Jamshedpur (Nagendra) राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जमशेदपुर में “एनआईआरएफ/क्यूएस क्रम निर्धारण एवं एनआईटी जमशेदपुर की वैश्विक उत्कृष्टता की दिशा” विषय पर 06/07/2026 को एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया । कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य एनआईटी जमशेदपुर की राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर शैक्षणिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए एक स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करना था।
अनुसंधान एवं परामर्श के अधिष्ठाता प्रो. सतीश कुमार ने स्वागत भाषण देते हुए कार्यशाला के उद्देश्यों को प्रस्तुत किया। उन्होंने संकाय सदस्यों, शोधार्थियों और विभागों को गुणवत्तापूर्ण शोध, वित्तपोषित परियोजनाओं, बौद्धिक संपदा, परामर्श कार्यों और आँकड़ा-आधारित योजना पर अधिक ध्यान देने का आह्वान किया।
एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने अपने संबोधन में संस्थान की उपलब्धियों और भविष्य की दिशा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एनआईटी जमशेदपुर के पास मजबूत शैक्षणिक आधार, अनुभवी संकाय, प्रतिभाशाली विद्यार्थी और औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ने की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने बहुविषयी शोध, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, नवाचार परिवेश और उद्योग-सम्बद्ध परियोजनाओं को संस्थान की वैश्विक उत्कृष्टता यात्रा के प्रमुख आधार बताया। प्रो. सुनील कुमार, सीएसआईआर-नीरी, नागपुर ने शोध गुणवत्ता, सतत विकास, पर्यावरणीय शोध और बहुविषयी कार्य के महत्व पर चर्चा की। डॉ. कुमारस्वामी ने वैश्विक क्रम निर्धारण रणनीति, संस्थागत तुलनात्मक मूल्यांकन, शैक्षणिक प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर मार्गदर्शन दिया। डॉ. कार्तिक श्रीधर, उपाध्यक्ष, आईकेयर ने संस्थागत क्षमता निर्माण, अंतरराष्ट्रीयकरण और उच्च शिक्षा नेतृत्व से जुड़े विषयों का उल्लेख किया । वहीं दयानिधि उर्मलिया ने ग्रामीण विकास, भारतीय ज्ञान प्रणाली, सामाजिक विस्तार और सामाजिक प्रभाव को संस्थागत मूल्यांकन पर प्रकाश डाला । विशेषज्ञों ने विभागीय स्तर पर लक्ष्य निर्धारण, शोध उपलब्धियों के व्यवस्थित अभिलेखन और सामूहिक संस्थागत प्रयासों पर बल दिया।
समापन अवसर पर निदेशक ने सभी विशेषज्ञों, आयोजकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कार्यशाला से प्राप्त सुझावों को संस्थान की भविष्य की रणनीति में शामिल किया जाएगा। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. तितास कुमार मुखोपाध्याय ने प्रस्तुत किया। यह कार्यशाला एनआईटी जमशेदपुर की शोध, नवाचार, परामर्श, अकादमिक उत्कृष्टता और वैश्विक पहचान को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रही।

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