अशुभ शक्ति पर विजय पाने के बाद विजय उत्सव मनाया जाता है,, बादल मामा,,
योगेस्वरी मां महान साधिका थी : शंकर चंद्र गोप
हाता। हर वर्ष की इस वर्ष भी 29 अक्टूबर को माताजी आश्रम हाता में विजया सम्मेलन सह माताजी आश्रम की संस्थापिका योगेस्वरी मां की 161 वी जयंती भक्ति और श्रद्धा के साथ मना। इस अवसर पर योगेस्वरी मां की बिशेष पूजा की गई।आश्रम के सचिव राजकुमार साहू ने उपस्थित भक्तजनों को स्वागत करते हुए विजयी दशमी की हार्दिक शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर सुनील कुमार दे ने योगेस्वरी मां की महान और अलौकिक जीवनी पर प्रकाश डाला और विजया दशमी की शुभकामनाएं दी। बादल मामा ने विजया मिलन की तात्पर्य पर प्रकाश डाला।शंकर चंद्र गोप ने योगेस्वरी मां की महिमा पर प्रकाश डाला और कहा,,योगेस्वरी मा एक महान साधिका और आध्यात्मिक शक्ति की अधिकारिणी थी।
करुणामण्डल मंडल ने कविता के माध्यम से विजया दशमी की शुभकामनाएं दी। सुजाता मरल ने भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर भक्ति संगीत का कार्य क्रम हुआ। जिसमें सुनील कुमार दे, शंकर चंद्र गोप, कमल कांति घोष, पतित पावन दास, तड़ित मंडल, यमुना मंडल, सहदेव मंडल, देसाई सोरेन आदि ने भाग लिया। इसके अलावे संध्या आरती, रामकृष्ण कथामृत पाठ, हरिनाम संगकीर्तन, हरिलुट हुआ।
अंत में उपस्थित भक्तजनों का मुंह मीठा किया गया। इस अवसर पर नारायण चटर्जी, शक्ति पद रजक, रविंद्र नाथ दास, बलराम गोप, तपन मंडल, रघुनंदन बनर्जी, महितोष मंडल, हेम चंद्र पात्र, लोचना मंडल, झरना साहू, तरुण दे, बन्दना मंडल, कुंती मंडल, अंजली मंडल, रीना मंडल, रीता मंडल, सावित्री गोप, विश्रामित्र खंडायत, हिरन महतो, निवारण मोदी, स्वपन दे, शिशिर कर्जी, आलोक पाल, भवानी घोष, वीरेंद्र कुमार सिंह आदि अनेक भक्त उपस्थित थे।


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