ Six MLAs raised their voice in the Assembly for the protection of Bengali language education.

Jamshedpur (Nagendra) झारखंड राज्य में बांग्ला अकादमी के अभाव के कारण बांग्ला भाषा की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है और उच्च शिक्षा मंत्री द्वारा कम छात्र संख्या का हवाला देते हुए विश्वविद्यालयों के बांग्ला विभागों को बंद करने का निर्देश दिया गया है, राज्य में बांग्ला भाषा के भविष्य को सुरक्षित करने तथा बांग्ला भाषा की शिक्षा को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए छह सम्मानित विधायक आगे आए हैं। उनमें मुख्य रूप से विधायक अरूप चटर्जी (निरसा), समीर कुमार मोहंती (बहरागोड़ा), सोमेश सोरेन (घाटशिला), उमाकांत रजक (चंदनकियारी), उमाशंकर सिंह (सारठ) एवं प्रदीप यादव (पोरैयाहाट) ने मॉनसून सत्र के दौरान विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष पुरज़ोर तरीके से मांग उठाई कि झारखंड में बड़ी संख्या में मौजूद बांग्ला भाषी विद्यार्थियों के भाषाई एवं शैक्षणिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए अविलंब बांग्ला अकादमी की स्थापना की जाए तथा विश्वविद्यालयों में बांग्ला विभागों को बंद करने के निर्णय को तुरंत वापस लिया जाए।


इन विधायकों की यह पहल बांग्ला भाषा और उसकी शिक्षा के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और स्वागतयोग्य कदम है। झारखंड बांग्ला-भाषी उन्नयन समिति राज्य के बांग्ला भाषी समाज की ओर से सभी छह विधायकों के प्रति हृदय से आभार एवं धन्यवाद व्यक्त करती है। उन्होंने विधानसभा के भीतर बांग्ला भाषा के विद्यार्थियों, शिक्षकों और व्यापक बांग्लाभाषी समाज की आवाज़ को मजबूती से उठाकर अपनी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का परिचय दिया है। साथ ही, झारखंड बांग्ला-भाषी उन्नयन समिति ने शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू द्वारा कम छात्र संख्या का हवाला देकर विश्वविद्यालयों में बांग्ला भाषा की पढ़ाई एवं बांग्ला विभागों को बंद करने के निर्णय/निर्देश का कड़ा विरोध करती है। इस प्रकार का निर्णय केवल किसी एक विभाग को बंद करने का विषय नहीं है, बल्कि यह राज्य के बांग्ला भाषी विद्यार्थियों के शिक्षा के अधिकार, मातृभाषा में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के अवसर तथा भाषा-संस्कृति के संरक्षण से सीधे जुड़ा गंभीर प्रश्न है।


छात्र संख्या कम होने को बांग्ला विभाग बंद करने का आधार बनाना उचित नहीं है। यदि किसी भाषा की शिक्षा में विद्यार्थियों की संख्या कम हो रही है, तो सरकार और विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि उस भाषा की शिक्षा को मजबूत करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएँ, न कि उस विषय के विभाग को ही समाप्त कर दिया जाए। विभाग बंद करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए बांग्ला भाषा में उच्च शिक्षा के रास्ते बंद हो जाएंगे। शिक्षा मंत्री के इस निर्णय और बयान से झारखंड के पूरे बांग्लाभाषी समाज को गहरी ठेस पहुँची है। समिति स्पष्ट रूप से कहना चाहती है कि बांग्ला भाषा केवल एक विषय नहीं, बल्कि लाखों लोगों की मातृभाषा, पहचान, संस्कृति और भावनात्मक विरासत है। इसलिए सरकार से आग्रह है कि बांग्ला भाषा के प्रति सकारात्मक एवं संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए बांग्ला अकादमी की स्थापना की जाए और विश्वविद्यालयों में बांग्ला विभागों को बंद करने का निर्णय तत्काल वापस लिया जाए। झारखंड बांग्ला-भाषी उन्नयन समिति बांग्ला भाषा की शिक्षा, संरक्षण एवं विकास के लिए लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपना संघर्ष आगे भी जारी रखेगी तथा राज्य सरकार से अपने संवैधानिक एवं भाषाई अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कार्रवाई की मांग करती रहेगी।



No comments:

Post a Comment

GET THE FASTEST NEWS AROUND YOU