- बिष्टुपुर सत्यनारायण मारवाड़ी मंदिर में हवन यज्ञ में पूर्णाहुति के साथ हुआ भगवत कथा का विश्राम
Jamshedpur (Nagendra) । बिष्टुपुर सत्यनारायण मारवाड़ी मंदिर में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा का विश्राम मंगलवार की सुबह हवन यज्ञ में पूर्णाहुति के साथ हुआ। आचार्य द्धारा वेद मंत्रोच्चारण के मध्य हवन यज्ञ में सभी यजमानों ने पूर्णाहुति (अंतिम आहुति) दी। यज्ञ में आहुति देकर क्षेत्र की खुशहाली और विश्व में सभी के स्वस्थ रहने की कामना की गयी। हवन यज्ञ एवं भागवत भगवान की आरती के बाद सैकड़ों की संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। श्री श्याम भटली परिवार जमशेदपुर एवं भयली महिला मंडल सोनारी द्धारा आयोजित हुए इस भागवत कथा के अंतिम दिन मंगलवार को व्यासपीठ से भागवत भ्रमर आचार्य श्री मयंक जी महाराज ने कहा कि संसार सागर में भक्ति एक नौका की तरह है। नौका के बिना भव सागर से पार नहीं उतरा जा सकता है। उसी तरह भक्ति के बिना मनुष्य जीवन पटरी पर नहीं चल सकता है। ईश्वर भक्ति का मार्ग अपना कर मनुष्य को मोक्ष का मार्ग पर चलना चाहिए, क्योंकि कलियुग में जीवन के सभी पापों से मुक्ति का एक मात्र आधार भगवान की भक्ति ही है।
भगवान का नाम स्मरण करने से ही भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। भगवान नाम में भारी शक्ति है। वर्तमान में किए जाने वाला पुरूषार्थ ही हमारे अगले जीवन के अच्छे भाग्य का निर्माण करते हैं। इस सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा को सफल बनाने में गगन रुस्तगी, ललित डांगा, महावीर अग्रवाल, प्रवीण भालोटिया, मनीष सिंघानिया, बंटी चांगिल, अनिल चौधरी, कविता अग्रवाल, मंजू अग्रवाल, पायल रुस्तगी, उमा डांगा, मेघा सिंघानिया, नेहा भालोटिया, सुमन अग्रवाल, कंचन अग्रवाल, चंदा अग्रवाल, अनिता अग्रवाल, सुनिता अग्रवाल, रज्जो अग्रवाल, पिंकी अग्रवाल, कविता अग्रवाल सहित बिष्टुपुर सत्यनारायण मारवाड़ी मंदिर कमिटी का सराहनीय योगदान रहा।
कैसर पीड़ित से बचाव के लिए महाराज ने बताये उपायः- वृंदावन से आए मयंक महाराज ने कैंसर से बचाव और उपचार हेतु प्राकृतिक और सात्विक दिन चर्या के लिए सुझाए गए कई उपाय इस प्र्रकार हैंः- 1. तुलसी जल का सेवन- सुबह का पहला कार्य, रात में 20 तुलसी के पत्ते पानी में भिगोकर रखें। सुबह खालीपेट इस पानी का सेवन करें। इससे शरीर में मौजूद विषैले तत्वों का नाश होगा। रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। कैंसर, टीबी, और उम्र जनित रोगों से रक्षा होती है। त्याज्य (न खाने योग्य) अम्लीय (एसिडिक) खाद्य पदार्थः- इनका सेवन करने से शरीर में एसिडिटी, टॉक्सिन्स और बीमारियों का खतरा बढ़ता है- 1. पकाया हुआ दूध, 2. ठंडी या बासी चीजें (चावल, दाल, सब्जी) 3. पूरी, पराठा, पकौड़ी, 4. मिठाइयाँ (रसगुल्ला, बर्फी), 5. जंक फूड (पिज्जा, बर्गर, समोसा आदि), 6. कोल्ड कॉफी, आइसक्रीम, फ्रूट शेक। सात्विक और क्षारीय भोजन (अनुशंसित आहार)ः- 1. गाय का कच्चा दूध, 2. नींबू पानी (बिना नमक और चीनी के), 3. छाछ (मट्ठा), 4. जौ का दलिया व सत्तू, 5. सब्जियों का सलाद, ताजी पालक, 6. अंकुरित अनाज, मिक्स दलिया, गरम रोटी, 7. हरी सब्जियों का रस, फलों का रस, 8. भूना हुआ पोहा, खीर, पंचामृत। इन उपायों से शरीर स्वस्थ रहता है, कैंसर जैसे रोगों से सुरक्षा मिलती है और जीवन शैली संतुलित बनती है। कथा के सातों दिन कैसर पीड़ित से बचाव के लिए महाराज द्धारा बताये गये घरेलु उपाय का पंपलेट भक्तों के बीच बांटा गया।
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