Default Image

Months format

Show More Text

Load More

Related Posts Widget

Article Navigation

Contact Us Form

Terhubung

NewsLite - Magazine & News Blogger Template
NewsLite - Magazine & News Blogger Template

Bhopal शिव की शक्ति और भक्तों के प्रति करुणा का प्रतीक है भगवान भीमशंकर Lord Bhimshankar is a symbol of Shiva's power and compassion towards his devotees

 


Upgrade Jharkhand News. देवाधिदेव महादेव के भीमशंकर ज्योतिर्लिंग को बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। यह ज्योतिर्लिंग भगवान शिव की शक्ति और उनके भक्तों के प्रति उनकी करुणा का प्रतीक है। यह ज्योतिर्लिंग इस बात का प्रतीक है कि सच्चे भक्तों की रक्षा के लिए भगवान शिव सदैव तत्पर रहते हैं। पुराणों,जनश्रुतियों,किंवदंतियों एवं विभिन्न विद्वानों के अनुसार तीन स्थानों पर भीमशंकर ज्योतिर्लिंग के बारे में मान्यता  है। महाराष्ट्र में पुणे के नजदीक सह्याद्रि पर्वत पर, उत्तराखंड के नैनीताल के उज्जनक नामक स्थान पर एवं असम (पूर्व में इसे कामरूप भी कहा जाता था) के कामरूप जिले में गौहाटी के समीप ब्रह्मपुर की पहाड़ी पर देवाधिदेव महादेव  के भीमशंकर ज्योतिर्लिंग के रुप में प्रतिष्ठित होने की मान्यता हैं।


कुंभकर्ण से भीमशंकर का संबंध-रावण के भाई कुंभकर्ण का पुत्र भीमा नामक राक्षस था । श्री शिवमहापुराण की कोटि रुद्र संहिता के अनुसार कुंभकर्ण ने सह्य नामक निर्जन पर्वत पर कर्कटी नामक राक्षसी के साथ व्यभिचार किया जिसके परिणामस्वरूप उसे  एक पुत्र  हुआ। जिसका जन्म कुम्भकर्ण की मृत्यु के तुरंत बाद ही  हुआ था। भीमा को जब पता चला कि भगवान् राम ने उसके पिता का वध किया था, तो अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए, भीमा ने कठोर तपस्या शुरू की और एक हजार वर्षों की तपस्या के वरदान स्वरूप उसने ब्रह्मा जी से अपार शक्तियां प्राप्त की। ब्रह्मा के वरदान से वह अजेय हो गया और देवताओं को कष्ट देने लगा। भीमा ने अपनी शक्ति के अहंकार में पृथ्वी के निवासियों पर अत्याचार करना शुरू कर दिया। उसने कई ऋषियों और साधु-संतों को परेशान किया। उसने यहां के शिवभक्त राजा कामरुपेश्वर को भयंकर कष्ट दिए और स्वयं को राजा घोषित कर दिया। उसके भय से देवता भगवान शिव की शरण में गए और उनसे प्रार्थना की कि वे इस संकट को समाप्त करें। 



इसी बीच भीमा ने एक स्थान पर जहां भक्त शिव की उपासना कर रहे थे, बहुत उत्पात मचाया, उसने भक्तों को शिव जी की पूजा करने से मना किया और स्वयं को पूज्य घोषित कर दिया। भक्तों ने जब उसकी बात मानने से इनकार कर दिया, तब क्रोधित होकर भीमा उन सबका नाश करने लगा। भगवान शिव ने जब भक्तों की पुकार सुनी, तो वे वहां प्रकट हुए। शिव और भीमा के बीच भयंकर युद्ध हुआ। यह युद्ध कई दिनों तक चला। फिर देवताओं की प्रार्थना पर  भगवान शिव ने भीमा का वध किया। भक्तों के अनुरोध पर  शिव जी ने उसी स्थान पर ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट होकर अपने भक्तों को आशीर्वाद दिया। यही स्थान भीमशंकर ज्योतिर्लिंग के नाम से प्रसिद्ध हुआ।


महाराष्ट्र के भीमशंकर- जनश्रुतियों के अनुसार  पूना के नजदीक भीमा नदी के उद्गम स्थल पर भगवान् शंकर ने त्रिपुरासुर का वध करने के बाद  विश्राम किया था। उस समय 'भीमक' नामक एक सूर्यवंशीय राजा यहाँ तपस्या करता था। राजा की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान् शिव ने उसे दर्शन दिए और उसकी प्रार्थना पर वे यहाँ दिव्य ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान होकर भीमशंकर के नाम से प्रसिद्ध हो गये। मराठी शिवलीलामृत, गुरुचरित्र, स्त्रोतरत्नाकर आदि ग्रन्थों में इस ज्योतिर्लिंग की महिमा का गान किया गया है। गंगाधर, रामदास, श्रीधरस्वामी, ज्ञानेश्वर आदि संत महात्माओं ने इस ज्योतिर्लिंग की महिमा का वर्णन किया है।  इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से सभी पापों का नाश होता है और भक्तों को भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। यह मंदिर नागर शैली में बनाया गया है, जो आमतौर पर उत्तरी भारत में पाई जाती है। मंदिर के स्तंभों और चौखटों पर देवी-देवताओं और मानव आकृतियों की नक्काशी की गई है। 18वीं शताब्दी में नाना फड़नवीस ने सभामंडप का निर्माण कराया था और शिखर का डिज़ाइन भी बनवाया था।

         

असम के भीमशंकर- श्री शिव महापुराण की कोटि रुद्र संहिता में भीमशंकर ज्योतिर्लिंग के वर्णन में कामरूप देश का उल्लेख आता है। प्राचीनकाल में असम को ही कामरूप कहा जाता था, इसलिए असम में गौहाटी के नजदीक कामरूप जिले में भी भगवान भीमशंकर ज्योतिर्लिंग बताया जाता है।


उत्तराखंड के भीमशंकर-नैनीताल के पास उज्जनक में स्थित भीमशंकर मंदिर को मोटेश्वर महादेव मंदिर के नाम से भी जाना है। इसे 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, यह वही स्थान है जहां महाभारत काल में गुरु द्रोणाचार्य ने पांडवों और कौरवों को शिक्षा दी थी।


भीम का शिवलिंग-भीम ने गुरु द्रोणाचार्य के आदेश पर यहां एक शिवलिंग की स्थापना की थी, जिसे भीमशंकर ज्योतिर्लिंग के रूप में जाना जाता है। श्री शिवमहापुराण के अनुसार, भीमशंकर ज्योतिर्लिंग के दर्शन एवं पूजन करने से शिवभक्त अपने समस्त बुरे कर्मों से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करता है। यहां सदैव शिव पार्वती का वास होता है। अंजनी सक्सेना



No comments:

Post a Comment

GET THE FASTEST NEWS AROUND YOU

-ADVERTISEMENT-

NewsLite - Magazine & News Blogger Template NewsLite - Magazine & News Blogger Template NewsLite - Magazine & News Blogger Template NewsLite - Magazine & News Blogger Template