Guwa (Sandeep Gupta) जैसे ही आसमान में रमजान का चांद नजर आया, किरीबुरू, गुवा, बड़ाजामदा, नोवामुंडी, जगन्नाथपुर और जैतगढ़ की मस्जिदों से अल्लाहु अकबर और रमजान मुबारक की सदाएं गूंज उठीं। पूरे मुस्लिम समाज में खुशी और इबादत का माहौल बन गया। लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद दी। घरों में सेहरी और इफ्तार की तैयारियां शुरू हो गईं, वहीं बाजारों में खजूर, सेवइयां, फल और अन्य जरूरी सामानों की खरीदारी से रौनक बढ़ गई। रमजान केवल एक धार्मिक महीना नहीं, बल्कि आत्मसंयम, त्याग, सब्र और इंसानियत को मजबूत करने का अवसर है। इस महीने में रोजेदार दिनभर रोजा रखकर अल्लाह की इबादत करते हैं और बुराइयों से दूर रहने का संकल्प लेते हैं।
यह महीना समाज को यह संदेश देता है कि असली अमीरी धन-दौलत में नहीं, बल्कि दिल की पाकीज़गी और जरूरतमंदों की मदद करने में है। जकात और फितरा के माध्यम से गरीबों की सहायता की जाती है, जिससे समाज में भाईचारा और समानता की भावना मजबूत होती है। रमजान इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इसी महीने में पवित्र कुरान शरीफ का अवतरण हुआ था। इस्लामी मान्यता के अनुसार पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब को पहली बार अल्लाह का संदेश शब-ए-क़द्र की रात प्राप्त हुआ था। यही कारण है कि रमजान को कुरान का महीना भी कहा जाता है। इतिहास गवाह है कि यह महीना इबादत के साथ-साथ संघर्ष, सत्य और नैतिकता की मिसाल भी रहा है।



































No comments:
Post a Comment