Jamshedpur (Nagendra) बिस्टुपुर स्थित माईकल जान आडिटोरियम में सर्वोदय समिति के द्वारा साझी शहादत साझी विरासत विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस आयोजन में मुख्य अतिथि पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आज देश जहरीले दौर से गुजर रहा है। आज देश में घृणा, नफरत विद्वेष समाज को तोड़ने ,देश को तोड़ने की साजिश हो रही है। उन्होंने कहा कि साझी शहादत साझी विरासत काफी गंभीर विषय है और आज देश इस दौर से गुजर रहा है। आज देश की स्वतंत्रता में सभी लोगों ने अपनी कुर्बानियां दी। उस समय कोई किसी का जाति न किसी का धर्म पुछता था सभी धर्म जाति के लोगों ने मिलकर देश की आज़ादी के लिए शहादत दी ,वह हुई साक्षी शहादत और शहादत के बाद साझी विरासत का समय आया और आपस में हम सब उलझ रहे हैं। श्री सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि न मंदिर से न मस्जिद से न भाषा से न जाति से पहचान बनी है । हमारी पहचान इस मिट्टी से और इस देश से है। श्री सिंह ने कहा कि आज देश में बच्चों के बीच जहर बोने का काम किया जा रहा है । हमारे देश की यह खुबसुरती रही है कि बहुसंख्यक की आवादी वाले लोग अल्पसंख्यक समुदाय को मदरसे के लिए जमीन मुहैया कराया है यह साझी शाहदत साझी विरासत की पहचान है।
श्री सिंह ने अपने संबोधन में बिहार से अलग हुए झारखण्ड राज्य के निर्माण को अधुरा बताया और कहा कि वृहद झारखण्ड का निर्माण करना था लेकिन नहीं हो पाया । बिहार से झारखण्ड को अलग किया गया लेकिन वह झारखण्ड का निर्माण अधूरा है । वृहद झारखण्ड में ओडिशा का आदिवासी क्षेत्र, छत्तीसगढ़ का आदिवासी क्षेत्र और बंगाल का आदिवासी क्षेत्र और बिहार का आदिवासी क्षेत्र समाहित है।लेकिन वृहद झारखण्ड के निर्माण में अधूरा झारखण्ड का निर्माण हुआ । यह झारखण्ड का निर्माण नहीं बल्कि बिहार को खंडित किया गया है।
उत्तर प्रदेश के पूर्व कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने अपने संबोधन में कहा कि जमशेदपुर की धरती पर साझी शहादत साझी विरासत साझी सियासत साझी संस्कृति भी मुख्य रूप से होना चाहिए। लोहे का कारखाना ही नहीं आप सभी ने एकता में अनेकता और खुन पसीने से सींचने का काम किया है। साझी शहादत साझी विरासत जैसे राष्ट्रीय संगोष्ठी की जरूरत महसूस की जा रही है। भारत की एकता में अनेकता जगाने वाला भारत की भारत निर्माण में अपने खून पसीने बहाकर सींचने का काम किया जा रहा है । राष्ट्रीय एकता का यह सेमिनार सबको जोड़ने की वैचारिक हुंकार है।
झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने अपने संबोधन में कहा कि देश किस परिस्थितियों से आज गुजर रहा है जो आज देश में साझी शहादत साझी विरासत जैसे संगोष्ठी करने की जरूरत पड रही है । देश में पूर्वजों ने जो शहादत दी है वह खतरे में पड़ते नजर आ रही है । उन्होंने कहा कि आज महात्मा गॉंधी के बारे में अनाप शनाप बोला जा रहा है । नाथूराम गोडसे के चाहने वालों की संख्या बढती जा रही है और महात्मा गॉंधी के चाहने वाले कमजोर पड़ते नजर आ रहे हैं । उन्होंने कहा कि आज परिस्थिति अनुसार साझी शहादत साझी विरासत के साथ साझी सियासत भी जोड़ देना चाहिए । आज इस संगोष्ठी में जो बिषय रखा गया वह बहुत ही गंभीर विषय है और इसमें वृहद चर्चा की जरूरत है जिस प्रकार गांधीजी ने लाठी और धोती लपेट कर अंग्रेज शासन काल से मुकाबला किया और देश छोड़ कर जाने के लिए मजबूर कर दिया। इस संगोष्ठी में बार बार वक्ताओं ने गांधीजी के नामों की चर्चा की। आज के संगोष्ठी अपने आप में एक महान साझी शहादत साझी विरासत के तर्ज को दोहराता है।
ईचागढ के पूर्व विधायक अरविन्द कुमार सिंह ने अपने संबोधन में देश की विषम परिस्थिति और तत्काल के समयकाल का विस्तृत चर्चा की और सभागार में उनके संबोधन के दौरान उनकी बातों का समर्थन करते हुए जोर दार ताली बजाकर समर्थन किया गया। इस संगोष्ठी का मंच संचालन सर्वोदय समिति के महासचिव मनोज कुमार सिंह ने किया और संगोष्ठी के स्वागताध्यक्ष महेन्द्र मिश्र ने स्वागत भाषण दिया। वहीं सर्वोदय समिति के अध्यक्ष रियाजउद्दीन खान ने अध्यक्षीय उदबोधन के दौरान साझी शहादत साझी विरासत पर प्रकाश डाला।
इस संगोष्ठी में मंच पर आनंद मोहन सिंह, अजय कुमार लल्लू, प्रदीप कुमार बालमूचू, अरविन्द कुमार सिंह, शहजादा अनवर, रवींद्र सिंह, राकेशवर पाण्डेय, विजय खान, मनोज आनंद, अंकुर सिंह, परविंदर सिंह, आर के सिंह, अशोक चौधरी, राजेश ठाकुर, उदय कुमार सिंह , रईस रिजवी छब्बन मौजूद थे। अंत में धन्यवाद ज्ञापन कोषाध्यक्ष राणा सिंह ने किया। संगोष्ठी के शुरुआत में सभी अतिथियों को शाल ओढाकर बुके एवं मेमोंटो और थैला देकर सम्मानित किया गया। साथ ही सर्वोदय समिति की ओर से वरिष्ठ सामाजिक सरोकार रखने वालों को भी शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। इससे पहले मंच पर उपस्थित सभी अतिथियों द्वारा संयुक्त से दीप प्रज्ज्वलित कर संगोष्ठी की शुरुआत की गई।

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