Default Image

Months format

Show More Text

Load More

Related Posts Widget

Article Navigation

Contact Us Form

Terhubung

NewsLite - Magazine & News Blogger Template
NewsLite - Magazine & News Blogger Template

Bhopal ग्राम सभा से सुशासन तक,समृद्ध बिहार की नयी विकास गाथा From Gram Sabha to Good Governance, a New Development Story of Prosperous Bihar

 


Upgrade Jharkhand News.  ग्रामीण भारत की आत्मा उसके गांवों और पंचायतों में बसती है। लोकतंत्र की सबसे सशक्त इकाई ग्राम सभा मानी जाती है, जहां आम नागरिक सीधे विकास की प्रक्रिया का हिस्सा बनता है। यदि गांव सशक्त होंगे तो राज्य मजबूत होगा और राज्य मजबूत होगा तो देश भी आत्मनिर्भर बनेगा। इसी सोच को आधार बनाकर बिहार सरकार ने प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को पंचायत विकास दिवस मनाने का निर्णय लिया है। इस पहल का उद्देश्य ग्राम सभाओं को अधिक सक्रिय, जवाबदेह और सहभागी बनाते हुए ग्रामीण विकास को जनआंदोलन का स्वरूप देना है। इसी क्रम में पंचायत विकास दिवस के अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मुंगेर जिले के टेटिया बंबर पंचायत पहुंचे। यहां उन्होंने ग्रामीण विकास, पंचायती राज व्यवस्था और आत्मनिर्भर बिहार की परिकल्पना को विस्तार से रखा। कार्यक्रम में जमुई के सांसद अरुण भारती, जिला प्रभारी मंत्री संजय कुमार सिंह, बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, पुलिस महानिदेशक विनय कुमार, पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार, पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल, प्रमंडलीय आयुक्त प्रेम सिंह मीणा, पुलिस उप महानिरीक्षक राकेश कुमार, जिलाधिकारी निखिल धनराज निप्पाणीकर, पुलिस अधीक्षक सैयद इमरान मसूद सहित अनेक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और हजारों ग्रामीण उपस्थित थे। जीविका समूह की प्रतिनिधि धर्मशिला देवी की उपस्थिति ने महिला सहभागिता को भी रेखांकित किया।


मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का सपना तभी साकार होगा, जब बिहार समृद्ध होगा और बिहार तभी समृद्ध होगा, जब उसके गांव आत्मनिर्भर बनेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ग्रामीण विकास को केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि जनभागीदारी के माध्यम से इसे सामाजिक आंदोलन का रूप देना चाहती है। उन्होंने घोषणा की कि अब प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को ग्राम सभा की अनिवार्य बैठक होगी। इन बैठकों में स्वास्थ्य, गरीबी उन्मूलन, जल संरक्षण, स्वच्छता, सामाजिक सुरक्षा, हरित विकास, शिक्षा और पंचायत की विकास योजनाओं की समीक्षा की जाएगी। पंचायतों के वित्तीय लेन-देन और योजनाओं की जानकारी सार्वजनिक रूप से ग्राम सभा में रखी जाएगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक न्याय का वास्तविक अर्थ केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी देना है। पंचायत विकास दिवस इसी लोकतांत्रिक भावना को मजबूत करेगा। गांव के लोग स्वयं अपनी आवश्यकताओं को चिन्हित करेंगे, प्राथमिकताएं तय करेंगे और विकास कार्यों की निगरानी भी करेंगे। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में जनता की सीधी भागीदारी बढ़ेगी।


जनसमस्याओं के त्वरित समाधान के लिए राज्य सरकार ने प्रत्येक माह के पहले और तीसरे मंगलवार को सहयोग शिविर आयोजित करने की व्यवस्था की है। इन शिविरों में प्राप्त आवेदनों का निस्तारण अधिकतम तीस दिनों के भीतर करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे और प्रशासन की जवाबदेही बढ़ेगी। मुख्यमंत्री ने डिजिटल प्रशासन पर विशेष बल देते हुए कहा कि पंचायतों में किए गए सभी विकास कार्यों का विवरण 48 घंटे के भीतर ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य किया गया है। इससे योजनाओं की निगरानी आसान होगी और अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।      उन्होंने बताया कि पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत बनाने के लिए राज्य को वित्त आयोग के माध्यम से लगभग दस हजार करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं तथा आगामी वित्त आयोग से भी पर्याप्त वित्तीय सहायता मिलने की संभावना है। इन संसाधनों का उपयोग सड़क, पेयजल, नाली, स्वच्छता और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास में किया जाएगा।


शिक्षा को ग्रामीण विकास की सबसे मजबूत नींव बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक प्रखंड में मॉडल विद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। उनका उद्देश्य सरकारी विद्यालयों में ऐसी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है कि अभिभावकों का भरोसा पुनः सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर कायम हो। साथ ही पूरे राज्य में 213 डिग्री कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं, ताकि प्रत्येक प्रखंड में उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध हो सके। टेटिया बंबर क्षेत्र में दो डिग्री कॉलेज स्थापित करने की घोषणा भी की गई। इसके अतिरिक्त मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट की तैयारी भी प्रखंड स्तर पर उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे ग्रामीण विद्यार्थियों को बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़े।    ऊर्जा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार सरकार बिजली पर प्रतिवर्ष लगभग 23 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी दे रही है। अब सरकार का लक्ष्य प्रत्येक घर को सौर ऊर्जा से जोड़ना है, जिससे ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़े और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिले।  महिला सशक्तिकरण पर विशेष जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के अंतर्गत महिलाओं को स्वरोजगार के लिए सीधे उनके बैंक खातों में दस हजार रुपये की पहली किस्त दी जा रही है। जो महिलाएं सफलतापूर्वक अपना व्यवसाय चला रही हैं, उन्हें आगे की किस्तों में बीस हजार रुपये तक की अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने जीविका समूहों से अधिकाधिक महिलाओं को इस योजना से जोड़ने का आह्वान किया।


ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए पशुपालन को भी प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पशुपालकों को गाय उपलब्ध कराने और उनसे उत्पादित दूध की खरीद सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य कर रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और किसानों की आय में वृद्धि होगी।          मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था के प्रश्न पर भी स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बिहार में अपराध और अपराधियों के लिए कोई स्थान नहीं है। अपराध के विरुद्ध सरकार की कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी और कानून का शासन हर हाल में कायम रखा जाएगा। उन्होंने मुंगेर और आसपास के क्षेत्रों के विकास की चर्चा करते हुए कहा कि हनुमाना डैम तक गंगा का पानी पहुंचाए जाने से बांका क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था को नई मजबूती मिली है। इसके अलावा मुंगेर में सिंधवारिणी जलाशय देवघरा इको टूरिज्म परियोजना के विकास की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है। क्षेत्र के अन्य लंबित जलाशय परियोजनाओं को भी शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।


पंचायत विकास दिवस केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोकतंत्र को गांव की चौपाल तक पहुंचाने का सशक्त प्रयास है। ग्राम सभा लोकतंत्र की वह इकाई है, जहां आम नागरिक विकास का दर्शक नहीं, बल्कि सहभागी बनता है। जब ग्राम सभा मजबूत होगी, तब योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होगा, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और विकास की दिशा स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप तय होगी। आज विकसित भारत की परिकल्पना तभी साकार हो सकती है, जब गांव विकास की मुख्यधारा में हों। पंचायतों को सशक्त बनाकर बिहार सरकार ग्रामीण विकास का ऐसा मॉडल विकसित करने का प्रयास कर रही है, जिसमें जनभागीदारी, पारदर्शिता, सामाजिक न्याय और जवाबदेही समान रूप से शामिल हों। यदि पंचायत विकास दिवस की भावना को व्यवहार में पूरी गंभीरता से लागू किया गया, तो यह पहल केवल प्रशासनिक सुधार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि गांवों को आत्मनिर्भर, समृद्ध और लोकतांत्रिक रूप से अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगी। यही समृद्ध बिहार और विकसित भारत की सबसे मजबूत आधारशिला है। कुमार कृष्णन



No comments:

Post a Comment

GET THE FASTEST NEWS AROUND YOU

-ADVERTISEMENT-

.