यहां की खूबसूरती देखने के लिए बाहरी पर्यटक भारी तादाद में आते हैं।लेकिन जंगलो में आग लगाने से यहां की खूबसूरती मैं ग्रहण लगता जा रहा है। जंगल कैसे बचेगा यह चिंता का विषय है।वन एंव पर्यावरण प्रेमी जिसने भी 10 वर्ष पूर्व सारंडा को देखा था वह आज का नजारा देख पीड़ा से कराह उठता है एंव यहीं कहता है कि सारंडा को अब भगवान हीं बचा सकता है। सारंडा के ग्रामीण भी जंगलों की निरंतर कटाई से चिंतित हैं एंव उन्हें समझ में नहीं आ रहा है की इसे कैसे रोका जाये। क्योंकि इस अभियान में लकड़ी माफिया एंव वनाधिकार पट्टा हासिल करने का लालसा पाने वाले लोग मुख्य रूप से शामिल हैं। अगर यही हाल रहा तो सारंडा के लोगों को पेयजल एंव वनोत्पाद से होने वाली आर्थिक लाभ से भी हाथ धोना पड़ सकता है।
जिससे बेरोजगारी एंव भुखमरी की विकट स्थिति उत्पन्न हो जायेगी। दूसरी तरफ सारंडा जंगल में लगी आग से उठने वाले धुआं की वजह से मेघालया सन सेट प्वाइंट से बाहरी पर्यटक सारंडा की खूबसूरती और डूबते सूर्य को सही से नहीं देख पा रहे हैं। बाहर से आने के बावजूद उन्हें वन व पर्यावरण की खूबसूरत नजारे देखने को नहीं मिल पा रहा है। इस संबंध में गुवा वन विभाग पदाधिकारी अखिलेश कुमार त्रिपाठी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वन विभाग की ओर से जंगलों में लगी आग को विभाग के वन कर्मियों के द्वारा बुझाई जा रही है। साथ ही साथ पूरे सारंडा में लगी आग को एक साथ नहीं बुझाया जा सकता है इसके लिए गांव गांव में ग्रामीणों को जागरूक कर आग बुझाने का ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि असामाजिक तत्वों द्वारा जंगलों में आग ना लगाया जाए। इससे पर्यावरण की हानि होती ही है साथ ही जंगलों में रहने वाले दुर्लभ जीव जंतु भी विलुप्त हो रहे हैं। वन ही हमारा जीवन है और इसे बचाना हमारा दायित्व है।


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