प्रयागराज। मछली के बच्चे को तैरना नहीं सिखाना पड़ता है...ये लफ्ज थे अतीक के दूसरे नंबर के बेटे अली के जो उसने तो साल पहले एक राजनीतिक सभा में बोले थे। उसके जोशीले भाषण से खूब ताली बजी थी। हालांकि राजनीतिक मंसूबा पूरा नहीं हुआ और इन दिनों पूरा परिवार गर्दिश में हैं। सच तो यह है कि बाप अतीक से से ज्यादा तेवर वाले बेटे निकल रहे हैं। बेटों की टाप के कान्वेंट स्कूलों में पढ़ाई हुई। विदेश जाकर डिग्री लेने का सपना था, लेकिन अब सभी बेटे जेल, कस्टडी में या फरार हैं। पुश्तैनी मकान मिट्टी में मिल चुका है।
अतीक अहमद तो इकलौता था मगर उसके पांच बेटे हैं। उनमें दो अभी नाबालिग हैं और उन्हीं दोनों के नाम कोई आपराधिक केस नहीं है। फिलहास उमेश हत्याकांड के बाद उसी रात से वे दोनों भी पुलिस कस्टडी में हैं। दोनों बड़े बेटे उमर और अली धमकी, अपहरण, रंगदारी मांगने के आरोप में जेल में हैं। तीसरा पुत्र असद उमेश हत्याकांड में फायरिंग करते दिखा और फरार है। माफिया के इन चहेते बेटों ने प्रयागराज के सेंट जोसेफ कालेज के अलावा लखनऊ और दिल्ली के नामी कालेज में पढ़ाई की। उमेश पाल हत्याकांड में फरार असद ने पिछले लखनऊ के डीपीएस से 85 प्रतिशत नंबर के साथ बारहवीं पास किया था। परिवार के लोग चाहते थे कि उसे अपराध की दुनिया से दूर रखा जाए। इसलिए उसे कानून की पढ़ाई के लिए लंदन भेजने की कोशिश की गई।
लंदन के कई कालेज से दाखिले के लिए पत्र भी आया लेकिन अतीक के आपराधिक इतिहास की वजह से असद का पासपोर्ट नहीं बन पाया, और फिर कहा जा रहा है कि बौखलाहट में उसने यह कांड कर डाला। सबसे बड़ा पुत्र उमर नोएडा के एक कालेज से ला की पढ़ाई कर रहा था। तीन साल पहले देवरिया जेल कांड में मुकदमा होने के बाद वह परीक्षा नहीं दे सका और फरार हो गया। सीबीआइ ने दो लाख रुपये का इनाम रखा था। तीन साल तक फरारी के बाद कुछ महीने पहले उसने लखनऊ की अदालत में सरेंडर किया था और वहीं जेल में बंद है।

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