Upgrade Jharkhand News. आदित्यपुर -आकाशवाणी चौक के पास वर्ष 2003 में तत्कालीन आयडा (अब ज़ियाड़ा) एमडी वंदना ड़ाडेल के प्रयास से बने आयडा पार्क री- डेवलपमेंट के साथ भविष्य को देखते हुए खस्ताहाल हुए पार्क के स्थान पर मॉडर्न पार्क निर्माण की मांग आदित्यपुर नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष पुरेंद्र नारायण सिंह ने की है। उन्होंने ज़ियाड़ा के क्षेत्रीय निदेशक प्रेम रंजन से खस्ताहाल पार्क के री-डेवलपमेंट के मांग की हैं। इसे लेकर पुरेन्द्र नारायण सिंह ने बुधवार को आदित्यपुर- गम्हरिया विकास समिति के तत्वावधान में सदस्यों के साथ आकाशवाणी चौक स्थित खस्ता हाल पार्क का भ्रमण एवं निरीक्षण किया। इस मौके पर पुरेन्द्र नारायण सिंह ने कहा कि आदिवासी अस्मिता के रक्षक, जल, जंगल, जमीन की लड़ाई लड़ने वाले दिवंगत दिशोम गुरु शिबु सोरेन के नाम यह पार्क समर्पित हो, जहाँ शिबु सोरेन जी की आदमकद भव्य प्रतिमा भी स्थापित हो। उन्होंने कहा कि दिवंगत शिबू सोरेन को समर्पित यह पार्क कोल्हान प्रमंडल के सबसे बड़े और आधुनिक पार्क में शामिल हो ,जहां गुरुजी के जीवनी को भी आदिवासी कलाकृतियों के माध्यम से बखूबी दर्शाया जाए। पुरेंद्र नारायण सिंह ने एक बार फिर अपनी मांग को दोहराते हुए दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की भी मांग की।
ज़ियाड़ा री-डेवलप करें पार्क, सहयोग से स्थापित करेंगे शिबू सोरेन की प्रतिमा
पुरेन्द्र नारायण सिंह ने बताया कि ज़ियाड़ा द्वारा मॉडर्न पार्क रीडिवेलपमेंट किया जाता है तो दिवंगत दिशोम गुरु जी की भव्य प्रतिमा को वे आपसी सहयोग कर स्थापित करेंगे। उन्होंने कहा कि ज़ियाड़ा के साथ आदित्यपुर नगर निगम भी पार्क री-डेवलपमेंट योजना पर कार्य कर सकता है। उन्होंने तत्काल आदित्यपुर नगर निगम से मांग की है कि बदहाल पार्क की साफ सफाई कार्य को शुरू किया जाए।
आदित्यपुर के हृदयस्थल पर मॉडर्न पार्क बनने से विकास को मिलेगी गति
पुरेन्द्र नारायण ने कहा कि आदित्यपुर के हृदय स्थल आकाशवाणी चौक पर मॉडर्न पार्क का निर्माण होता है तो यह विकास को नया आयाम देगा। उन्होंने बताया कि आदित्यपुर आने-जाने वाले लोगों को यह पॉर्क आकर्षित करेगा। कोल्हान के लिए यह एक नायाब तोहफा होगा, जो पूरे झारखंड समेत आसपास क्षेत्र के सैलानियों को भी आकर्षित करेगा। निश्चित तौर पर ऐसा होता है तो पर्यटन के क्षेत्र के लिए भी यह प्रयास मील का पत्थर साबित होगा।
मॉडर्न पार्क में मिले झारखंडी कला ,संस्कृति, सभ्यता की झलक
पुरेन्द्र नारायण सिंह ने बताया कि वर्ष 2003 में बने इस पार्क में आदिवासी कला, संस्कृति ,सभ्यता को ध्यान में रखते हुए पार्क का निर्माण किया गया था। जहां आदिवासी रीति रिवाज को मूर्तियों के माध्यम से दर्शाया गया है, आज स्थिति यह है कि पार्क का नामोनिशान मिट चुका है, जबकि केवल मूर्तियां ही अपने स्थान पर है। पुरेंद्र ने कहा कि तत्कालीन आयडा एमडी के प्रयास से पार्क में फाउंटेन ,बेंच लाइट आदि की भी व्यवस्था की गई थी। लेकिन रखरखाव के अभाव में पार्क बदहाल हो चुका है।
उन्होनें मांग की है कि मॉडर्न पार्क में एक बार फिर झारखंडी कला, संस्कृति, रीति- रिवाज को उकेरा जाए जिससे झारखंडी परंपरा से पार्क में आने वाले लोग रूबरू हो सके। निरीक्षण के दौरान पुरेन्द्र नारायण सिंह के अलावा अरविंद तिवारी, शिक्षाविद एसडी प्रसाद, यदुनंदन राम ,देवप्रकाश, नागेंद्र रजक, विमल दास, संतोष यादव, भोला रवानी आदि मौजूद रहे।

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