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Jamshedpur सत्य का संग ही सतसंग हैं:- साध्वी अमृता भारती The company of truth is Satsang: Sadhvi Amrita Bharti.

 


Jamshedpur (Nagendra) पुनपुन नदी के तट पर किंजर ग्राम में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के तत्वाधान में आयोजित श्री रामचरितमानस एवं गीता ज्ञान यज्ञ में संस्थान के संस्थापक व संचालक सर्व श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्या साध्वी अमृता भारती जी सत्संग की महिमा बताए। उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि हमारे शास्त्र ग्रंथ समझाते हैं कि हरि अनंत हरि कथा अनंता गावहि सुनहि बहु बिधि सब सांता । हरी अनंत है उनकी कथाएं भी अनंत है। अनन्त हरि की कथा को सब अपने अपने ढंग से कहते है ,परंतु जिस कथा से या यूँ कहे सत्संग से मानव के जीवन की व्यथा समाप्त हो जाये वास्तविक में वही कथा है। भागवत में कथा है कि राजा परिक्षित को श्राप मिलता है कि सांतवें दिन तक्षक के डसने से तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी। कथा कहती है कि राजा परीक्षित को जब सुखदेव मुनि ने कथा सुनाई तो जीवन की व्यथा समाप्त हो गयी । कौन सी  व्यथा समाप्त हुई ? संत समझाते है कि मानव की एक ही व्यथा है बार -बार गर्भ में पलना और बार - बार चिता की अग्नि में जलना। इस व्यथा का अंत सत्संग ही कर सकती है इसलिए तुलसी बाबा कहते है  सत्संगति संसृति कर अन्ता। सत्संग का फल ऐसा है कि यहां कौआ भी कोयल और बगुला हंस बन जाता है। 


तभी तो अंगुलिमाल डाकू सत्संग के प्रभाव से अहिंसक बन गए। ऐसा नहीं है कि ये सारी बातें ग्रंथों में लिखी है। ऐसा आज भी होता है गुरुदेव सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा से आज भी ऐसे अनेकों दुर्दांत अपराधी इस सत्संग को प्राप्त कर संतत्व का जीवन जी रहे है । प्रश्न है सत्संग क्या है ? उन्होंने कहा कि सत्संग कथाओं को सुनना नही है वरन सत्संग को सत्य का संग है अर्थात ईश्वर का साक्षात्कार करना है। जब जीवन मे पूर्ण गुरु आता है तब ही ईश्वर का साक्षात्कार हो पाता है। इसलिय आवश्यकता है हमें भी सुखदेव मुनि जैसे गुरु मिल जाये दिव्य गुरुदेव आशुतोष महाराज जी के शिष्य स्वामी धनंजयानंद जी ने कहा कि जब तक मानव अपने वास्तविक स्वरुप को नहीं पहचान लेता तब तक उसके जीवन मे शांति सकून नहीं आ सकती । हम सब लोग भौतिक संसाधनों के द्वारा सुख को प्राप्त करना चाहते है परन्तु प्रत्येक व्यक्ति का व्यक्तिगत अनुभव है की वास्तविक सुख भौतिक संसाधनों में नहीं है। हम सुख बाहर ढूंढ़ते है जबकि शांति तो हमारे अंदर ही है पर अंदर जाये कैसे। सत्संग ही वह स्थल है जहाँ हम अपने वास्तविक स्वरुप को जान पाते है और अंदर शांति को प्राप्त कर पाते है। कथा में क्षेत्र के सैकड़ों भक्त आनंद उठा रहें हैं। 


रामकथा सह गीता ज्ञान कार्यक्रम  विधिपूर्वक आरती पूजन सहित सम्पन्न हुआ जिसमें आध्यात्मिक ज्ञान का गंगा में श्रोताओं ने डुबकी लगाई, भजन और आध्यात्मिक ज्ञान के कार्यक्रम में शामिल होकर स्वयं को गौरवान्वित महसूस किया और इसे भगवान का महिमा समझा, संपूर्ण आयोजन के मुख्य कर्ता भाई अरुण जी द्वीप प्रज्वलन में अनिल सिंह तथा आरती पूजन में श्री सिंह जी के जीवन साथी (पत्नी) को शामिल होने का सुअवसर प्रदान कर हमें अनुग्रहित किया। इसके लिए उनको हृदय के अंतः करण से धन्यवाद और आभार प्रकट करते हैं।



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