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Jamshedpur अधिवक्ता विकास चंद्रा ने झारखंड हाई कोर्ट में पीआईएल दाखिल किया, 140 साल पुरानी रांची कैफोर्ड जैसे अमूल्य धरोहर को बचाने के प्रयास का संकल्प दोहराया Advocate Vikas Chandra files PIL in Jharkhand High Court, reiterating his resolve to save the 140-year-old Ranchi Cafford, a priceless heritage site.

 


Jamshedpur (Nagendra) लगभग 140 वर्ष पूर्व निर्मित मुख्यमंत्री आवास कैफोर्ड हाउस को सुरक्षित बताकर भवन निर्माण विभाग द्वारा ध्वस्त किए जाने के फैसले का जमशेदपुर व्यवहार न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता विकास चंद्र ने विरोध किया है। इस संबंध में अधिवक्ता ने 16 जून 2026 को झारखंड हाई कोर्ट में पीआईएल दाखिल किया है। तुलसी भवन बिष्टुपुर में आयोजित एक प्रेस वार्ता में अधिवक्ता विकास चंद्र ने पत्रकारों को उपरोक्त जानकारी दी। प्रेस को संबोधित करते हुए अधिवक्ता और विकास चंद्र ने कहा है कि उन्होंने झारखंड के भवन निर्माण विभाग के इस फैसले को झारखंड हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए एक पीआईएल दाखिल किया है, जिसमें इस प्राचीन भवन को अमूल्य धरोहर बताते हुए इसे सुरक्षित और संरक्षित किए जाने का अनुरोध किया है। इस याचिका पर सुनवाई होनी है।


अधिवक्ता विकास चंद्रा ने कहा कि 1,884 में निर्मित और औपनिवेशिक वास्तु कला की एक महत्वपूर्ण धरोहर कैफोर्ड हाउस न केवल एक भवन है बल्कि ऐतिहासिक और स्थापत्य कला की दृष्टि से महत्वपूर्ण भी है। यह झारखंड के प्रशासनिक इतिहास का भी अभिन्न हिस्सा रहा है। छोटा नागपुर क्षेत्र के पहले कमिश्नर के आवास के रूप में यह स्थापित किया गया था। बाद में यह भवन झारखंड के अनेक मुख्यमंत्रियों द्वारा उपयोग में लाया जाता रहा। किसी भी देश और राज्य की ऐतिहासिक धरोहरें उसकी पहचान , गौरव और सांस्कृतिक विरासत होती है। यह केवल ईंट और पत्थर नहीं बल्कि हमारे इतिहास, कला, वास्तु कला और सभ्यता का जीवंत प्रमाण भी होता है। आज ताजमहल, लाल किला, जामा मस्जिद, अजंता एलोरा की गुफाएं, कोणार्क का सूर्य मंदिर हमारी ऐतिहासिक स्मारकें हैं, जो हमारी सभ्यता और उच्च संस्कृति को प्रदर्शित करता है। यह हमारे धार्मिक और विकसित संस्कृति का परिचायक भी है । यह हमारे गौरव का प्रतीक है। उसी तरह से रांची स्थित यह कैफोर्ड हाउस एक ऐतिहासिक मुख्यमंत्री आवास के साथ-साथ झारखंड की विरासत  है।


यह भवन न केवल वास्तुकला का एक उत्कृष्ट नमूना है बल्कि यह राज्य के प्रशासनिक इतिहास का भी साक्षी रहा है। कई महत्वपूर्ण बैठकों का इतिहास भी इसके साथ जुड़ा है। भवन निर्माण विभाग द्वारा इस ऐतिहासिक भवन को असुरक्षित बताकर गिराए जाने के निर्णय को अधिवक्ता विकास चंद्र ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री से मिलकर मांग पत्र सौंपेंगे और मुख्यमंत्री से स्वयं मांग करेंगे की इस भवन का संरक्षण किया जाए । इसका मरम्तिकरण किया जाए तथा इसको और भी बेहतर आकार देने का प्रयास किया जाए। इस ऐतिहासिक भवन को बिना मूल्यांकन किये गिराए जाने का फैसला अत्यंत निराशाजनक और चिंताजनक है। उन्होंने बताया है की इस भवन के स्थान पर लगभग 22 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक मुख्यमंत्री आवास का निर्माण लगभग 100 करोड रुपए की लागत से किए जाने की योजना है। अधिवक्ता विकास चंद्र ने पत्रकारों को बताया की धरोहर को नष्ट करना आने वाली पीढ़ियों से उसका इतिहास छिनने के बराबर है। आज भी राज्य में कई लोग बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं को उपलब्ध कराने का प्रयास बहुत धीमा है। अधिवक्ता ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने अधीक्षक पुरातत्व विभाग, रांची को पत्र प्रेषित किया है। इसके अलावे भवन निर्माण विभाग, परियोजना भवन, चीफ सेक्रेटरी झारखंड, डिप्टी कमिश्नर रांची को पत्र भेज कर इस भवन के ध्वस्तीकरण पर रोक लगाई जाने की मांग की है।



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