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भारत के प्राचीन संस्कृति को प्रोत्साहित करना मेला का मुख्य उद्देश्य : बिशु मुंडा, The main objective of the fair is to promote the ancient culture of India: Bishu Munda


बिशु मुंडा टुसू मेला के संस्कृति संगम में उमड़े 70 हजार से अधिक टुसू एवं संस्कृति प्रेमियों का सैलाब

चांडिल। टुसू मेला या मकर मेला झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओड़िशा एवं असम राज्य के एक लोकप्रिय मेला है। खड़िया कॉलोनी में समाजसेवी बिशु मुंडा उर्फ विश्वनाथ मुंडा द्वारा 21 दिसंबर को आयोजित बिशु मुंडा टुसू मेला में पश्चिम बंगाल ओड़िशा एवं झारखंड से लगभग 70 हजार से अधिक टुसू एवं संस्कृति प्रेमी उपस्थित होकर भव्य टुसू एवं आकर्षक चौड़लों का दर्शन किया। 


मेला का उद्घाटन समिति के संयोजक बिशु मुंडा एवं अतिथि दयाल चंद्र महतो के द्वारा फीता काट कर किया गया। संस्कृति प्रेमियों ने झुमूर सम्राट सह यूट्यूब चैनल के लोकप्रिय कलाकार संतोष महतो के झूमूर गीत, संगीत एवं नृत्य, आदिवासी पांता नाच तथा कोलकाता के सिंह एंड सिंह म्यूजिकल डांस ग्रुप द्वारा प्रस्तुत किया गया। मनमोहक रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आनंद उठाया। इस दौरान महफिल में हिंदी, बंगला, भोजपुरी, संथाली, उड़िया आदि भाषाओं के गीतों में समां बांधा। 


इस अवसर पर मेला समिति के संयोजक बिशु मुंडा उर्फ विश्वनाथ मुंडा ने कहा कि चाहे शहर का मेला हो या गाँव का, यह बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों के लिए एक बहुत ही मनोरंजक गतिविधि प्रदान करता है। एक मनोरंजन केंद्रित कार्यक्रम होने के अलावा, यह उन व्यापारियों के लिए आजीविका का एक स्रोत भी है जो इस पर निर्भर हैं। कई छोटे विक्रेता और फेरीवाले अपने व्यवसाय के लिए मेलों पर निर्भर रहते हैं। मेले परिवार और दोस्तों के साथ गुणवत्तापूर्ण मनोरंजक समय प्रदान करते हैं।  बिशु मुंडा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में मनोरंजन का मेला एक प्रमुख साधन है। 


टुसू एवं चौड़ल प्रेमियों को दो लाख रुपए दिया गया नगद पुरस्कार : मेला में उपस्थित टुसू को प्रथम पुरस्कार 31 हजार रुपए, द्वितीय पुरस्कार 25 हजार रुपए, तृतीय पुरस्कार 15 हजार रुपए, चतुर्थ पुरस्कार 10 हजार रुपए, पंचम पुरस्कार छह हजार रुपए, षष्ठ पुरस्कार नगद चार हजार रुपए पुरस्कार दिया गया। इसके अलावा मेला में उपस्थित 50 से अधिक उपस्थित छोटे टुसू को भी सांत्वना पुरस्कार के रुप में नगद राशि दिया गया। मेला के सफल आयोजन में बासंती प्रसाद सिंह, विश्वधर सिंह मुंडा, मुचीराम गिरी, दीपंकर महतो, तड़ित महतो, डा. स्वपन महतो, सुभाष सिंह, जगन्नाथ महतो, मुकेश पाल, के पी शर्मा आदि का प्रमुख योगदान रहा।

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