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Jamshedpur डालसा आयोजित किया वर्कशॉप फॉर स्टेक होल्डर्स ऑफ परमानेंट लोक अदालत पर जागरूकता कार्यक्रम DLSA organised workshop for stakeholders of Permanent Lok Adalat and awareness programme

 


Jamshedpur (Nagendra) नालसा एवं झालसा के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार जमशेदपुर के अध्यक्ष सह प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार पांडेय के मार्गदर्शन में वर्कशॉप फॉर स्टेक होल्डर्स ऑफ परमानेंट लोक अदालत पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि न्यायाधीश  आनंदमणि त्रिपाठी, एडीजे 2 एवं विशिष्ठ अतिथियों में डालसा सचिव कुमार सौरभ त्रिपाठी, मध्यस्थ अधिवक्ता के के सिन्हा, स्थायी लोक अदालत के सदस्य गौतम घोष , नन्द जी सिंह , लीगल एड डिफेंस कौंसिल के चीफ विदेश सिन्हा एवं एलडीएम संजीव कुमार चौधरी मंच पर उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम व्यवहार न्यायालय के लोक अदालत हॉल में 30 जून 2026 को सफलता पूर्वक संपन्न किया गया।


कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर एवं नालसा सॉन्ग के माध्यम से किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित न्यायायिक पदाधिकारियों ने स्थाई लोक अदालत के बारे में विस्तार से जानकारी दिया। इस दौरान बताया गया कि परमानेंट लोक अदालत एक विशेष और स्थायी वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र है। इसका मुख्य उद्देश्य आम जनता को ‘जनोपयोगी सेवाओं’ से जुड़े विवादों का बिना किसी विलंब और खर्च के त्वरित और सस्ता समाधान प्रदान करना है। इसका गठन 'विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987' के अंतर्गत किया जाता है और सदस्य टीम में एक अध्यक्ष (जो सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी होते हैं) और कानून या सार्वजनिक सेवाओं में अनुभवी दो अन्य सदस्य शामिल होते हैं। 


सुलह और निर्णय : स्थायी लोक अदालत में सबसे पहले दोनों पक्षों में आपसी सुलह और समझौते से विवाद निपटाने का प्रयास करती है। यदि समझौता नहीं हो पाता है, तो इसे मामले के गुण-दोष के आधार पर अंतिम फैसला सुनाने का पूरा अधिकार होता है। कोई कोर्ट फीस नहीं : इसमें शिकायत दर्ज कराने के लिए कोई भी अदालती शुल्क (कोर्ट फीस) नहीं देना पड़ता है। इसमें किन किन मामलों की सुनवाई होती है ? इसके बारे में बताया गया कि यह अदालतें मुख्य रूप से 'जनोपयोगी सेवाओं' से जुड़े विवादों का निपटारा करती हैं । जैसे: बिजली, पानी और गैस की आपूर्ति ,बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं ,बीमा सेवाएं ,अस्पताल या चिकित्सा सेवाएं ,डाक, तार, या टेलीफोन/मोबाइल सेवाएं ,सार्वजनिक सफाई और स्वच्छता व्यवस्था में स्थायी लोक अदालत का निर्णय (Award) अंतिम होता है और यह सभी पक्षों पर पूरी तरह से बाध्यकारी होता है । इस निर्णय के खिलाफ किसी भी नियमित अदालत में अपील नहीं की जा सकती है । स्थायी लोक अदालत में शिकायत दर्ज करने या जानकारी प्राप्त करने के लिए कोई भी व्यक्ति अपने राज्य के ⁠राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, सहायता के लिए राष्ट्रीय कानूनी सेवा हेल्पलाइन नंबर 15100 पर भी संपर्क किया जा सकता है।


 लोक अदालत और स्थायी लोक अदालत में अंतर : दोनों ही अदालत भारत में बिना किसी कोर्ट-फीस के मामलों का त्वरित और आपसी सुलह से निपटारा करने के वैकल्पिक तंत्र हैं, लेकिन इनमें गठन और अधिकार क्षेत्र को लेकर कुछ महत्वपूर्ण अंतर होते हैं । मुख्य अंतर लोक अदालत एवं स्थायी लोक अदालत में यह है कि लोक अदालत का गठन विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम  की धारा 19 के तहत समय-समय पर जैसे मासिक लोक अदालत एवं तीन महीना पर राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित की जाती है । परन्तु केस की अधिकता होने के कारण इसी अधिनियम की धारा 22-बी के तहत एक स्थायी निकाय (Permanent Body) के रूप में गठित होती है जो स्थायी लोक अदालत के रूप में काम करती है । लोक अदालत का कार्यकाल केवल विशेष तिथियों या आयोजनों पर ही काम करती है, जबकि स्थायी लोक अदालत नियमित एवं स्थायी रूप से रोज़ाना कार्य करती है।

 

अधिकार क्षेत्र (Cases Handled) :  न्यायालय में लंबित मामले या मुकदमेबाज़ी से पहले के सभी प्रकार के विवाद मुख्य रूप से सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं (बिजली, पानी, परिवहन, बीमा, बैंकिंग आदि) से जुड़े विवाद , वित्तीय सीमा मामलों की लोक अदालत में कोई निश्चित वित्तीय सीमा नहीं होती है । वहीं स्थायी लोक अदालत में वर्तमान में  ₹१ / एक करोड़ तक के मूल्यांकन वाले विवाद ही आते हैं । लोक अदालत में फैसला पूरी तरह से आपसी सहमति/समझौते पर आधारित है। यदि समझौता नहीं हुआ, तो मामला नियमित कोर्ट में भेज दिया जाता है । जबकि स्थायी लोक अदालत में यदि दोनों पक्षों में समझौता नहीं हो पाता है, तो यह अदालत स्वयं तथ्यों के आधार पर अंतिम निर्णय सुना सकती है ।अपील (Appeal) :  इसके फैसले (अवॉर्ड) के खिलाफ कहीं भी अपील नहीं की जा सकती क्योंकि यह दोनों पक्षों की आपसी सहमति से बनता है । इसके द्वारा दिए गए गुण-दोष के आधार पर निर्णय अंतिम और सभी पक्षों पर बाध्यकारी होते हैं।


लोक अदालत एक अनौपचारिक मंच है जहाँ लंबित मामलों या मुकदमे से पूर्व के विवादों को आपसी सुलह-समझौते के माध्यम से निपटाया जाता है । यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है, तभी फैसला होता है, अन्यथा मामला वापस नियमित अदालत में स्थानांतरित कर दिया जाता है। वहीं स्थायी लोक अदालत एक स्थायी निकाय है, जिसकी अध्यक्षता एक न्यायिक अधिकारी (जिला न्यायाधीश स्तर) करते हैं। यह अनिवार्य रूप से परिवहन, डाक, टेलीग्राफ, बिजली, पानी, बैंकिंग और बीमा जैसी जन-उपयोगी सेवाओं से जुड़े मामलों को देखती है। सबसे खास बात यह है कि यदि दोनों पक्षों में सुलह नहीं होती, तब भी यह अदालत कानून के दायरे में रहकर मामले का अंतिम फैसला सुना सकती है, जिसे मानने के लिए दोनों पक्ष बाध्य होते हैं। कोई भी व्यक्ति अपने जिले की जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में संपर्क करके दोनों में से किसी भी माध्यम का लाभ उठा सकते हैं । कार्यक्रम में संबंधित विभाग के प्रतिनिधि, लीगल एड डिफेंस कौंसिल के सदस्य , मध्यस्थ अधिवक्ता , पैनल लॉयर्स, पीएलवी आदि शामिल थे।



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