प्रयागराज। प्रयागराज शहर का पुराना इलाका। इससे आगे चकिया और फिर करेली। यह वही इलाका है, जहां पर माफिया अतीक का कभी डंका बजता था। काफिला निकलने पर सलामी दागने वालों की कतार लग जाती। आज उसी इलाके में सन्नाटा पसरा था। यह सब बदले माहौल की चुगली कर रहा था।
डर से ही सही, असद के एनकाउंटर पर स्थानीय निवासी अब्दुल्ला जैसे कइयों के मुंह से निकला, ‘जो जइसा करी वइसा भरी।’ आम दिनों की तरह चकिया में गुरुवार को भी दुकानें खुली थीं, हर कोई अपने काम में व्यस्त था। चाय की दुकानों पर मोबाइल पर आती खबरें चर्चा का सबब बनी थीं।
अतीक के कार्यालय के सामने मो. रोशन की चाय की दुकान पर एकत्र लोग असद के मारे जाने से सकते में दिखे। कुछ एनकाउंटर पर अपनी-अपनी राय दे रहे थे, तर्कों के बीच सवाल और फिर उनका अलग-अलग जवाब, किसी अजनबी के आ जाने से गहरी चु्प्पी छा जाती।
हर आने-जाने वाला शख्स शक की नजरों से देखा जा रहा था, ना जाने सादे लिबास में किस एजेंसी का कौन निकल आए, ऐसे में बहस को विराम देते हुए चाय की चुस्की के बीच मो. नसीम बोले, ‘बाबा जउन कहे रहेन ओका पूरा कय रहे हैं...।’ पास बैठे अब्दुल्ला बोले, जो जइसा करी, वइसा भरी...।

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