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Jamshedpur एमजीएम अस्पताल के बाद सदर अस्पताल में भी मेडिकल कचरे खुले में बिखरे होने की शिकायत After MGM Hospital, Sadar Hospital also reported medical waste lying scattered in the open.

 


Jamshedpur (Nagendra) एमजीएम अस्पताल के बाद अब सदर अस्पताल में भी मेडिकल कचरे के खुले में बिखरे होने और उसके उचित निस्तारण में लापरवाही को लेकर झारखंड ह्यूमन राइट्स कॉन्फ्रेंस-जेएचआरसी ने जिला प्रशासन एवं जिला स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष मनोज मिश्रा के नेतृत्व में पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत प्रतिनिधिमंडल ने सदर अस्पताल का निरीक्षण किया तथा सिविल सर्जन डॉ. शाहिद पाल को ज्ञापन सौंपा।


निरीक्षण के दौरान अस्पताल परिसर में सामान्य कचरे और मेडिकल कचरे को एक साथ जमीन पर बिखरा पाया गया, जहां गाय और कुत्ते मुंह मारते दिखे। जबकि दो दिन पूर्व एमजीएम अस्पताल मे भी मेडिकल कचड़े मे कुत्ते मुँह मारते देखें गए थे | मनोज मिश्रा ने कहा कि फरवरी 2026 में झारखंड हाई कोर्ट द्वारा मेडिकल कचरे के वैज्ञानिक एवं नियमानुसार निस्तारण को लेकर जारी आदेश और दिशा-निर्देशों के बावजूद सात माह बाद भी स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि यह जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा हाई कोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखाने जैसा है।


उन्होंने बताया कि मुलाकात के दौरान सिविल सर्जन डॉ. शाहिद पाल ने स्पष्ट कहा कि उन्हें हाई कोर्ट के उक्त आदेश की जानकारी नहीं है। मिश्रा ने सिविल सर्जन के उक्त कथन पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए सवाल उठाया कि जब जिम्मेदार अधिकारियों को न्यायालय के आदेश की जानकारी ही नहीं है और सरकारी अस्पतालों में मेडिकल कचरा खुले में पड़ा है, तो आम जनता न्याय और सुरक्षा के लिए आखिर किसके पास जाए? सिविल सर्जन को सौपे गए ज्ञापन में जेएचआरसी ने मांग की है, कि क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट के रजिस्ट्रेशन एवं रिन्यूअल के समय बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के अनुपालन की जांच अनिवार्य रूप से की जाए। साथ ही, 30 बेड वाले अस्पतालों में मॉनिटरिंग कमिटी तथा 30 बेड से कम वाले अस्पतालों में नोडल ऑफिसर की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए। संगठन के अनुसार, इन व्यवस्थाओं को लागू करने की समय-सीमा 30 दिन निर्धारित थी, लेकिन सात माह बीत जाने के बाद भी अनुपालन को लेकर गंभीर सवाल बने हुए हैं।


मनोज मिश्रा ने कहा कि मेडिकल कचरे का गलत निस्तारण आम जनता, मरीजों और अस्पताल कर्मियों के स्वास्थ्य के लिए खतरा है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। जेएचआरसी ने जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग को एक माह का अल्टीमेटम देते हुए मांग की कि मेडिकल कचरे का सुरक्षित निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, क्लिनिकल प्रतिष्ठानों के रजिस्ट्रेशन एवं रिन्यूअल में नियमों का अनुपालन जांचा जाए तथा मॉनिटरिंग कमिटी और नोडल ऑफिसर की नियुक्ति सहित हाई कोर्ट के सभी निर्देशों पर आवश्यक कार्रवाई पूरी की जाए। जेएचआर सी ने चेतावनी दी कि यदि एक माह के भीतर ठोस सुधार नहीं हुआ, तो जेएचआरसी जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ धरना-प्रदर्शन सहित चरणबद्ध जनआंदोलन शुरू करेगा। साथ ही न्यायालय के समक्ष अवमानना का मामला दायर किया जायेगा।


उन्होंने दो टूक कहा कि जनस्वास्थ्य और मानवाधिकारों के मुद्दे पर अब केवल आश्वासन नहीं, जमीन पर कार्रवाई चाहिए। आज के प्रतिनिधि मंडल मे मनोज मिश्रा के साथ किशोर वर्मा, अभिजीत चंदा, किशोर वर्मा, गुरूमुख सिंह एवं विश्वजीत सिंह मुख्य रूप से शामिल थे।



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