(27 सितंबर अंतर्राष्ट्रीय बेटी दिवस और पर्यटन दिवस पर विशेष)
Upgrade Jharkhand News. भारत की भूमि सनातन काल से ही अपनी अनूठी सांस्कृतिक परंपराओं, उच्च मानवीय आदर्शों और अटूट जीवन-मूल्यों के लिए संपूर्ण विश्व में जानी जाती रही है। दुनिया के मानचित्र पर भारत केवल एक भू-भाग या देश मात्र नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी जीवित सभ्यता का प्रतिनिधित्व करता है जिसने हमेशा से प्रकृति, मनुष्य और परमात्मा के बीच संतुलन स्थापित करने का संदेश दिया है। आज जब पूरा विश्व बेटियों के अधिकारों, उनके संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने के वैश्विक दिवसों को मना रहा है, तब भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थिति इस बात का प्रमाण देती है कि इन दोनों ही क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर हमारा कोई मुकाबला नहीं है। विश्व के अन्य देशों के लिए भले ही बेटियों के संरक्षण और पर्यटन के संवर्धन जैसे विषय आधुनिक काल की देन या वैश्विक अभियानों का हिस्सा हों, लेकिन भारत के लिए यह कोई नई अवधारणा नहीं है। हमारे यहां बेटियों को पूजने और उन्हें एक स्नेहिल, सुरक्षित तथा गरिमापूर्ण वातावरण में पोषित करने के संस्कार सनातन काल से ही हमारी जीवनशैली के मूल तत्व रहे हैं। ठीक इसी प्रकार, भारत में पर्यटन कभी भी केवल मौज-मस्ती, मनोरंजन या आर्थिक लाभ अर्जित करने का साधन मात्र नहीं रहा। प्राचीन काल से ही हमारे देश में धार्मिक, सामाजिक, शैक्षणिक और आध्यात्मिक पर्यटन संपूर्ण मानव जाति की भलाई के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। अन्य संस्कृतियों में पर्यटन का उद्देश्य जहां एक अल्पकालिक मनोरंजन हो सकता है, वहीं भारतीय संस्कृति में पर्यटन का अभिप्राय आत्म-शांति, एकात्मता, संस्कृति के बोध और परब्रह्म की खोज का एक सकारात्मक माध्यम रहा है। आज भले ही वैश्विक बेटी दिवस और विश्व पर्यटन दिवस जैसे मौकों पर दुनिया भर में अनेक औपचारिक आयोजन, गोष्ठियां और कार्यक्रम आयोजित किए जाते हों, लेकिन बेटियों के सम्मान और पर्यटन के विकास में हमारी निष्ठा सदियों से असंदिग्ध, सात्विक और सहज रही है।
जब हम बेटियों के संरक्षण और उनके सशक्तीकरण की दिशा में भारत के आधुनिक प्रयासों को देखते हैं, तो मध्य प्रदेश का मॉडल पूरे देश और विश्व के सामने एक बेमिसाल और प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत करता है। मध्य प्रदेश शासन द्वारा बेटियों के जन्म से लेकर उनके पूरे जीवन-चक्र को ध्यान में रखते हुए जिस निष्ठा और समर्पण के साथ नीतियां बनाई गई हैं, वह शासन के केवल प्रशासनिक दायित्व को नहीं, बल्कि एक अभिभावक और संरक्षक की आत्मीय भूमिका को रेखांकित करती है। मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में अनेक ऐसी दूरगामी और कल्याणकारी योजनाओं का निष्ठापूर्वक परिपालन किया जा रहा है, जो बेटियों को न केवल सामाजिक और आर्थिक रूप से सुरक्षित कर रही हैं, बल्कि उन्हें शिक्षित, सुयोग्य और जीवन की हर कठिन से कठिन परिस्थिति का डटकर सामना करने वाली आधुनिक वीरांगनाओं के रूप में स्थापित कर रही हैं। यह सेवा और समर्पण का सिलसिला बच्ची के इस धरा पर आने के साथ ही, यानी उसके जन्म के प्रथम क्षण से ही प्रारंभ हो जाता है। बालिकाओं के जन्म को अभिशाप के बजाय उत्सव में बदलने की जो क्रांति मध्य प्रदेश की धरती से शुरू हुई, उसने आज देश भर में नारी सशक्तीकरण का नया इतिहास रचा है। कन्या के रूप में जन्म लेने से लेकर एक समर्थ महिला बनने तक, उनके पोषण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव रखने तक शासन हर कदम पर उनके साथ खड़ा दिखाई देता है। इतना ही नहीं, जब बेटियां विवाह योग्य आयु में प्रवेश करती हैं, तो उनके विवाह की चिंता और उसकी समस्त व्यवस्थाओं को भी शासन एक संरक्षक की भांति अपने कंधों पर लेता है।
कन्या के जन्म से लेकर उसके संपूर्ण अस्तित्व के बने रहने तक मध्य प्रदेश की मोहन सरकार 'लाडली लक्ष्मी' और 'लाडली बहना' जैसी संवेदनशील तथा दूरदर्शी योजनाओं के माध्यम से नारी शक्ति के जीवन को संवार रही है। यह केवल आर्थिक सहायता देने वाली योजनाएं नहीं हैं, बल्कि यह समाज की सोच को बदलने और बेटियों के प्रति सम्मान तथा आत्मीयता का भाव मजबूत करने वाले महा-अभियान हैं। आज की भारतीय बेटियां केवल घर के साधारण कामकाज या पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे हर एक क्षेत्र में अपनी असीम योग्यता, नेतृत्व क्षमता और प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। आज मध्य प्रदेश और भारत की बेटियों को घर के आंगन को संभालने से लेकर अंतरिक्ष के अंतिम छोर तक, यानी चंद्रयान और मंगलयान जैसे इतिहास रचने वाले बेहद जटिल और महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशनों में पूरी सहजता, आत्मविश्वास और दक्षता के साथ योगदान देते हुए देखा जा सकता है। यह इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि जब बेटियों को सुरक्षा, शिक्षा, पोषण और सही अवसर का स्नेहिल वातावरण मिलता है, तो वे राष्ट्र का नाम संपूर्ण विश्व में रोशन करने की अपार क्षमता रखती हैं। शासन का यह संरक्षक स्वरूप बेटियों को एक ऐसा संबल प्रदान कर रहा है, जिससे वे आत्मनिर्भर होकर नए भारत की प्रगति गाथा लिख रही हैं।
पर्यटन के क्षेत्र में भी मध्य प्रदेश आज देश ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में नित्य नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण हो या आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का विस्तार, मध्य प्रदेश शासन की नीति में अटूट श्रद्धा, ऐतिहासिक गौरव और आधुनिक दृष्टि का एक अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। उज्जैन में भगवान श्री महाकालेश्वर के भव्य और दिव्य महाकाल लोक का निर्माण हो, ओरछा में रामराजा सरकार की पावन नगरी का सांस्कृतिक कायाकल्प हो, ओंकारेश्वर महादेव में आध्यात्मिक केंद्र का पुनरुद्धार हो या फिर भगवान श्री परशुराम लोक का निर्माण कार्य,इन सभी धर्मशास्त्र आधारित और सांस्कृतिक क्षेत्रों में हो रहा गगनचुंबी एवं ऐतिहासिक विकास यह स्पष्ट रूप से बताता है कि मध्य प्रदेश अपनी जड़ों और निष्ठाओं के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है। यह विशाल निर्माण कार्य केवल पत्थरों और कंक्रीट का ढांचा मात्र नहीं हैं, बल्कि यह हमारी सनातन चेतना, स्थापत्य कला और गौरवशाली इतिहास की पुनर्रचना हैं। विश्व के अनेक विकसित देशों में पर्यटन का दायरा केवल प्राकृतिक दृश्यों, समुद्र तटों या कृत्रिम मनोरंजन स्थलों तक ही सिमट कर रह जाता है, लेकिन मध्य प्रदेश का पर्यटन दर्शन अत्यंत व्यापक और गहरा है। यहां जब कोई यात्री या श्रद्धालु आता है, तो वह केवल दर्शनीय स्थलों को देखता ही नहीं, बल्कि एक अलौकिक शांति, अंतर्मन की तृप्ति और आत्म-साक्षात्कार का अनुभव करता है। मध्य प्रदेश की यह पवित्र धरा और यहां के आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र विकसित देशों के लिए भी एक नई प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं कि कैसे अपनी सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजते हुए आधुनिक पर्यटन को एक नई ऊंचाई दी जा सकती है।
पर्यटन दिवस और वैश्विक बेटी दिवस का यह सुखद संयोग हमें यह सोचने का अवसर प्रदान करता है कि किसी भी समाज की वास्तविक समृद्धि और महानता केवल उसकी ऊंची इमारतों या आर्थिक आंकड़ों से तय नहीं होती, बल्कि इस बात से तय होती है कि वह समाज अपनी बेटियों को कितना सम्मान देता है और अपनी सांस्कृतिक जड़ों एवं ऐतिहासिक धरोहरों को कितना सहेज कर रखता है। इस कसौटी पर भारत और विशेष रूप से मध्य प्रदेश की भूमिका अनुकरणीय और सात्विक रही है। बेटियों के प्रति अपार स्नेह, उनकी सुरक्षा और सशक्तीकरण का मामला हो या फिर पर्यटन स्थलों का सर्वांगीण और गरिमापूर्ण विकास, दोनों ही मामलों में मध्य प्रदेश की प्रतिबद्धता अत्यंत ईमानदार, पारदर्शी और स्वाभाविक है। जिस राज्य में बेटियों को देवी का स्वरूप मानकर उनके जन्म से लेकर संपूर्ण जीवन का पोषण किया जाता हो और जहां की मिट्टी का हर कण अपने आप में एक इतिहास, एक तीर्थ और एक प्रेरणा समेटे हुए हो, वह राज्य स्वाभाविक रूप से पूरे विश्व के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करता है।
आज जब हम इन दो महत्वपूर्ण अवसरों को मना रहे हैं, तो हमें इस बात पर गर्व होना चाहिए कि हमारी संस्कृति ने हमें सिखाया है कि नारी ही सृष्टि का आधार है और हमारी धरोहरें ही हमारी पहचान हैं। बेटियों की सफलता और पर्यटन के क्षेत्र में रोज बनते नए कीर्तिमान इस बात का स्पष्ट संदेश हैं कि मध्य प्रदेश और भारत आने वाले समय में विश्व पटल पर एक नई सांस्कृतिक और सामाजिक क्रांति का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तत्पर हैं। बेटियों के सपनों को नए पंख देना और हमारे धार्मिक तथा सांस्कृतिक स्थलों को भव्यता प्रदान करना, यह केवल सरकारी नीतियों का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह हमारे पूरे समाज का सामूहिक संकल्प है। यह सात्विक निष्ठा और सहज भाव ही भारत को विश्व गुरु के स्थान पर पुनः प्रतिष्ठापित करने की दिशा में सबसे मजबूत कदम है, जहां संस्कृति, संवर्धन, सशक्तीकरण और आध्यात्मिक पर्यटन का संगम पूरी दुनिया को शांति और समृद्धि का नया मार्ग दिखाता रहेगा। डॉ. राघवेंद्र शर्मा

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