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Jamshedpur चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवालों के खिलाफ पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस का विशाल मार्च एवं प्रदर्शन East Singhbhum District Congress organizes massive march and demonstration against the serious questions raised on the functioning of the Election Commission.

 


Jamshedpur (Nagendra) राष्ट्रीयव्यापी आंदोलन के तहत पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में जिला कांग्रेस अध्यक्ष परविंदर सिंह की अध्यक्षता में विशाल मार्च एवं प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया। मार्च एवं प्रदर्शन कार्यक्रम का नेतृत्व जिलाध्यक्ष परविंदर सिंह एवं पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता ने किया। मार्च आमबगान मैदान, साकची से प्रारंभ होकर उपायुक्त कार्यालय जमशेदपुर पहुंचा, जहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं नेताओं एवं पदाधिकारियों ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता, मतदाता अधिकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।


इस अवसर पर मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव केवल सरकार बनाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनता के मताधिकार और संविधान में उसके विश्वास का सबसे महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए चुनाव आयोग की निष्पक्षता, पारदर्शिता और स्वतंत्रता पर उठने वाला प्रत्येक सवाल गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हाल में सामने आई रिपोर्टों ने चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। द इंडियन एक्सप्रेस की जांच रिपोर्ट के अनुसार, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने लगभग दस महीनों में कम-से-कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट के मुताबिक इन आपत्तियों का संबंध नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता नामों को हटाने एवं बहाल करने, मतदाता सूची के डिजिटल डेटाबेस तक पहुंच, पश्चिम बंगाल में अपीलों तथा SIR से संबंधित प्रक्रियाओं से था। पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि इन 14 आपत्तियों में विशेष रूप से निम्न गंभीर विषय सामने आए हैं—


नए मतदाताओं के Form-6 में SIR से संबंधित अतिरिक्त घोषणा जोड़ने पर आपत्ति। रिपोर्ट के अनुसार निर्वाचन आयुक्त विवेक जोशी ने मई में इस बदलाव को नियमों में संशोधन के बिना किए जाने पर सवाल उठाया था और बाद में संधू ने इसे अपने रिकॉर्डेड नोट में “unauthorised and illegal” बताते हुए हटाने की मांग की। मतदाता सूची के डेटाबेस के केंद्रीकरण पर सवाल। दोनों आयुक्तों ने यह चिंता जताई कि मतदाता सूची में बदलाव करने की शक्ति और डिजिटल नियंत्रण धीरे-धीरे केंद्रीय स्तर पर केंद्रित हो रहा है। राज्य एवं स्थानीय स्तर के वैधानिक चुनाव अधिकारियों की पहुंच पर सवाल। रिपोर्ट के अनुसार राज्य स्तर के अधिकारियों द्वारा ERONet तक पूर्ण और उचित पहुंच न होने की शिकायत भी दर्ज की गई।


चुनाव आयोग के नाम से जारी संचार के लिए आयोग की स्वीकृति का प्रश्न। दोनों आयुक्तों ने इस बात पर आपत्ति दर्ज की कि आयोग के नाम से कुछ संचार बिना आवश्यक अनुमोदन के जारी किए गए। पश्चिम बंगाल में मतदाताओं से संबंधित अपीलों की वैधता और अधिकृत प्रक्रिया पर सवाल। संधू ने पूछा कि आयोग की ओर से ये अपीलें किसने और किसके अधिकार से दायर कीं तथा इसकी प्रक्रिया क्या थी। SIR के दौरान हटाए गए और बहाल किए गए मतदाताओं से संबंधित प्रक्रिया पर आपत्ति। मतदाता सूची के पूरे डेटाबेस की सुरक्षा, अभिरक्षा और नियंत्रण को लेकर चिंता। IT व्यवस्था और चुनावी सॉफ्टवेयर पर पर्याप्त संस्थागत निगरानी को लेकर सवाल। रिपोर्ट के अनुसार दोनों आयुक्तों ने IT से संबंधित कार्य-विभाजन को लेकर कैबिनेट सचिव को भी पत्र लिखा। गोवा में पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करने में सॉफ्टवेयर की भूमिका पर गंभीर सवाल। रिपोर्ट के अनुसार 97 मतदाताओं को स्थानीय स्तर पर पात्र पाए जाने के बावजूद सॉफ्टवेयर में उस निर्णय को दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी और वे अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए। SIR में ‘logical discrepancies’ के आधार पर मतदाता अधिकार प्रभावित होने की चिंता।


जिलाध्यक्ष परविंदर सिंह ने कहा कि मतदाता सूची में बदलाव की वैधानिक शक्ति किस अधिकारी के पास है, इस पर स्पष्टता की मांग। आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया में सभी सदस्यों की जानकारी और सहभागिता का प्रश्न। आयोग के अधिकारियों के कार्य-विभाजन और IT निगरानी व्यवस्था में बदलाव को लेकर आपत्ति। संविधान के अनुच्छेद 324 तथा 2023 के कानून के अनुरूप आयोग की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने की मांग। रिपोर्ट के अनुसार दोनों आयुक्तों ने इस बात पर जोर दिया कि आयोग के नाम से जारी होने वाले संचार के लिए आवश्यक अनुमोदन होना चाहिए। परविंदर सिंह ने कहा कि इन आपत्तियों का सामने आना अपने आप में लोकतंत्र के लिए गंभीर चेतावनी है, भले ही निर्वाचन आयोग ने बाद में यह स्पष्ट किया हो कि उसके अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए और आंतरिक मतभेद सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का सवाल सीधा है—अगर सब कुछ पारदर्शी और नियमसम्मत था, तो आयोग के भीतर बार-बार लिखित आपत्तियां क्यों दर्ज करनी पड़ीं? मतदाता सूची और उसके IT सिस्टम के नियंत्रण को लेकर सवाल क्यों उठे? और इन आपत्तियों के समाधान की पूरी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है? जिला अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि लोकसभा और विभिन्न विधानसभा चुनावों के दौरान मतदाता सूची, SIR, मतदाता नाम जोड़ने-काटने, मतदान प्रक्रिया तथा चुनावी संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि इन प्रक्रियागत कमजोरियों का राजनीतिक लाभ भाजपा और उसके सहयोगी दलों को पहुंचा तथा विपक्षी दलों और आम मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि इन आरोपों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और दस्तावेज-आधारित जांच आवश्यक है।


उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी भी योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची से नहीं हटने देगी और न ही किसी अयोग्य व्यक्ति का नाम जोड़े जाने की पक्षधर है। हमारा स्पष्ट सिद्धांत है— “कोई योग्य मतदाता छूटे नहीं, कोई अयोग्य मतदाता जुड़े नहीं।”परविंदर सिंह ने मांग की कि— SIR से संबंधित सभी महत्वपूर्ण आदेश, आपत्तियां और उनके निस्तारण की प्रक्रिया सार्वजनिक की जाए। निर्वाचन आयोग के दोनों आयुक्तों द्वारा दर्ज 14 आपत्तियों पर बिंदुवार स्पष्टीकरण सार्वजनिक किया जाए। मतदाता सूची के डिजिटल डेटाबेस की सुरक्षा और उसके access-control का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए। Form-6 तथा SIR से संबंधित सभी बदलावों की वैधानिकता स्पष्ट की जाए। मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाल करने की प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।


गोवा समेत जहां पात्र मतदाताओं के नाम तकनीकी अथवा प्रक्रियागत कारणों से प्रभावित हुए हैं, वहां निष्पक्ष समीक्षा की जाए। पिछले लोकसभा एवं विधानसभा चुनावों में मतदाता सूची तथा चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठी शिकायतों की स्वतंत्र जांच कराई जाए। चुनाव आयोग की संवैधानिक स्वायत्तता और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया को मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि मतदाता के अधिकार और लोकतंत्र की संस्थागत विश्वसनीयता की रक्षा के लिए है। जब देश का प्रत्येक नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग करता है, तब उसकी एक-एक वोट की सुरक्षा चुनाव आयोग की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि जब तक मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े इन गंभीर सवालों का संतोषजनक और पारदर्शी जवाब नहीं मिलता, तब तक कांग्रेस लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से जनता के बीच इस मुद्दे को उठाती रहेगी।


उन्होंने कहा— “वोट जनता का अधिकार है, किसी सरकार या किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं। चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर जनता का विश्वास बना रहना ही भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।”मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भाजपा के किस नेता और मंत्री ने लोकसभा और अनेकों विधान सभा के चुनाव को प्रभावित करके जीता है। उनके कारनामें उजागर हो। कार्यक्रम का समन्वय एवं प्रबंधन कार्य उपाध्यक्ष (संगठन) संजय सिंह आजाद ने संपादित किया। मार्च एवं प्रदर्शन कार्यक्रम में प्रदेश नेता रामाश्रय प्रसाद, आनन्द बिहारी दुबे, रविन्द्र कुमार झा, कार्यकारीअध्यक्ष अवधेश सिंह, रियाजुद्दीन खान, बिजय यादव, राकेश तिवारी, ब्रजेन्द्र तिवारी, डाॅ परितोष सिंह,संजीव श्रीवास्तव,मनोज सिंह, अखिलेश  सिंह यादव, काल्टू चक्रवर्ती, खगेनचन्द्र महतो, उपाध्यक्ष राजकिशोर यादव, रामलाल प्रसाद पासवान, योगेन्द्र सिंह यादव, अंसार खान, जसवंत सिंह जस्सी, आशुतोष सिंह, विश्वजीत जेना, महामंत्री शाहनवाज अहमद, सुबोध सिंह सरदार, परविंदर सिंह सोहल, संजय तिवारी, अपर्णा गुहा, किशनलाल महतो, ज्योति मिश्रा, उदय कुमार सिंह, अतुल गुप्ता, सुनील प्रसाद, नवल सिंह, बबलू नौशाद, मकसूद आलम, अजय मिश्र, सुखदेव सिंह मल्ली, गुरदीप सिंह,  सचिव सुब्रतो दास, अजय शर्मा, शिल्पी चक्रवर्ती, राकेश पाण्डेय, रीता शर्मा, सुल्तान अहमद, संदीप मिश्रा, दुर्गा प्रसाद, शिबू सिंह, अंकुश बनर्जी, सुनीता ओझा, जीएम रजा, रंजीत सिंह, शमशेर आलम, मंच-मोर्चा अध्यक्ष/चेयरमैन में सेवादल राजा सिंह राजपूत, महिला कांग्रेस नलिनी सिन्हा, युवा नवनीत मिश्र, अल्पसंख्यक विभाग सोहेल खान, एनएसयुआई सचिन कुमार सिंह, ओबीसी विभाग जिला प्रताप यादव, नगर सुरेंद्र शर्मा, अजा विभाग लखिंदर करूवा, स्वास्थ्य ओंकार सिंह, परिवहन राजू वर्मा, सेवादल रेनू मिश्र, प्रखण्ड अध्यक्ष बबुआ झा, शिशुलाल महतो, आशीष ठाकुर, राजेश कुमार, मनोज महतो, मण्डल अध्यक्ष विनोद यादव, फैयाज आलम अंसारी, रंजन सिंह, राकेश दास, अखिलेश सिंह, दीपक यादव, देवाशीष घोष, राजनारायण यादव, मुन्ना मिश्र, वरिष्ठ नेतागण में गुलाम सरवर मनोज उपाध्याय इंतेक़ाम बस्ती कामेश्वर सिंह अमित डोज राजकुमार दास रणजीत सिंह अखिलेश दिनेश बिलाल गुफरान एसआरके कमलेश काशिफ राजा खान राजेंद्र सिंह अमर कुमार मिश्रा हिंदू भूषण यादव रवि शंकर सिंह देवशरण सिंह उषा सिंह शिखा चौधरी, लकी शर्मा सुदर्शन तिवारी सहित सैकड़ो कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए। 


Not इस कार्यक्रम में पार्टी के लोगों ने काले कपड़े पहन कर प्रदर्शन किया और काला दिवस के रूप में मनाया।



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