चक्रधरपुर। श्रीमद् भागवत केवल कथा नहीं, मन को सुंदर और शुद्ध बनाने का सशक्त माध्यम है। यह ऐसा दर्पण है, जिसमें हमें अपनी कमियां भी दिखाई दे सकती हैं। हम कितने शुद्ध और निर्मल हैं, इसका आकलन करना है तो भागवत की शरण में जरूर बैठे। उक्त बातें रेल नगरी चक्रधरपुर के राधा गोविंद मंदिर परिसर में आयोजित भागवत कथा सह कीर्तन में मंदिर समिति के अध्यक्ष सह युवा अधिवक्ता आदिकांत सारंगी ने कहा। उन्होंने कहा कि भागवत कथा आत्म निरीक्षण करना सिखाती है।
स्वच्छता बाहर की होती है और पवित्रता अंदर की। हम कितने स्वच्छ और कितने पवित्र हैं, इसका अंदाजा हमें भागवत के श्रवण से ही मिलेगा। राम और कृष्ण इस देश के आधार स्तंभ हैं। इनके बिना भारत भूमि की कल्पना करना भी संभव नहीं है। इस दौरान पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा। कथा व कीर्तन से क्षेत्र का माहौल श्रद्धालु जमकर झूमे।
इस अवसर पर पुजारी संजीव रथ के द्वारा विधिवत मंत्र उच्चारण के बीच भगवान राधा कृष्ण की पूजा अर्चना की गई। इसके बाद उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में मंदिर समिति के अचिंतो मंडल, सुखेंदु चक्रवर्ती, हेमंत कुमार शर्मा, अनुज प्रधान, शिव मोहंती, अनूप कुमार दास, मिथुन प्रधान, सदानंद होता, अभिषेक खलको, प्रवीर चक्रवर्ती, दीपु मोदक, देवेन मंडल आदि का योगदान रहा। मौके पर काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।

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